फर्मी विरोधाभास या पैराडॉक्स


फर्मी विरोधाभास, जिसे फर्मी पैराडॉक्स भी कहा जाता है, अंतर खगोलीय विकसित सभ्यताओं के अस्तित्व की उच्च संभावना और उनके अस्तित्व के प्रमाणों के अभाव के बीच का विरोधाभास है। यह प्रश्न उठाता है कि ब्रह्मांड की विशालता और आयु के बावजूद, मनुष्य ने अन्य बुद्धिमान जीवन के कोई संकेत क्यों नहीं खोजे हैं। इस विरोधाभास को सबसे पहले 1950 में भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने उजागर किया था, जिन्होंने प्रसिद्ध प्रश्न पूछा था, “सब लोग कहाँ हैं?”

Where is everybody?


इस विरोधाभास के आधार के कुछ मुख्य बिंदु कुछ ऐसे है:

ब्रह्मांड की विशालता और आयु:
ब्रह्माण्ड में अरबों आकाशगंगाएं है। केवल हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे हैं, जिनमें से कई हमारे सूर्य से भी पुराने हैं।

रहने योग्य ग्रहों की संभावना:
हर तारे के पास भी कम से कम तीन चार ग्रह है। यह सांख्यिकीय रूप से संभव है कि इनमें से कई तारों पर पृथ्वी के समान जीवन को विकसित करने में सक्षम ग्रह हों।

तारों के बीच यात्रा की संभावना:
यदि उन्नत सभ्यताएँ मौजूद हैं, तो हो सकता है कि उन्होंने तारों के बीच यात्रा की तकनीक विकसित कर ली हो, जिससे वे अपनी आकाशगंगा में नई कॉलोनी, उपनिवेश स्थापित कर सके।

इन कारकों के बावजूद, हमें प्रत्यक्ष अवलोकन या प्राप्त संकेतों के माध्यम से, एलियन सभ्यताओं का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। इससे यह प्रश्न उठता है कि ब्रह्मांड इतना शांत और अन्य बुद्धिमान जीवन से रहित क्यों प्रतीत होता है?

एन्रीको फर्मी
जन्म की तारीख और समय: 29 सितंबर 1901, रोम, इटली
मृत्यु की जगह और तारीख: 28 नवंबर 1954, शिकागो, इलिनॉयस, संयुक्त राज्य अमेरिका
इनाम: भौतिकी में नोबेल पुरस्कार, मट्टुक्ती मेडल, मैक्स प्लैंक मेडल ·
राष्ट्रीयता: अमेरिकी, इतालवी
शिक्षा: लाइडिन यूनिवर्सिटी (1923–1924), University of Göttingen (1923–1923) ·

सेटी

सेटी इंस्टीट्यूट (SETI Institute), एक अलाभकारी संगठन है जिसका उद्देश्य ब्रह्मांड में जीवन की उत्पत्ति, प्रकृति व व्यापकता का पता लगाना, अन्वेषण करना व व्याख्या करना है।

विश्व की शक्तिशाली वेधशालाओं और दूरदर्शियों की मदद से सेटी ब्रह्मांड के कोने कोने से आने वाले रेडियो संप्रेषणों को एकत्रित कर उनका विश्लेषण करती है। अभी तक अभी तक की गणना के अनुसार ब्रह्माण्ड में हम अकेले हैं।

फर्मी विरोधाभास के संभावित कारण

कई सिद्धांत और अवधारणाएं फर्मी के विरोधाभास को हल करने का प्रयास करती हैं, जिनमें शामिल हैं:

द ग्रेट फ़िल्टर:
इससे पता चलता है कि एक या एक से अधिक समस्याएं या नियम हैं जो सभ्यताओं को उस स्तर तक पहुँचने से रोकती हैं कि वे अंतरखगोलीय यात्रा या संपर्क स्थापित कर सके या वे अपने उपनिवेश स्थापित कर सकें या उनका पता भी लगाया जा सके।

आत्म-विनाश:
सभ्यताएँ तकनीकी प्रगति या अन्य माध्यमों से आत्म-विनाश की ओर प्रवृत्त हो सकती हैं, जिससे वे खोजे जाने लायक लंबे समय तक टिक नहीं पातीं। विकसित सभ्यताएं इतने समय टिक ना पाए कि उन्हें खोजा जा सके। हमने खुद पृथ्वी के पर्यावरण को बर्बाद कर दिया है और आत्मविनाश के हथियार बना लिए हैं।

रुचि या क्षमता का अभाव:
संभव है कि अन्य एलियन सभ्यताएँ अपने ग्रह बाहर सभ्यताओं से संवाद या अन्वेषण में रुचि नहीं ले रही हों, या उनके पास ऐसा करने के लिए आवश्यक तकनीक नहीं हो।

हम ठीक से नहीं सुन/खोज रहे हैं:
परग्रही जीवन की खोज के हमारे वर्तमान तरीके अपर्याप्त हो सकते हैं, और हम सूक्ष्म या अपरंपरागत संकेतों को अनदेखा कर रहे होंगे।

वे अपने आपको छिपा कर रख रहे हैं:
ऐसी संभावना है कि उन्नत सभ्यताएँ जानबूझकर हमसे छिप रही हों, शायद किसी “अंधेरे जंगल” जैसे  स्थिति के कारण जहाँ उन्हें संभावित रूप से शत्रुतापूर्ण संस्थाओं द्वारा खोजे जाने का डर हो। ध्यान रहे विकसित सभ्यता किसी अविकसित सभ्यता से मिले तो अविकसित सभ्यता नष्ट हो जाती है, माया, इंका, ऑस्ट्रेलियन जनजाति इसके उदाहरण है।

फर्मी विरोधाभास अनुसंधान और चर्चा का एक सक्रिय विषय बना हुआ है, जो वैज्ञानिकों को परग्रही जीवन की संभावनाओं और उन संभावित चुनौतियों का पता लगाने के लिए प्रेरित कर रहा है जो हमें उनसे मिलने से रोक रही हैं।

फर्मी विरोधाभास या पैराडॉक्स&rdquo पर एक विचार;

इस लेख पर आपकी राय:(टिप्पणी माड़रेशन के कारण आपकी टिप्पणी/प्रश्न प्रकाशित होने मे समय लगेगा, कृपया धीरज रखें)