बरमुडा त्रिभुज : रहस्य या एक मिथक (Bermuda Triangle : Mystery or Myth)?


आपको बरमूडा त्रिभुज कोई ऐसा नक्शा नही मिलेगा जो इस क्षेत्र की सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता हो। कुछ व्यक्तियों की मान्यताओं के अनुसार यह एक ऐसा रहस्यमय क्षेत्र है जहाँ पर वायुयान और जलयान रहस्यमय रूप से लापता होते हैं। 1964 मे एक पत्रिका ने इस क्षेत्र को बरमूडा त्रिभुज नाम दिया था, तब से इस क्षेत्र सनसनीखेज समाचारों/कहानियों के लेखकों की कलम चलती रही है। यह बरमूडा त्रिभुज , जिसे “शैतान के त्रिभुज” के रूप में भी जाना जाता है , उत्तर पश्चिम अटलांटिक महासागर का एक क्षेत्र है जिसमे कुछ विमान और सतही जहाज (surface vessels) गायब हो गए हैं. कुछ लोगों का दावा है कि ये गायब होने की बातें “मानव त्रुटि (human error)” या “प्रकृति के कृत्यों (acts of nature)” की सीमाओं के परे है. लोकप्रिय संस्कृति ने गायब होने की कुछ घटनाओं को अपसामान्य (paranormal), भौतिकी के नियमों (laws of physics) के निलंबन, या भूमि से परे की जीवित वस्तुओं (extraterrestrial beings) की गतिविधियों से सम्बद्ध बताया है।लेकिन जब आप इस क्षेत्र की और उससे जुडी दुर्घटनाओं की गहराई से जांच पड़ताल करते है तो पाते है कि इस रहस्यमय क्षेत्र मे कोई रहस्य ही नही है। इस क्षेत्र मे हुयी अधिकतर दुर्घटना का संतोषजनक स्पष्टीकरण उपलब्ध है।

वर्ल्ड वाईड फंड फ़ार नेचर ने 2013 मे समुद्री परिवहन के लिये सबसे खतरनाक दस शीर्ष स्थानों की सूची तैयार की है लेकिन इसमे बरमूडा त्रिभुज नही है।

लेकिन क्या इसका अर्थ यह है कि बरमूडा त्रिभुज मे विचित्र अनुभव के दावे आधारहीन है?

ऐसा भी नही है, वैज्ञानिको ने इस क्षेत्र मे सामान्य समुद्री क्षेत्र की तुलना मे कुछ अलग गुण पाये है और इस क्षेत्र की सागर तलहटी पर कुछ विचित्र संरचनाये भी पायी है। और इस क्षेत्र के कथित रहस्यमय व्यवहार की अवधारणा पर विश्वास करने वालों के लिये इतना ही पर्याप्त है और वे तिल का ताड़ बनाने मे सक्षम है।

इस लेख मे हम इस क्षेत्र से जुड़े कुछ तथ्यों और हुयी दुर्घटनाओं पर चर्चा करेंगे। साथ ही मे हम इस क्षेत्र से जुड़ी हुयी कुछ विचित्र मनगढ़ंत कहानीयाँ जैसे परग्रही द्वारा अपहरण(Alien Abduction), अटलांटीस सभ्यता की मशीनें या श्याम विवर जैसी कहानियो को भी देखेंगे। इसके अतिरिक्त हम इस क्षेत्र मे होने वाली दुर्घटनाओं के साधारण और संभव कारणों की जांच पड़ताल भी करेंगे।

आधिकारिक रूप से बरमूडा त्रिभुज जैसे किसी क्षेत्र का अस्तित्व नही है। सं रा अमरीका का भौगोलिक नामकरण संस्थान किसी भी ऐसे क्षेत्र की उपस्थिति से इंकार करता है। लेकिन आम मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र अटलांटिक महासागर मे सं रां अमरीका के दक्षिणी समूद्री सीमा मे स्थित है और इसके तीन शीर्ष बिंदु बरमूडा द्वीप, फ्लोरिडा राज्य का मियामी शहर और प्युर्टो रीको राज्य का सान जुआन द्वीप है। यह क्षेत्र 500,000 वर्ग मील मे फैला हुआ है।

इस क्षेत्र का नाम इस त्रिभुज के एक शीर्ष बिंदु बरमूडा द्वीप के नाम पर है जिसे किसी समय “शैतान का द्वीप(Devil’s Island)” भी कहा जाता था। इस द्वीप के आस पास देखने में सुरक्षित पर खतरनाक मूंगे की चट्टान है जिनसे टकराकर हर वर्ष कितने ही जहाज क्षतिग्रस्त हो जाते है। पढ़ना जारी रखें “बरमुडा त्रिभुज : रहस्य या एक मिथक (Bermuda Triangle : Mystery or Myth)?”

