क्या सौर मंडल मे बृहस्पति से चार गुणा बड़े ग्रह की खोज हो गयी है ?


सौर मंडल

नही ! अभी तक सौर मंडल मे बृहस्पति से बड़े ग्रह की खोज के कोई पुख्ता प्रमाण नही मीले है।

नेपच्युन के बाद दसंवे ग्रह की खोज का प्रयास शताब्दियो से जारी है। सामान्यतः किसी अज्ञात ग्रह की खोज ज्ञात पिंडो के आसामान्य व्यवहार से प्रारंभ होती है। जब खगोल विज्ञानी किसी ज्ञात ग्रह या धूमकेतुओ के समूह को न्युटन के गति के नियमो का पालन न करते हुये असामान्य गति करते देखते है तब वे किसी अज्ञात भारी पिंड द्वारा अपने गुरुत्व से उस ग्रह/पिंड  को प्रभावित करने का सिद्धांत आगे कर देते है। इसके बाद सभी खगोलिय दूरबीने उस पिंड की खोज मे लग जाती है।

अभी तक यह प्रक्रिया एक बड़ी गलती ही प्रमाणित हुयी है, अधिकतर मामलो मे ज्ञात पिंड की असामान्य गति हमारे मापन मे गलती या उपकरणो मे त्रुटि के रूप मे आयी है। अब तक का एकमात्र अपवाद नेपच्युन की खोज रही है जो कि १८४६ मे युरेनस के अपनी कक्षा मे विचलन के बाद खोजा गया था ।

लुसीयाना विश्वविद्यालय के दो खगोलशास्त्रीयो जान मैटेसे और डैन व्हीट्मीरे ने पत्रिका इकारस(Icarus) मे हमारे सौर मंडल मे एक नये रहस्यमय विशालकाय ग्रह होने की संभावना को प्रस्तावित किया| वाइज के विज्ञानी डेवी किर्कपैट्रीज ने अच्छे भाग्य की ग्रीक देवी के नाम पर इस ग्रह का नाम भी प्रस्तावित कर दिया : टय्के(Tyche)। अधिकतर सहयोगीयो ने उसे पढा और अपने काम पर लग गये। लेकिन मीडीया पगला गया !

यह कहानी इंटरनेट से आगे बढती गयी। ब्रिटिश पत्रिका इंडीपेन्डेंट ने इस ग्रह की संभावना पर एक लेख लिखा और यह इंटरनेट पर एक वायरस की तरह फैल गया। इस आलेख के फैलने के पिछे एक वाक्य था, जिसकी व्याख्या पत्रकारो ने अपनी मनमर्जी से की:

“But scientists now believe the proof of its existence has already been gathered by a NASA space telescope, WISE, and is just waiting to be analysed.”

हिन्दी मे :

“लेकिन विज्ञानी अब मानते है कि इस ग्रह के होने का प्रमाण नासा की अंतरिक्ष वेधशाला WISE ने संग्रहित कर लिया है और विश्लेषण का इंतजार कर रहा है।”

लेकिन इस ग्रह की संभावना को प्रस्तावित करने वाले खगोलशास्त्री जान मैट्सी का कथन है

“हमारा कथन यह था कि कुछ सांकेतिक प्रमाण है कि वहां पर कुछ हो सकता है।”

मैट्सी कहीं पर भी यह दावा नही कर रहे है कि एक नया ग्रह उपस्थित है, उन्होने उसके होने की एक संभावना बतायी है। यदि नया ग्रह है भी तो नासा की अवरक्त वेधशाला वाइज(WISE) मे इसका चित्र हो सकता है जो उसके विशालकाय डाटाबेस मे कहीं दबा होगा।

इस ग्रह की संभावना को प्रस्तावित करने वाले विज्ञानीयो मैट्सी तथा व्हीट्मीरे का साक्षात्कार यहां पढे। ध्यान दे वे “if”,”May” का प्रयोग कर रहे है, वे जानते है कि उनके पास पर्याप्त प्रमाण नही है।

