खूबसूरत आइंस्टाइन वलय
इस चित्र के मध्य मे दिखायी दे रहा लाल-पिले रंग का पिंड एक सम्पूर्ण आकाशगंगा है। लेकिन इस आकाशगंग के चारो ओर निले रंग का वलय … पढ़ना जारी रखें खूबसूरत आइंस्टाइन वलय
इस चित्र के मध्य मे दिखायी दे रहा लाल-पिले रंग का पिंड एक सम्पूर्ण आकाशगंगा है। लेकिन इस आकाशगंग के चारो ओर निले रंग का वलय … पढ़ना जारी रखें खूबसूरत आइंस्टाइन वलय
स्ट्रींग सिद्धांत के अंतर्गत पांच तरह के अलग अलग सिद्धांत का विकास हो गया था। समस्या यह थी कि ये सभी सिद्धांत विरोधाभाषी होते हुये भी, तार्किक रूप से सही थे। ये पांच सिद्धांत थे प्रकार I, प्रकार IIA, प्रकार IIB तथा दो तरह के हेटेरोटीक स्ट्रींग सिद्धांत। पांच अलग अलग सिद्धांत सभी बलो और कणो को एकीकृत करने वाले “थ्योरी आफ एवरीथींग” के मुख्य उम्मीदवार का दावा कैसे कर सकते थे। यह माना जाता था कि इनमे से कोई एक ही सिद्धांत सही है, जो अपनी निम्न ऊर्जा सीमा तथा दस आयामो को चार आयामो मे संकुचन के पश्चात वास्तविक विश्व की सही व्याख्या करेगा। अन्य सिद्धांतो को स्ट्रींग सिद्धांत के प्रकृती द्वारा अमान्य गणितीय हल के रूप मे मान कर रद्द कर दिया जायेगा।
लेकिन कुछ नयी खोजो और सैद्धांतिक विकास के पश्चात पता चला कि उपरोक्त तस्वीर सही नही है, यह पांचो स्ट्रींग सिद्धांत एक दूसरे से जुड़े हुये है तथा एक ही मूल सिद्धांत के भिन्न भिन्न पहलुओं को दर्शाते है। यह सभी सिद्धांत एक रूपांतरण द्वारा जुड़े हुये है जिसे द्वैतवाद(dualities) कहते है। यदि दो सिद्धांत किसी द्वैतवाद रूपांतरण(Duality Transformation) द्वारा जुड़े हों तो इसका अर्थ यह होता है कि एक सिद्धांत का रूपांतरण इस तरह से हो सकता है कि वह दूसरे सिद्धांत की तरह दिखायी दे। यह दोनो सिद्धांत इस रूपांतरण के अंतर्गत एक दूसरे के द्विक(Dual) कहलायेंगे।
यह चित्र 2001- अ स्पेस ओडीसी फिल्म का नही है। यह चित्र है अमरीकी अंतरिक्ष शटल चैलेंजर के मालवाहक कक्ष से लगभग 100 मीटर दूरी पर … पढ़ना जारी रखें अंतरिक्ष मे मानव की चहलकदमी
स्ट्रींग सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण बल को अन्य बलों के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत कर देता था लेकिन इस सिद्धांत के कुछ पूर्वानुमान जैसे टेक्यान और 26 आयामी ब्रह्माण्ड इसे हास्यास्पद स्थिति मे ले आते थे। वैज्ञानिको ने इन विसंगतियों को दूर करने का प्रयास किया और एक नये सिद्धांत सुपरस्ट्रींग का विकास किया जिसमे टेक्यान नही थे, 26 आयाम का ब्रह्माण्ड 10 आयामो मे सीमट गया था। यह सिद्धांत आश्चर्यजनक रूप से महासममीती, महाएकीकृत सिद्धांत (GUT) तथा कालिजा-केलीन सुझाव सभी का समावेश करता था।
स्ट्रींग सिद्धांत मे ऋणात्मक द्रव्यमान के वर्गमूल से काल्पनिक द्रव्यमान वाले टेक्यान का निर्माण होता है। किसी बाह्य निरीक्षक के दृष्टिकोण से यह स्ट्रींग की ऋणात्मक ऊर्जा वाली अवस्था के रूप मे होगा। वस्तुतः यह क्वांटम यांत्रीकी के एक तथ्य से संबधित है, अनिश्चितता के सिद्धांत के अनुसार किसी स्थानिय प्रणाली(localised system) मे की निम्नतम ऊर्जा शून्य की ओर प्रवृत्त होकर कम होती है, लेकिन हमेशा शून्य से ज्यादा रहती है। इस ऊर्जा को अविलोपशील ऊर्जा (non-vanishing) कहते है क्योंकि यह कम होती है लेकिन कभी शून्य नही होती है। स्ट्रींग सिद्धांत मे टेक्यान की उपस्थिति को गणितीय रूप से इसी ’अविलोपशील’ शून्यबिंदु ऊर्जा(zero-point energy) की उपस्थिति के रूप मे देखा जा सकता है। इससे यह माना गया कि यदि हम एक ऐसे विशेष क्वांटम प्रणाली को परिभाषित कर पाये जिसमे यह शून्यबिंदु ऊर्जा विलोपित(नष्ट) हो जाये अर्थात शून्य हो जाये तब हम एक विशेष स्ट्रींग सिद्धांत का निर्माण कर पायेंगे जिसमे टेक्यान नही होंगे। पढ़ना जारी रखें “स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 08 : विसंगतियो का निराकरण और सुपरस्ट्रींग सिद्धांत का प्रवेश”
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हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के केन्द्र मे स्थित महाकाय श्याम वीवर (Spermassive Black Hole) सामान्यतः एक सोते हुये दैत्य की तरह है। लेकिन यह दैत्य अपनी निद्रा … पढ़ना जारी रखें ’मंदाकिनी’ आकाशगंगा केन्द्र के दैत्य को जागृत करने जा रहा है एक गैसीय बादल !