उष्ण होने पर परमाणु और परमाण्विक कण तरंगीत तथा गतिमान होते है। वे जितने ज्यादा उष्ण रहेंगे उतनी ज्यादा गति से गतिमान रहेंगे। वे जितने शीतल रहेंगे उनकी गति उतनी कम होगी। परम शून्य तापमान पर उनकी गति शून्य हो जाती है। इस तापमान से कम तापमान संभव नही है। यह कुछ ऐसा है कि आप दक्षिणी ध्रुव से ज्यादा दक्षिण मे नही जा सकते या उत्तरी ध्रुव से उत्तर मे नही जा सकते है। ऐसा कभी नही होगा क्योंकि वह संभव ही नही है।
नीचे दी गयी सारणी मे ज्ञात ब्रह्माण्ड की उष्णतम चीजो या घटनाओं का विवरण दिया है। ज्ञात शब्द पर ध्यान दे क्योंकि ब्रह्माण्ड संबंधित हमारा ज्ञान संपूर्ण नही है। नीचे दी गयी सारणी मे वही सूचना है जो हमे ज्ञात है, भविष्य मे इसमे परिवर्तन संभव है। पढ़ना जारी रखें “तापमान : ब्रह्माण्ड मे उष्णतम से लेकर शीतलतम तक”
प्राचीन समय मे मानव शरीर को पंच तत्व -भूमि, गगन, वायु, अग्नि और जल से निर्मित माना जाता था। लेकिन आज हम जानते है कि ये पंचतत्व भी शुध्द तत्व नही है, और अन्य तत्वों से मीलकर बने है। इस लेख मे हम देखेंगे कि मानव शरीर के लिये आवश्यक तत्व कौनसे है? और उन तत्वो का निर्माण कैसे हुआ है?
तत्व क्या होते है?
तत्व (या रासायनिक तत्व) ऐसे उन शुद्ध पदार्थों को कहते हैं जो केवल एक ही तरह के परमाणुओं से बने होते हैं। या जो ऐसे परमाणुओं से बने होते हैं जिनके नाभिक में समान संख्या में प्रोटॉन होते हैं। सभी रासायनिक पदार्थ तत्वों से ही मिलकर बने होते हैं। हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, आक्सीजन, तथा सिलिकॉन आदि कुछ तत्व हैं। सन 2007 तक कुल 117 तत्व खोजे या पाये जा चुके हैं जिसमें से 94 तत्व धरती पर प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं। कृत्रिम नाभिकीय अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप उच्च परमाणु क्रमांक वाले तत्व समय-समय पर खोजे जाते रहे हैं।
मानव शरीर मे कौन से तत्व होते है?
जीवन के लिये आवश्यक तत्व
मानव शरीर का लगभग 99% भाग मुख्यतः छह तत्वो से बना है: आक्सीजन, कार्बन, हायड्रोजन, नाइट्रोजन, कैल्सीयम तथा फास्फोरस। लगभग 0.85% भाग अन्य पांच तत्वो से बना है : पोटैशीयम, सल्फर, सोडीयम, क्लोरीन तथा मैग्नेशीयम है। इसके अतिरिक्त एक दर्जन तत्व है जो जीवन के लिये आवश्यक माने जाते है या अच्छे स्वास्थ्य के लिये उत्तरदायी होते है, जिसमे बोरान(Boran B), क्रोमीयम(Chromium Cr), कोबाल्ट(Cobalt Co), कापर(Copper Cu), फ़्लोरीन(Fluorine F), आयोडीन(Iodine I), लोहा(Iron Fe),मैग्नीज(Manganese Mn), मोलीब्डेनम(Molybdenum Mo), सेलेनियम(Selenium Se), सीलीकान(Silicon Si), टीन(Tin Sn), वेनाडीयम(Vanadium V) और जस्ता(Z) का समावेश है।
दृश्य प्रकाश के रंग अद्भुत होते है और उससे अद्भुत है हमारी उन्हे देखने की क्षमता। मानव नेत्र लगभग एक करोड़ से ज्यादा रंग पहचान सकते है।
आपने कई रंग देखे होंगे लेकिन कभी सोचा है कि आखिर लाल रंग की वस्तु लाल क्यों दिखायी देती है? किसी भी वस्तु का कोई रंग क्यों होता है ? वास्तविकता यह है कि किसी वस्तु का रंग एक भ्रम मात्र है, लाल वस्तु लाल इसलिये दिखायी देती है कि वह वस्तु लाल रंग का अवशोषण नही कर पाती है, लाल के अतिरिक्त अन्य सभी रंग उस वस्तु द्वारा अवशोषित हो जाते है। उसी तरह नीले रंग की वस्तु केवल नीले रंग का अवशोषण नही कर पाती है!
