कैरोलीन हर्शेल (1750-1848) – धूमकेतु की पहचान करने वाली पहली महिला


कैरोलीन हर्शेल (जन्म 16 मार्च, 1750,  हनोवर [जर्मनी] – मृत्यु 9 जनवरी, 1848, हनोवर) एक जर्मन मूल की ब्रिटिश खगोलशास्त्री थीं। उन्हें पहली पेशेवर महिला खगोलशास्त्री माना जाता है। अपनी कड़ी मेहनत के लिए कैरोलीन रॉयल सोसाइटी की सदस्यता से सम्मानित होने वाली पहली महिला थीं जोकि एक रूढ़िवादी संगठन था जिसमें तब तक केवल पुरुष सदस्य थे।

कैरोलीन ने अपने भाई सर विलियम हर्शेल के काम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अकेले ही 1783 में दूरबीन से तीन नीहारिकाओं का पता लगाया और 1786 में वे धूमकेतु की खोज करने वाली पहली महिला बनीं ; अगले 11 वर्षों में उन्होंने सात अन्य धूमकेतुओं को देखा। पढ़ना जारी रखें कैरोलीन हर्शेल (1750-1848) – धूमकेतु की पहचान करने वाली पहली महिला

जर्मन खगोलशास्त्री मारिया विंकेलमैन : धूमकेतु की पहचान करने वाला पहली मानव


धूमकेतु की पहचान करने वाला पहली मानव मारिया विंकेलमैन थी, जो एक जर्मन खगोलशास्त्री थी, जिसका जन्म 25 फरवरी 1670 को जर्मनी के लीपज़िग के पास पैनिट्ज़ में हुआ था। हालांकि, मारिया के पति गॉटफ्रीड किर्च ने उनके शोध परिणामों को अपने नाम से बेशर्मी से प्रकाशित किया और कई साल बीत जाने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वास्तव में सारा श्रेय मारिया को ही मिलना चाहिए। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि मारिया विंकेलमैन को अपने समय की सबसे प्रशंसित महिला शोधकर्ताओं में से एक माना जाता है। मंगलवार, 25 फरवरी को मारिया की 355वीं जयंती होगी। पढ़ना जारी रखें जर्मन खगोलशास्त्री मारिया विंकेलमैन : धूमकेतु की पहचान करने वाला पहली मानव

2024 रसायन नोबेल पुरस्कार :डेविड बेकर(David Baker), डेमिस हसाबिस(Demis Hassabis),जॉन एम. जम्पर( John M. Jumper)


रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने रसायन विज्ञान में 2024 का # नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है, जिसमें आधा हिस्सा डेविड बेकर को “कम्प्यूटेशनल प्रोटीन डिजाइन के लिए” और दूसरा आधा हिस्सा डेमिस हसाबिस और जॉन एम. जम्पर को “प्रोटीन संरचना भविष्यवाणी के लिए” संयुक्त रूप से दिया जाएगा।

रसायनज्ञों ने लंबे समय से जीवन के रासायनिक उपकरणों – प्रोटीन को पूरी तरह से समझने और उस पर महारत हासिल करने का सपना देखा है। यह सपना अब पहुंच के भीतर है। डेमिस हसबिस और जॉन एम. जम्पर ने लगभग सभी ज्ञात प्रोटीन की संरचना की भविष्यवाणी करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता(AI) का सफलतापूर्वक उपयोग किया है। डेविड बेकर ने सीखा है कि जीवन के मूलभूत घटको में महारत कैसे हासिल की जाए और पूरी तरह से नए प्रोटीन कैसे बनाए जाएं। उनकी खोजों का महत्व और कार्यक्षमता बहुत अधिक है।

कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से प्रोटीन के रहस्यों की व्याख्या

जीवन का रसायन विज्ञान कैसे संभव होता है? इस प्रश्न का उत्तर प्रोटीन का अस्तित्व है, जिसे शानदार रासायनिक औजार के रूप में बताया जा सकता है। वे आम तौर पर 20 अमीनो एसिड से बने होते हैं जिन्हें अंतहीन तरीकों से जोड़ा जा सकता है। डीएनए में संग्रहीत जानकारी को ब्लूप्रिंट के रूप में उपयोग करते हुए, अमीनो एसिड को हमारी कोशिकाओं में एक साथ जोड़कर लंबी स्ट्रिंग बनाई जाती है।

फिर प्रोटीन का जादू होता है: अमीनो एसिड की स्ट्रिंग एक अलग – कभी-कभी अनोखी – त्रि-आयामी संरचना (चित्र 1) में मुड़ती और मुड़ती है। यह संरचना प्रोटीन को उनका कार्य देती है। कुछ रासायनिक निर्माण इकाइयां बन जाती हैं जो मांसपेशियों, सींग या पंख बना सकते हैं, जबकि अन्य हार्मोन या एंटीबॉडी बन सकते हैं। उनमें से कई एंजाइम बनाते हैं, जो जीवन की रासायनिक प्रतिक्रियाओं को आश्चर्यजनक सटीकता के साथ संचालित करते हैं। कोशिकाओं की सतहों पर बैठे प्रोटीन भी महत्वपूर्ण हैं, और कोशिका और उसके आस-पास के वातावरण के बीच संचार चैनल के रूप में कार्य करते हैं। पढ़ना जारी रखें 2024 रसायन नोबेल पुरस्कार :डेविड बेकर(David Baker), डेमिस हसाबिस(Demis Hassabis),जॉन एम. जम्पर( John M. Jumper)

2024 भौतिकी नोबेल पुरस्कार: जॉन जे. हॉपफील्ड(John J. Hopfield) और जेफ्री ई. हिंटन (Geoffrey E. Hinton)


रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने जॉन जे. हॉपफील्ड(John J. Hopfield) और जेफ्री ई. हिंटन (Geoffrey E. Hinton) को “कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क के साथ मशीन लर्निंग को सक्षम करने वाली मूलभूत खोजों और आविष्कारों के लिए” 2024 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है।
इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं ने भौतिकी के उपकरणों का उपयोग करके ऐसे तरीके बनाए जो आज की शक्तिशाली मशीन लर्निंग की नींव रखने में सहायक रहे। जॉन हॉपफील्ड ने एक ऐसी संरचना बनाई जो सूचना को संग्रहीत और पुनर्निर्माण कर सकती है। जेफ्री हिंटन ने एक ऐसी विधि का आविष्कार किया जो डेटा में स्वतंत्र रूप से गुणों की खोज कर सकती है और जो अब उपयोग में आने वाले बड़े कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने सूचना में पैटर्न खोजने के लिए भौतिकी का उपयोग किया

हम लोगो के पास अनुभव कि कंप्यूटर भाषाओं के बीच अनुवाद कर सकते हैं, छवियों की व्याख्या कर सकते हैं और यहां तक वे हमसे उचित बातचीत भी कर सकते हैं। शायद कम ही लोग जानते हैं कि इस तरह की तकनीक लंबे समय से शोध के लिए महत्वपूर्ण रही है, इस तकनीक में बड़ी मात्रा में डेटा को पहचानना और उसका विश्लेषण करना होता है। पिछले पंद्रह से बीस वर्षों में मशीन लर्निंग का विकास बहुत तेज़ी से हुआ है और इसमें आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क नामक संरचना का उपयोग किया जाता है। आजकल, जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा मतलब इसी तरह की तकनीक से होता है। पढ़ना जारी रखें 2024 भौतिकी नोबेल पुरस्कार: जॉन जे. हॉपफील्ड(John J. Hopfield) और जेफ्री ई. हिंटन (Geoffrey E. Hinton)

2024 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : विक्टर एम्ब्रोस (Victor Ambros) और गैरी रुवकुन (Gary Ruvkun)


फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2024 का नोबेल पुरस्कार विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को माइक्रोआरएनए की खोज और पोस्ट-ट्रांसक्रिप्शनल जीन विनियमन में इसकी भूमिका के लिए दिया गया है।
इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार दो वैज्ञानिकों को जीन(Gene) गतिविधि को विनियमित(Regulate) करने के तरीके को नियंत्रित करने वाले एक मौलिक सिद्धांत की खोज के लिए सम्मानित करता है।

हमारे गुणसूत्रों में संग्रहीत जानकारी की तुलना हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं के लिए एक निर्देश पुस्तिका से की जा सकती है। ये निर्देश पुस्तिका कोशिका को निर्देश देती है कि उसकी संरचना कैसी हो, उसे क्या कार्य करना चाहिए, इत्यादी। प्रत्येक कोशिका में एक जैसे गुणसूत्र होते हैं, इसलिए प्रत्येक कोशिका में जीन का बिल्कुल समान सेट और उस कोशिका की कार्य प्रणाली के लिए निर्देशों का बिल्कुल समान सेट होता है। फिर भी, विभिन्न प्रकार कीकोशिका जैसे कि मांसपेशी और तंत्रिका कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली एक दूसरे से भिन्न होती है।। इन कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली में ये अंतर कैसे उत्पन्न होते हैं?

इसका उत्तर जीन द्वारा कोशिका कार्य के विनियमन (रेगुलेशन)/जीन विनियमन में निहित है, जो प्रत्येक कोशिका को केवल केवल उसके प्रकार से संबधित निर्देशों निर्देशों का चयन करने की अनुमति देता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक कोशिका प्रकार में केवल जीन का सही सेट सक्रिय हो। सरल शब्दों में जीन विनियमन तय करता है कि मांसपेशी संबधित कोशिका , मांशपेशी की संरचना और कार्य संबधित निर्देशों को की चुन कर सक्रीय करे!

विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन इस बात में रुचि रखते थे कि विभिन्न कोशिका प्रकार कैसे विकसित होते हैं। उन्होंने माइक्रोआरएनए(microRNA) की खोज की, जो छोटे आरएनए(RNA) अणुओं का एक नया वर्ग है जो जीन विनियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी अभूतपूर्व खोज ने जीन विनियमन के एक बिल्कुल नए सिद्धांत खोजा जो मनुष्यों सहित समस्त बहुकोशीय जीव की संरचना और जीवन के लिए आवश्यक है!। अब यह ज्ञात है कि मानव जीनोम में एक हज़ार से अधिक माइक्रोआरएनए (microRNA)के लिए निर्देश है। उनकी आश्चर्यजनक खोज ने जीन विनियमन के एक बिल्कुल नए आयाम का खुलासा किया। जीवों के विकास और कार्यप्रणाली के लिए माइक्रोआरएनए (microRNA) मूल रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। पढ़ना जारी रखें 2024 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : विक्टर एम्ब्रोस (Victor Ambros) और गैरी रुवकुन (Gary Ruvkun)

भूविज्ञानी : मैरी थार्प


मंगलवार, 30 जुलाई 2024 को मैरी थार्प की जयंती है, जो अपने समय की सबसे महान भूगर्भशास्त्रियों में से एक थीं। उस दिन उनकी उम्र 104 साल होती। आइए इस अवसर पर याद करें कि कैसे अन्याय की बाधाओं के बावजूद, उन्होंने धैर्यपूर्वक भूविज्ञान में हमारी कल्पना से परे क्रांति लाने के लिए अपनी यात्रा जारी रखी। पढ़ना जारी रखें भूविज्ञानी : मैरी थार्प