बैड आस्ट्रोनामी के लेखक फील प्लैट के अनुसार यह सनकी धारणा नही है, यह ग्रह हो सकता है लेकिन इसके लिये पर्याप्त प्रमाण नही है। उनके अनुसार अभी यह एक संभावना से ज्यादा कुछ नही है।

इस ग्रह के होने की संभावना कितनी प्रमाणिक है? यह निर्भर करता है कि आप यह प्रश्न किससे कर रहे है। यदि आप यह प्रश्न ULCA  खगोलभौतिकि वैज्ञानिक तथा वाइज के मुख्य जांच कर्ता नेड राईट से पुछेंगे तो उनके अनुसार

” यह फिल्मी कहानीयो जैसा है, वह है लेकिन उनके पास इसके सत्यापन के लिये आंकड़े नही है।”

मैट्सी और डैन व्हीटमोर का उर्ट बादल मे एक विशालकाय ग्रह की उपस्थिती के पक्ष मे दिया गया तर्क नया नही है, यह १९९० से ज्ञात है। कुछ धूमकेतु सूर्य की ओर एक झुकी हुयी दिशा से आते है। उनकी शुरुवात उर्ट बादल से होती है जोकि एक असंख्य छोटी बर्फ की गेंदो से बना है और सौर मंडल की सीमा पर है। अक्सर कोई गुजरता हुआ तारा या आकाशगंगा का गुरुत्विय प्रभाव इस उर्ट बादल मे हलचल पैदा करता है जिससे बर्फ के कुछ पिंड चमकते हुये धूमकेतुओ के रूप मे सूर्य की ओर  आते है।

जब मैटसी और व्हीटमोर ने उर्ट बादल से आनेवाले इन धूमकेतुओ की कक्षाओ का अध्यन किया यो उन्होने पाया कि इनमे से २०% धूमकेतु किसी भी अनियमित दिशा से ना आकर एक विशेष संकरे भाग से आरहे है। इस दिशा से आनेवाले धूमकेतु किसी विशाल पिंड द्वारा  सौर मंडल की अंदर की ओर ढकेले जा रहे हो सकते है। यह एक महाकाय ग्रह जो बृहस्पति से चार गुणा तक का हो सकता है की उपस्थिति की ओर संकेत करता है। इस प्रस्तावित ग्रह का आकार ही विलक्षण नही है, इसकी कक्षा भी विलक्षण है जो कि सूर्य से कई ट्रिलियन किमी है या प्लूटो से हजारो गुणा ज्यादा है।

ग्रीक मिथको के अनुसार टय्के को सामान्यतः दुर्भाग्य की देवी नेमेसीस के साथ जोड़ा जाता है। नेमेसीस १९८० मे एक रहस्यमय पिंड को दिया गया नाम है जिसे डायनासोर के विलुप्त होने के लिये जिम्मेदार माना जाता है। भूगर्भिय प्रमाणो के अनुसार पृथ्वी पर एक नियमित अंतराल मे जीवन विलुप्त होता रहा है; कुछ खगोल शास्त्रीयो के अनुसार इस विलोपन के पिछे धूमकेतु जैसे अंतरिक्षिय पिंड जिम्मेदार हो सकते है।  उनके अनुसार सूर्य का एक धूंधला साथी तारा नेमेसीस एक नियमित अंतराल पर सूर्य की ओर धूमकेतुओ के झुंडो  को भेजता है। नेमेसीस तारे की परिकल्पना अब एक भद्दा सिद्धांत लगता है, ठीक टय्के ग्रह की संभावना की तरह। (पृथ्वी पर जीवन का एक नियमित अंतराल पर विलोपन भूगर्भिय प्रमाणो पर आधारित  विवादास्पद सिद्धांत है।)