रंग
प्रकाश स्रोत से ’सफ़ेद’ प्रकाश उस वस्तु पर पड़ता है।
लाल के अतिरिक्त सभी रंग अवशोषित हो जाते है।
इससे हमारी आंखो तक केवल लाल रंग का प्रकाश पहुंचता है और हम उस वस्तु को लाल रंग का देखते है।
जैसा कि हम जानते हैं कि सफ़ेद रंग सभी रंगो का मिश्रण है, सफ़ेद रंग की वस्तु किसी भी रंग का अवशोषण नही करती है जिससे वह सफ़ेद रंग कि दिखायी देती है। काला रंग इसका विपरीत है, काला अपने आप मे कोई रंग नही होता है, इसका अर्थ है रंगो की अनुपस्थिति। काले रंग की वस्तु अभी रंगो का अवशोषण कर लेती है, जिससे वह काले रंग कि दिखायी देती है।
यदि हम किसी लाल वस्तु पर एक ऐसा प्रकाश डाले जिसमे लाल रंग को छोड़कर अन्य सभी रंग हो तब वह वस्तु हमे लाल नही काली दिखायी देगी। वैसे ही यदि आपने ध्यान दिया हो कि कपड़ो के (या किसी अन्य वस्तु) के रंग दुकान के प्रकाश की तुलना मे सूर्य की प्रकाश मे भिन्न दिखायी देते है। यहाँ भी कारण वही है कि सूर्य के प्रकाश मे लगभग सब रंग होते है जबकि कृत्रिम रोशनी मे कुछ रंग अनुपस्थित होते है जिससे कपड़े द्वारा रंग का अवशोषण दोनो प्रकाशो मे भिन्न होता है।
रंग की तकनीकी परिभाषा कुछ ऐसी होगी
रंग प्रकाश के उत्सर्जन, वितरण या परावर्तन द्वारा उत्पन्न वर्णक्रम संरचना से निर्मित दृश्य प्रभाव है।
जब भी ट्रिगर दबाया जाता है, दोनो संभव परिणामो को समाविष्ट करने ब्रह्माण्ड का विभाजन हो जाता है और दो समांतर ब्रह्माण्ड बन जाते है।
एक व्यक्ति अपने सर पर तनी बंदूक के साथ बैठा है। यह साधारण बंदूक नही है, यह एक क्वांटम सिद्धांत आधारित बंदूक है जो किसी क्वांटम कण के स्पिन को मापने मे सक्षम है। जब भी बंदूक का ट्रिगर दबाया जाता है, एक क्वांटम कण या क्वार्क का स्पिन मापा जाता है। स्पिन के मापन के आधार पर गोली चलेगी या नही चलेगी। यदि क्वार्क का स्पिन घड़ी के सुईयों की दिशा मे है तो बंदूक से गोली चलेगी। यदि क्वार्क का स्पिन घड़ी की सुईयों के विपरीत है तो गोली नही चलेगी, केवल ट्रिगर की क्लिक होगी।
घबराहट के साथ वह व्यक्ति एक गहरी सांस लेता है और ट्रिगर दबा देता है। बंदूक से केवल क्लिक ही होता है। वह फ़िर से ट्रिगर दबाता है, क्लिक, फिर से ट्रिगर, परिणाम वही क्लिक। वह व्यक्ति बार बार ट्रिगर दबाते रहेगा लेकिन परिणाम वही रहेगा, गोली नही चलेगी। हालांकि बंदूक सही तरह से कार्य कर रही है और उसमे गोलीयाँ भी भरी हुयी है, वह व्यक्ति कितनी ही बार ट्रिगर दबायेगा, बंदूक से गोली कभी नही चलेगी। वह यह प्रक्रिया अनंत तक दोहराता रहेगा और क्वांटम अमर रहेगा।
अब हम समय यात्रा कर इस प्रयोग के आरंभ मे वापस जाते है। वह व्यक्ति प्रथम बार ट्रिगर दबाता है, बंदूक मे क्वार्क की दिशा का मापन घड़ी की सुईयों की दिशा मे होता है। बंदूक से गोली चलती है। वह व्यक्ति अब मृत है।
लेकिन रूकिये! उस व्यक्ति ने प्रथम बार ट्रिगर दबाया था और उसके पश्चात अनंत बार ट्रिगर दबाया था और हम पहले से ही जानते हैं कि बंदूक से गोली नही चली थी। अब वह व्यक्ति मृत कैसे हो सकता है ? वह व्यक्ति नही जानता कि वह जीवित और मृत दोनो अवस्था मे है। जब भी वह ट्रिगर दबाता है, ब्रह्माण्ड का विभाजन हो जाता है और दो ब्रह्माण्ड बन जाते है। यह विभाजन होते रहता है, दोबारा , तीबारा, चौथी बार, जब भी वह व्यक्ति ट्रिगर दबाता है ब्रह्माण्ड का एक और विभाजन होता है।
इलेक्ट्रानिक्स फ़ार यु के अक्टूबर 2014/फ़रवरी 2018 अंक मे प्रकाशित लेख
कुछ संख्याये जैसे आपका फोन नंबर या आपका आधार नंबर अन्य संख्याओं से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। लेकिन इस लेख मे हम जिन संख्याओं पर चर्चा करेंगे वे ब्रह्मांड के पैमाने पर महत्वपूर्ण है, ये वह संख्याये है जो हमारे ब्रह्मांड को पारिभाषित करती है, हमारे आस्तित्व को संभव बनाती है और ब्रह्माण्ड के अंत को तय करेंगी।
