2010 के सुपरनोवा विस्फोट के बाद की तस्वीर(नासा द्वारा तैयार कीया गया मिश्रित चित्र)

एक साथ छः तारों की मृत्यु


अंतरिक्ष में छह बड़े  विस्फोट हुए हैं। पृथ्वी से लाखों करोड़ों किलोमीटर दूर पुराने बड़े तारे इस विस्फोट के बाद खत्म हो गए हैं। वैज्ञानिक धमाकों … पढ़ना जारी रखें एक साथ छः तारों की मृत्यु

विपरीत दिशा मे परिक्रमा करता विचित्र ग्रह


वैज्ञानिको ने हाल मे वृश्चिक तारामंडल के एक तारे WASP-17 की परिक्रमा करते हुये ग्रह WASP-17b के बार मे एक विचित्र तथ्य का पता चला है। … पढ़ना जारी रखें विपरीत दिशा मे परिक्रमा करता विचित्र ग्रह

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 11 : प्रतिपदार्थ(Antimatter) के उपयोग


प्रति पदार्थ यह मानव जाति के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। वर्तमान मे यह चिकित्सा जैसे क्षेत्रो मे प्रयोग किया जा रहा है, तथा भविष्य मे इसे ईंधन , अंतरिक्ष यात्रा के लिए रॉकेट ईंधन तथा विनाशक हथियारों के निर्माण के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

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बुढापे की ओर बढ़ती हुयी मंदाकिनी


यह हमारी अपनी आकाशगंगा मंदाकिनी है जो लगभग 100 हजार प्रकाशवर्ष चौड़ी है। हमारी मन्दाकिनी  आकाशगंगा उम्र के ऐसे दौर से गुजर रही है, जिसके बाद अगले कुछ अरब वर्षों में इसके सितारों के बनने की गति धीमी पड़ जाएगी। … पढ़ना जारी रखें बुढापे की ओर बढ़ती हुयी मंदाकिनी

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 10 : क्या प्रति-ब्रह्माण्ड(Anti-Universe) संभव है?


pic-antimatter-300x291सैद्धांतिक रूप से तथा प्रायोगिक रूप से यह प्रमाणित हो चुका है कि प्रति पदार्थ का अस्तित्व है। अब यह प्रश्न उठता है कि क्या प्रति-ब्रह्माण्ड का अस्तित्व संभव है ?

हम जानते है कि किसी भी आवेश वाले मूलभूत कण का एक विपरीत आवेश वाला प्रतिकण होता है। लेकिन अनावेशित कण जैसे फोटान (प्रकाश कण), ग्रैवीटान(गुरुत्व बल धारक कण) का प्रति कण क्या होगा?

कण और प्रतिकण मिल कर ऊर्जा बनाते है। फोटान और ग्रेवीटान जैसे कण बलवाहक कण होते है, इस कारण से वे स्वयं के प्रति कण हो सकते है। ग्रेवीटान कण स्वयं का प्रतिकण है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण और प्रतिगुरुत्वाकर्षण एक ही है। प्रति पदार्थ को गुरुत्वाकर्षण/प्रतिगुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नीचे ही गीरना चाहीये। जिस तरह गुरुत्व के प्रभाव से पदार्थ के कणो मे आकर्षण होता है, उसी तरह से प्रतिगुरुत्वाकर्षण से प्रति पदार्थ के कणो मे आकर्षण ही होगा। अर्थात गुरुत्वाकर्षण और प्रति गुरुत्वाकर्षण दोनो आकर्षण बल ही है।

(प्रतिगुरुत्वाकर्षण यह शब्द इस संदर्भ मे सही शब्द नही है। प्रतिकण एक दूसरे को साधारण कण की तरह आकर्षित करते है, यह एक अवधारणा है, अभी तक इसे प्रयोगशाला मे प्रमाणित नही किया गया है क्योंकि अब तक कुल निर्मित प्रतिपदार्थ १ ग्राम से भी कम है।)

पाल डीरेक का सिद्धांत दो मूल प्रश्नो का हल देने मे सक्षम है। यह दो मूल प्रश्न है:

  1.  प्रकृति द्वारा प्रतिपदार्थ के निर्माण का उद्देश्य क्या है?
  2.  क्या प्रति ब्रह्माण्ड का अस्तित्व हो सकता है ?

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अपने अंतिम अभियान से एन्डेवर की वापसी


कल रात 1 जून 2011, 06.35 UTC पर अमरीकी अंतरिक्ष यान एन्डेवर पृथ्वी पर केनेडी अंतरिक्ष केंद्र फ्लोरीडा मे सकुशल लौट आया। यह एन्डेवर का अंतिम … पढ़ना जारी रखें अपने अंतिम अभियान से एन्डेवर की वापसी