अंतरिक्ष मे वेलेंटाईन डे


W5 एक निहारिका है जो 6000 प्रकाश वर्ष दूर कैसीओपीया(Cassiopeia) तारामंडल की ओर है। यह विशालकाय है और आकाश मे 2×1.5 डीग्री तक चौड़ी है(पूर्ण चंद्रमा से … पढ़ना जारी रखें अंतरिक्ष मे वेलेंटाईन डे

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 05 : पृथ्वी जैसे सौर बाह्य ग्रह की खोज


परग्रही जीवन की खोज के लिये प्रस्तावित ड्रेक का समिकरण पूरी तरह से परिकल्पित(Hypothetical) है। यह समिकरण एक संभावना ही दर्शाता है जो कि वास्तविकता भी हो सकती है। दूसरी ओर सेटी प्रोजेक्ट अंतरिक्ष मे जीवन की खोज बेतरतीब रूप से कर रहा है। परग्रही जीवन की खोज का एक उपाय सौर मंडल के बाहर पृथ्वी जैसे ग्रहो की खोज कर उन पर सेटी का ध्यान केन्द्रित करना होगा।

हाल ही मे अंतरिक्ष मे जीवन की खोज को सौर मंडल के बाहर ग्रहो की खोज  से मजबूती मीली है। सौरमंडल बाह्य ग्रहो की खोज के पिछे एक परेशानी यह है कि ये ग्रह स्वयं  प्रकाश उत्सर्जित नही करते है जिससे उन्हे किसी दूरबीन से नही देखा जा सकता। ये ग्रह अपने मातृ तारे से हजारो गूणा धुंधले होते है। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 05 : पृथ्वी जैसे सौर बाह्य ग्रह की खोज”

उत्तरी अमरीका निहारिका (बाएं दृश्य प्रकाश में, दायें अवरक्त प्रकाश में )

उत्तरी अमेरिका निहारिका


अपने विकास की हर अवस्था में तारे ! नासा की अंतरिक्ष वेधशाला स्पिटज़र से लिए इस चित्र में आप देख सकते है ,धुल भरे छोटे बिन्दूओ से … पढ़ना जारी रखें उत्तरी अमेरिका निहारिका

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 04 : कहां है वे ?


सेटी प्रोजेक्ट ने अभी तक परग्रही जीवन का कोई भी संकेत नही पकड़ा है। विज्ञानीयो को अब फ्रैंक ड्रेक के बुद्धिमान परग्रही सभ्यता समीकरण के कारक पूर्वानुमानो पर पुनर्विचार करने आवश्यकता महसूस हुयी। हाल मे प्राप्त हुयी खगोल विज्ञान की नयी जानकारीयो के अनुसार बुद्धिमान परग्रही सभ्यता की संभावना, 1960 मे फ्रेंक ड्रेक द्वारा गणना की गयी संभावना से कहीं अलग है। बुद्धिमान परग्रही जीवन की नयी संभावना मूल संभावना से ज्यादा आशावादी और ज्यादा निराशावादी दोनो है।

गोल्डीलाक क्षेत्र

गोल्डीलाक क्षेत्र का एक ग्रह "हमारी धरती"।
गोल्डीलाक क्षेत्र का एक ग्रह “हमारी धरती”।

गोल्डीलाक क्षेत्र तारे से उस दूरी वाले क्षेत्र को कहा जाता है जहां पर कोई ग्रह अपनी सतह पर द्रव जल रख सकता है तथा पृथ्वी जैसे जीवन का भरण पोषण कर सकता है। यह निवास योग्य क्षेत्र दो क्षेत्रो का प्रतिच्छेदन(intersection) क्षेत्र है जिन्हे जीवन के लिये सहायक होना चाहिये; इनमे से एक क्षेत्र ग्रहीय प्रणाली का है तथा दूसरा क्षेत्र आकाशगंगा का है। इस क्षेत्र के ग्रह और उनके चन्द्रमा जीवन की सम्भावना के उपयुक्त है और पृथ्वी के जैसे जीवन के लिये सहायक हो सकते है। सामान्यत: यह सिद्धांत चन्द्रमाओ पर लागू नही होता क्योंकि चन्द्रमाओ पर जीवन उसके मातृ ग्रह से दूरी पर भी निर्भर करता है तथा हमारे पास इस बारे मे ज्यादा सैद्धांतिक जानकारी नही है। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 04 : कहां है वे ?”

केप्लर वेधशाला ने एक सौर मंडल खोज निकाला !


केप्लर ११ तारा अपने ग्रहो के साथ(कल्पना)
केप्लर 11 तारा अपने ग्रहो के साथ(कल्पना)

नासा की अंतरिक्ष वेधशाला केप्लर का प्रयोग करते हुये खगोलशास्त्रीयो ने एक छः ग्रहो वाला सौर मंडल खोज निकाला है। लेकिन यह सौर मंडल विचित्र है क्योंकि इसके छः मे से पांच ग्रह अपने मातृ तारे के काफी समीप की कक्षा मे है। यह कक्षा बुध ग्रह की  कक्षा से भी छोटी है।

इनमे से किसी भी ग्रह को पृथ्वी जैसा नही कह सकते क्योंकि वे सभी पृथ्वी से ज्यादा द्रव्यमान और अत्याधिक गर्म है। लेकिन यह खोज इसलिये महत्वपूर्ण है कि केप्लर अभियान उत्साहजनक परिणाम देने लगा है। पढ़ना जारी रखें “केप्लर वेधशाला ने एक सौर मंडल खोज निकाला !”

मंगल पर धूल के तूफ़ान कुछ ही घंटों में उठ सकते हैं और पूरे ग्रह को कई दिनों पर अपनी चपेट में ले लेते हैं।

मंगल ग्रह पर “आपर्च्युनिटी” के सात वर्ष


लाल ग्रह मंगल की सतह पर सात वर्ष पूरे करने के बाद मंगल अण्वेषण वाहन “आपर्च्युनीटी” ९० मीटर चौड़े सांता मारिया क्रेटर के किनारे खड़ा है। आश्चर्यजनक रूप से “आपर्च्युनीटी” और उसके जुड़वा “रोवर स्प्रिट” को केवल ३ महीने लंबे … पढ़ना जारी रखें मंगल ग्रह पर “आपर्च्युनिटी” के सात वर्ष