श्याम ऊर्जा: बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्न(FAQ)


लगभग 13 वर्ष पहले यह खोज हुयी थी कि ब्रह्माण्ड की अधिकांश ऊर्जा तारों या आकाशगंगा मे ना होकर अंतराल(space) से ही बंधी हुयी है। किसी खगोलवैज्ञानिक की भाषा मे एक विशाल खगोलीय स्थिरांक (Cosmological Constant) की उपस्थिति का प्रमाण एक नये सुपरनोवा के निरीक्षण से मीला था।

पिछले तेरह वर्षो मे स्वतंत्र वैज्ञानिको के समूहों ने इस खगोलीय स्थिरांक की उपस्थिति के समर्थन मे पर्याप्त आंकड़े जुटा लीये है। ये आंकड़े प्रमाणित करते है कि एक विशाल खगोलीय स्थिरांक अर्थात श्याम ऊर्जा(Dark Energy) का अस्तित्व है। इस श्याम ऊर्जा के परिणाम स्वरूप ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मे तेजी आ रही है। इस खोज के लिए वर्ष 2011 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार तीन खगोल वैज्ञानिको साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter), ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt) तथा एडम रीस(Adam G. Riess) को दीया जा रहा है।

2012 के भौतिकी नोबेल पुरुष्कार विजेता : एडम रीस(Adam G. Riess), साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter) तथा ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt)
2012 के भौतिकी नोबेल पुरस्कार विजेता : एडम रीस(Adam G. Riess), साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter) तथा ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt)

2011 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं की खोज पर समर्पित यह लेख श्याम ऊर्जा पर बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्नो का उत्तर देने का प्रयास करता है। इस विषय पर दो लेख लेख 1 तथा लेख 2 भी पढें। पढ़ना जारी रखें “श्याम ऊर्जा: बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्न(FAQ)”

किसी घूर्णन करते हुये श्याम वीवर द्वारा घुर्णन अक्ष की दिशा मे इलेक्ट्रान जेट का उत्सर्जन किया जा सकता है, जिनसे रेडीयो तरंग उत्पन्न होती है।

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 14 : श्याम विवर कैसे बनते है?


श्याम विवर का जन्म सुपरनोवा विस्फोट के पश्चात होता है।
श्याम विवर का जन्म सुपरनोवा विस्फोट के पश्चात होता है।

जब तक तारे जीवित रहते है तब वे दो बलो के मध्य एक रस्साकसी जैसी स्थिति मे रहते है। ये दो बल होते है, तारो की ‘जीवनदायी नाभिकिय संलयन से उत्पन्न उष्मा’ तथा तारों का जन्मदाता ‘गुरुत्वाकर्षण बल’। तारे के द्रव्यमान से उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण उसे तारे पदार्थ को  केन्द्र की ओर संपिड़ित करने का प्रयास करता है, इस संपिड़न से प्रचण्ड उष्मा उत्पन्न होती है, जिसके फलस्वरूप नाभिकिय संलयन प्रक्रिया प्रारंभ होती है। यह नाभिकिय संलयन प्रक्रिया और ऊर्जा उत्पन्न करती है। इस ऊर्जा से उत्पन्न दबाव की दिशा केन्द्र से बाहर की ओर होती है। इस तरह से तारे के गुरुत्व और संलयन से उत्पन्न ऊर्जा की रस्साकशी मे एक संतुलन उत्पन्न हो जाता है। तारे नाभिकिय संलयन के लिए पहले हायड़ोजन, उसके बाद हिलियम,लीथीयम के क्रम मे लोहे तक के तत्वो का प्रयोग करता है। विभिन्न तत्वों का नाभिकिय संलयन परतो मे होता है, अर्थात सबसे बाहर हायड़ोजन, उसके नीचे हीलीयम और सबसे नीचे लोहा।

पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 14 : श्याम विवर कैसे बनते है?”

श्याम वीवर का परिकल्पित चित्र

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 13 : श्याम विवर के विचित्र गुण


श्याम विवर कैसे दिखता है ?

कल्पना कीजिए की आप किसी श्याम विवर की सुरक्षित दूरी पर(घटना क्षितीज Event-Horizon से बाहर) परिक्रमा कर रहे है। आप को आकाश कैसा दिखायी देगा ? साधारणतः आपको पृष्ठभूमी के तारे निरंतर खिसकते दिखायी देंगे, यह आपकी अपनी कक्षिय गति के कारण है। लेकिन किसी श्याम विवर के पास गुरुत्वाकर्षण दृश्य को अत्यधिक रूप से परिवर्तित कर देता है।

श्याम विवर का परिकल्पित चित्र
श्याम विवर का परिकल्पित चित्र

श्याम विवर के समीप से गुजरने वाली प्रकाश किरणे उसके गुरुत्व की चपेट मे आ जाती है और निकल नही पाती है। इस कारण श्याम विवर के आसपास का क्षेत्र एक काली चकती(Dark Disk) के जैसा दिखायी देता है। श्याम विवर से थोड़ी दूरी पर से गुजरने वाली प्रकाश किरणे गुरुत्व की चपेट मे तो नही आती लेकिन उसके प्रभाव से उनके पथ मे वक्रता आ जाती है। इस प्रभाव के कारण श्याम विवर की पृष्ठभूमि मे तारामंडल विकृत नजर आता है, मनोरंजनगृहों के दर्पणो की तरह। इस प्रभाव से कुछ तारो की एकाधिक छवी दिखायी देती है। आप एक तारे की दो छवियाँ श्याम विवर के दो विपरीत बाजूओं मे देख सकते है क्योंकि श्याम विवर के दोनो ओर से जाने वाली प्रकाश किरणे आपकी ओर मुड़ गयी है। कुछ तारो की कभी कभी असंख्य छवियाँ बन जाती है क्योंकि उनसे निकलने वाली प्रकाश किरणे श्याम विवर के चारो ओर से आपकी ओर मोड़ दी जाती है। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 13 : श्याम विवर के विचित्र गुण”