1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक( The Universal Gravitational Constant)
यह वर्ष 2014 एक महत्वपूर्ण वर्ष ना हो लेकिन 1665 इस वर्ष से बहुत बुरा था, विशेषतः लंदन वासीयों के लिये। लंदन मे बुबोनिक प्लेग फैला हुआ था, उस समय शहर से बाहर जाने के अतिरिक्त इस महामारी से बचने का कोई अन्य उपाय या औषधी ज्ञात नही थी। बादशाह चार्लस द्वितिय(King Charles II ) ने अपनी राजधानी लंदन से आक्सफोर्ड स्थानांतरित कर दी थी और कैंब्रीज विश्वविद्यालय बंद कर दिया गया था। कैंब्रिज विश्वविद्यालय के एक विद्यार्थी ने अपने गृहनगर वूल्सथोर्पे(Woolsthorpe) जाने का निश्चय किया और अपने अगले 18 महिने आधुनिक विज्ञान के लिये नये दरवाजे खोलने मे बिताये, इस विद्यार्थी का नाम था आइजैक न्युटन।
हम ऐसे तकनीकी युग मे रह रहे है जिसमे संख्यात्मक(परिमाणात्मक) अनुमान नही लगाये जा सके तो जीना दूभर हो जाये। और परिमाणात्मक अनुमान लगाने मे शायद सबसे पहली सफलता न्युटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत(Universal Gravitation) से मीली थी। उनकी अवधारणा के अनुसार दो पिंडो मे मध्य का गुरुत्विय आकर्षण उनके द्रव्यमान के गुणनफल के आनुपातिक तथा उनके मध्य की दूरी के वर्ग के विलोमानुपातिक होता है। अपनी इस अवधारणा से न्युटन ने पता लगाया कि किसी ग्रह की कक्षा एक दिर्घवृत्त(ellipse) के आकार की होती है जिसके एक केंद्रबिंदु(focus) पर सूर्य होता है। जोहानस केप्लरने ग्रहो की कक्षा के बारे मे यह अनुमान न्युटन से पहले लगाया था लेकिन वह निरीक्षण पर आधारित था। न्युटन ने यह अनुमान गणितिय गणनाओं और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के आधार पर लगाया था। उन्होने इस गणना के लिये गणित की एक नयी शाखा कलन गणित(calculus) भी खोज निकाली थी। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की 13 महत्वपूर्ण संख्यायें”
निकोला टेस्ला (अंग्रेजी: Nikola Tesla; सर्बियाई सिरिलिक: Никола Тесла, 10 जुलाई 1856 – 7 जनवरी 1943) एक सर्बियाई अमेरिकी आविष्कारक, भौतिक विज्ञानी, यांत्रिक अभियन्ता, विद्युत अभियन्ता और भविष्यवादी थे। उनका थॉमस एडीसन के आविष्कारों में बहुत बड़ा योगदान रहा है। टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 को ऑस्ट्रियन स्टेट (अब क्रोशिया) में हुआ था। बाद में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ग्रहण कर ली। उनके बारे में कहा जाता है कि वह व्यक्ति जिसने पृथ्वी को प्रकाश से सजाया। टेस्ला की प्रसिद्धि उनके आधुनिक प्रत्यावर्ती धारा (एसी) विद्युत आपूर्ति प्रणाली के क्षेत्र में दिये गये अभूतपूर्व योगदान के कारण है। टेस्ला के विभिन्न पेटेंट और सैद्धांतिक कार्य, बेतार संचार और रेडियो के विकास का आधार साबित हुये हैं। वैद्युत चुंबकत्व के क्षेत्र में किये गये उनके कई क्रांतिकारी विकास कार्य, माइकल फैराडे के विद्युत प्रौद्योगिकी के सिद्धांतों पर आधारित थे।
जीवनयात्रा
टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 को सर्बियन मातापिता मिलुटिन टेस्ला और ड्युका टेस्ला के परिवार मे आस्ट्रीयन साम्राज्य(वर्तमान क्रोएशिया) मे हुआ था। 1870 मे निकोला टेस्ला ने कार्लोवैक के स्कूल मे प्रवेश लिया और उस स्कूल मे अपने गणित शिक्षक मार्टिन सेकुलिक से प्रभावित हुये थे। टेस्ला उस समय समाकलन(Integral Calculus) के प्रश्नो को अपने मन मे ही हल करने मे सक्षम थे। उनके शिक्षको को उन पर विश्वास नही होता था लेकिन उन्होने अपना चार वर्ष का अभ्यासक्रम तीन वर्षो मे ही पूरा कर लिया। 1875 मे उन्होने आस्ट्रीयन पालीटेक्निक मे प्रवेश लिया, और अपने प्रथम वर्ष मे उन्होने सभी कक्षाओं मे उपस्थित रहे, नौ परिक्षायें उतीर्ण की और सभी मे सर्वोत्तम संभव गुण प्राप्त किये। पढ़ना जारी रखें “महान विज्ञानी : निकोला टेस्ला”