परग्रही जीवन श्रंखला भाग 04 : कहां है वे ?


सेटी प्रोजेक्ट ने अभी तक परग्रही जीवन का कोई भी संकेत नही पकड़ा है। विज्ञानीयो को अब फ्रैंक ड्रेक के बुद्धिमान परग्रही सभ्यता समीकरण के कारक पूर्वानुमानो पर पुनर्विचार करने आवश्यकता महसूस हुयी। हाल मे प्राप्त हुयी खगोल विज्ञान की नयी जानकारीयो के अनुसार बुद्धिमान परग्रही सभ्यता की संभावना, 1960 मे फ्रेंक ड्रेक द्वारा गणना की गयी संभावना से कहीं अलग है। बुद्धिमान परग्रही जीवन की नयी संभावना मूल संभावना से ज्यादा आशावादी और ज्यादा निराशावादी दोनो है।

गोल्डीलाक क्षेत्र

गोल्डीलाक क्षेत्र का एक ग्रह "हमारी धरती"।
गोल्डीलाक क्षेत्र का एक ग्रह “हमारी धरती”।

गोल्डीलाक क्षेत्र तारे से उस दूरी वाले क्षेत्र को कहा जाता है जहां पर कोई ग्रह अपनी सतह पर द्रव जल रख सकता है तथा पृथ्वी जैसे जीवन का भरण पोषण कर सकता है। यह निवास योग्य क्षेत्र दो क्षेत्रो का प्रतिच्छेदन(intersection) क्षेत्र है जिन्हे जीवन के लिये सहायक होना चाहिये; इनमे से एक क्षेत्र ग्रहीय प्रणाली का है तथा दूसरा क्षेत्र आकाशगंगा का है। इस क्षेत्र के ग्रह और उनके चन्द्रमा जीवन की सम्भावना के उपयुक्त है और पृथ्वी के जैसे जीवन के लिये सहायक हो सकते है। सामान्यत: यह सिद्धांत चन्द्रमाओ पर लागू नही होता क्योंकि चन्द्रमाओ पर जीवन उसके मातृ ग्रह से दूरी पर भी निर्भर करता है तथा हमारे पास इस बारे मे ज्यादा सैद्धांतिक जानकारी नही है। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 04 : कहां है वे ?”

Wow! संदेश 15 अगस्त 1977 को सेटी मे कार्यरत डा जेरी एहमन ने ओहीयो विश्वविद्यालय के बीग इयर रेडीयो दूरबीन पर एक रहस्यमयी संदेश प्राप्त किया। इस संदेश ने परग्रही जीवन से संपर्क की आशा मे नवजीवन का संचार कर दिया था। यह संदेश 72 सेकंड तक प्राप्त हुआ लेकिन उसके बाद यह दूबारा प्राप्त नही हुआ। इस रहस्यमय संदेश मे अंग्रेजी अक्षरो और अंको की एक श्रंखला थी जो कि अनियमित सी थी और किसी बुद्धिमान सभ्यता द्वारा भेजे गये संदेश के जैसे थी। डा एहमन इस संदेश के परग्रही सभ्यता के संदेश के अनुमानित गुणो से समानता देख कर हैरान रह गये और उन्होने कम्प्युटर के प्रिंट आउट पर “Wow!” लिख दिया जो इस संदेश का नाम बन गया।

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 03 : परग्रही सभ्यता से संपर्क


सेटी@होम स्क्रीन सेवर
सेटी@होम स्क्रीन सेवर

यदि पृथ्वी के बाहर जीवन है, तो उसकी खोज कैसे हो ? उसके साथ संपर्क कैसे हो ? एक उपाय अंतरिक्षयान के द्वारा विभिन्न ग्रहो की यात्रा का है । लेकिन वर्तमान मे हमारे अंतरिक्ष यान इतने सक्षम नही है कि अपने सौर मंडल से बाहर जा कर जीवन की खोज कर सके।

दूसरा उपाय संचार माध्यमो का है जैसे रेडीयो तरंगे। पृथ्वी के बाहर यदि कोई बुद्धिमान सभ्यता निवास करती है और विज्ञान मे मानव सभ्यता से ज्यादा विकसित या मानव सभ्यता के तुल्य विकसित है तब वह संचार माध्यमो के लिये रेडीयो तरंगो का प्रयोग अवश्य करती होगी। इसी धारणा को लेकर पृथ्वी से बाहर सभ्यता की खोज प्रारंभ हुयी है। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 03 : परग्रही सभ्यता से संपर्क”

स्टेनली मीलर और हैराल्ड उरे द्वारा किया गया प्रयोग

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 02 : पृथ्वी के बाहर जीवन की वैज्ञानिक खोज


अंतरिक्ष मे जीवन की खोज करने वाले विज्ञानीयो के अनुसार अंतरिक्ष मे जीवन के बारे मे कुछ भी निश्चित कह पाना कठिन है। हम ज्ञात भौतिकी, रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान के नियमों के अनुसार कुछ अनुमान ही लगा सकते है।

अंतरिक्ष मे जीवन की खोज से पहले यह सुनिश्चित कर लेना आवश्यक है कि किसी ग्रह पर जीवन के लिये मूलभूत आवश्यकता क्या है? पृथ्वी पर जीवन और जीवन के विकास के अध्ययन तथा ज्ञात भौतिकी, रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान के नियमों के अनुसार अंतरिक्ष मे जीवन के लिये जो आवश्यक है उनमें से प्रमुख है:

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 01 : क्या बाह्य अंतरिक्ष मे जीवन है ?


क्या बाह्य अंतरिक्ष मे जीवन है ?

महान विचारक गीआर्दनो ब्रुनो
महान विचारक गीआर्दनो ब्रुनो

आज से पांच सौ वर्ष ईसवी सन 1600 मे पहले एक विचारक, गणितज्ञ और खगोलशास्त्री ने यह प्रश्न पूछा था। इस प्रश्न का उत्तर तो उस विचारक को नही मीला, उसे रोम की सड़को पर जिन्दा जला दिया गया था। इतना ही नही उसे जिन्दा जलाने से पहले उसे अपमानित करने के लिये सड़क के किनारे खम्बे पर नग्न कर उल्टा लटकाया गया था।  कोपरनिकस की तरह वह भी मानता था कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। वह यह भी मानता था कि बाह्य अंतरिक्ष मे हमारे जैसे अनगिनत प्राणी निवास करते है। अंतरिक्ष मे अनगिनत संतो, करोड़ो पोप, अरबो चर्चो और एकाधिक जीसस की संभावनाओ को समाप्त करने का चर्च के पास सबसे आसान उपाय था, उस विचारक को जिन्दा जला देना। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 01 : क्या बाह्य अंतरिक्ष मे जीवन है ?”