१९८० की शुरुवात मे नेमेसीस के सिद्धांत पर खगोल विज्ञानीयो ने खोज की और यह पाया कि नेमेसीस का सिद्धांत फिल्मी कल्पना के जैसा है, इसके समर्थन मे कोई प्रमाण नही है। और कुछ दिनो मे गंभीर वैज्ञानिको ने इसे भूला दिया। इसी तरह कुछ समय पहले नेपच्युन की कक्षा को प्रभावित करने वाले एक और महाकाय ग्रह की परिकल्पना की गयी थी। इसी महाकाय ग्रह की खोज मे बौना नन्हा ग्रह प्लूटो ढुंढ निकाला गया। प्लूटो इतना छोटा था कि नेपच्युन पर यह कोई प्रभाव नही डाल सकता था। बाद मे प्लूटो से ग्रह का दर्जा भी छीन लिया गया। इस सारी कवायद के बाद पता चला कि नेपच्युन की कक्षा मे जो असामान्यता पायी गयी थी वह मापन मे गलतीयो के कारण थी। एक और घटना मे बर्नाड के तारे की परिक्रमा करने वाले एक रहस्यमय ग्रह की परिकल्पना की गयी थी क्योंकि १९६० मे  स्वार्थमोर के खगोलशास्त्री पीटर वान दे कैम्प द्वारा बर्नाड के तारे मे एक डगमगाहट देखी थी। बाद मे दूरबीन की सफाई और दर्पण को बदलने के पश्चात यह डगमगाहट गायब हो गयी।

एक अजीब तथ्य यह भी है कि जिस उर्ट बादल मे इस ग्रह के होने की संभावना प्रकट की गयी है वह उर्ट बादल भी एक परिकल्पना है। वैज्ञानिको का मानना है कि सौरमंडल के चारो ओर गोलाकार बर्फीले पिंडो का एक बादल होना चाहीये जिसे उर्ट बादल का नाम दिया गया है। अभी तक इस बादल की उपस्थिति के भी कोई प्रमाण नही मीले है।

बृहस्पति से चार गुणा बड़ा ग्रह होना भी कठिन है। बृहस्पति किसी ग्रह की विशालता की सीमा पर है, इसमे और द्रव्यमान के डाले जाने पर इसका आकार नही बढेगा, बल्कि उसका घनत्व बढेगा। चार बृहस्पति के बराबर द्रव्यमान होने पर वह संकुचित होने लगेगा। यदि वह ८० बृहस्पति के बराबर द्रव्यमान पा लेता है तब वह अपने संकुचन के कारण नाभिकिय संलयन प्रारंभ कर सकेगा और तारा बन जायेगा। इसमे उर्जा उत्पन्न होगी और उसे संतुलित करने के लिये उसका आकार बढेगा।

यह ग्रह ट्य्के या X सैद्धांतिक रूप से आस्तित्व मे रह सकता है लेकिन पाठ्यपुस्तको को बदलना अभी भी दूर की कौड़ी है। इस ग्रह के होने के सबुत इतने मजबूत नही है कि इसकी तलाश मे दूरबीनो को मोड़ा जाये। यदि वाइज(WISE) के आंकड़े इसकी ओर संकेत देते है तो इस बारे मे सोचा जा सकता है लेकिन इसमे अभी एक वर्ष या दो वर्ष और लगेंगे।

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श्रोत : http://www.time.com/time/health/article/0,8599,2049641,00.html

http://blogs.discovermagazine.com/badastronomy/2011/02/14/no-theres-no-proof-of-a-giant-planet-in-the-outer-solar-system/

क्या सौर मंडल मे बृहस्पति से चार गुणा बड़े ग्रह की खोज हो गयी है ?&rdquo पर एक विचार;

  1. रोचक और ज्ञानपूर्ण विवेचन, ऊर्ट क्लाउड और डर्टी स्नो बाल के विवरण मुझे सदैव आनन्दित करते हैं …
    आप साईंस ब्लागर्स में /पर भी न लिखिए प्लीज!

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