श्याम वीवर द्वारा साथी तारे के पदार्थ को निगलना

श्याम विवर(Black Hole) ने तारे को निगला


श्याम विवर द्वारा किसी तारे का निगला जाना और एक्रीशन डिस्क(Accretion Disk) का निर्माण

ब्रिटेन के खगोलविदों ने श्याम विवर में फंस कर एक तारे की मौत होने के सबूत जुटाने का दावा किया है।

बताया जा रहा है कि एक तारा परिभ्रमण के दौरान एक श्याम विवर के इतना क़रीब आ गया कि परिणाम धीमी मौत के अलावा कुछ और हो ही नहीं सकता था। वॉरिक विश्वविद्यालय के खगोलविद डॉ. एंड्र्यू लेवन की टीम ने इस साल 28 मार्च 2011 को अंतरिक्ष में गामा किरणों का एक तूफ़ान (Gama ray Burst – GRB)दर्ज़ किया। आमतौर पर किसी बूढ़े तारे में विस्फोट के दौरान गामा किरणों का रेला निकलता है।

लेकिन ऐसी स्थिति में विकिरण का महाप्रवाह(GRB) एक बार ही होता है, जबकि मार्च में पहली बार दिखा गामा किरणों का प्रवाह ढाई महीने बाद अब भी रह-रह कर ज़ोर पकड़ रहा है।

भारी ऊर्जा
डॉ. लेवन इसे किसी तारे के श्याम विवर की चपेट में आने का नतीजा बता रहे हैं. उन्होंने कहा,

“जितनी मात्रा में ऊर्जा सामने आ रही है, वो वैसी स्थिति में संभव है जब किसी तारे को एक श्याम विवर में फेंक दिया जाए। “

खगोलविदों का मानना है कि हर आकाशगंगा के केंद्र में एक श्याम विवर होता है। लेकिन उसकी उपस्थिति का स्वतंत्र रूप से अंदाज़ा लगा पाना असंभव है क्योंकि श्याम विवर में महागुरुत्व की अवस्था होती है जिसके चंगुल से प्रकाश तक नहीं निकल सकता है। ब्रह्मांड के किसी कोने में श्याम विवर की उपस्थिति का हमें तभी पता चलता है जब तारे जैसा कोई बड़ा खगोलीय पिंड उसका शिकार बनता है।

कोई तारा श्याम विवर में समाने की प्रक्रिया में पहले अपना गोल आकार खोता है। महागुरुत्व के असर से वह लगातार पिचकता जाता है।

तारे का स्वतंत्र अस्तित्व पूरी तरह ख़त्म हो उससे पहले उससे रह-रह कर एक्स और गामा किरणों का रेला निकलता है जो धरती पर रेडियो दूरबीनों के ज़रिए देखा जा सकता है।

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श्रोत : बी बी सी  से साभार

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