स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 09 : सुपरस्ट्रींग सिद्धांत से M सिद्धांत की ओर


स्ट्रींग सिद्धांत के अंतर्गत पांच तरह के अलग अलग सिद्धांत का विकास हो गया था। समस्या यह थी कि ये सभी सिद्धांत विरोधाभाषी होते हुये भी, तार्किक रूप से सही थे। ये पांच सिद्धांत थे प्रकार I, प्रकार IIA, प्रकार IIB तथा दो तरह के हेटेरोटीक स्ट्रींग सिद्धांत। पांच अलग अलग सिद्धांत सभी बलो और कणो को एकीकृत करने वाले “थ्योरी आफ एवरीथींग” के मुख्य उम्मीदवार का दावा कैसे कर सकते थे। यह माना जाता था कि इनमे से कोई एक ही सिद्धांत सही है, जो अपनी निम्न ऊर्जा सीमा तथा दस आयामो को चार आयामो मे संकुचन के पश्चात वास्तविक विश्व की सही व्याख्या करेगा। अन्य सिद्धांतो को स्ट्रींग सिद्धांत के प्रकृती द्वारा अमान्य गणितीय हल के रूप मे मान कर रद्द कर दिया जायेगा।

लेकिन कुछ नयी खोजो और सैद्धांतिक विकास के पश्चात पता चला कि उपरोक्त तस्वीर सही नही है, यह पांचो स्ट्रींग सिद्धांत एक दूसरे से जुड़े हुये है तथा एक ही मूल सिद्धांत के भिन्न भिन्न पहलुओं को दर्शाते है। यह सभी सिद्धांत एक रूपांतरण द्वारा जुड़े हुये है जिसे द्वैतवाद(dualities) कहते है। यदि दो सिद्धांत किसी द्वैतवाद रूपांतरण(Duality Transformation) द्वारा जुड़े हों तो इसका अर्थ यह होता है कि एक सिद्धांत का रूपांतरण इस तरह से हो सकता है कि वह दूसरे सिद्धांत की तरह दिखायी दे। यह दोनो सिद्धांत इस रूपांतरण के अंतर्गत एक दूसरे के द्विक(Dual) कहलायेंगे।

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पृथ्वी के आकार के ग्रह की खोज!


खगोलशास्त्रीयों ने दूसरी पृथ्वी की खोज मे एक मील का पत्त्थर पा लीया है, उन्होने एक तारे की परिक्रमा करते हुये दो ग्रहों की खोज की है। और ये दोनो ग्रह पृथ्वी के आकार के है! इन ग्रहों को केप्लर … पढ़ना जारी रखें पृथ्वी के आकार के ग्रह की खोज!

’मंदाकिनी’ आकाशगंगा केन्द्र के दैत्य को जागृत करने जा रहा है एक गैसीय बादल !


हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के केन्द्र मे स्थित महाकाय श्याम वीवर (Spermassive Black Hole) सामान्यतः एक सोते हुये दैत्य की तरह है। लेकिन यह दैत्य अपनी निद्रा … पढ़ना जारी रखें ’मंदाकिनी’ आकाशगंगा केन्द्र के दैत्य को जागृत करने जा रहा है एक गैसीय बादल !

महासममीती

स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 07 : विसंगतियों का निराकरण


इसके पहले के हम देख चुके है कि स्ट्रींग सिद्धांत सफलता पूर्वक गुरुत्वाकर्षण को क्वांटम सिद्धांत के साथ एकीकृत कर चुका है। लेकिन इसमे कुछ ऐसी विसंगतिया थी, जो इसे हास्यास्पद बनाती थी। इन विसंगतियो मे टेक्यान और 26 आयामो का अस्तित्व का समावेश है। स्ट्रींग सिद्धांत मे कुछ परिवर्तनो के साथ एक नये सिद्धांत का जन्म हुआ जिसे सुपरस्ट्रींग नाम दिया गया। लेकिन इस सिद्धांत को समझने से पहले हमे इतिहास मे जाकर दो और सिद्धांतो को समझना होगा, ये सिद्धांत है कालुजा़ केलिन का सुझाव(Kaluza-Klein Idea) तथा महासममीती (SuperSymettry)। पढ़ना जारी रखें “स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 07 : विसंगतियों का निराकरण”

कण भौतिकी और स्ट्रींग सिद्धांत मे कणो का बिखरना

स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 06 : इतिहास और विकास


स्ट्रींग सिद्धांत जो कि भौतिकी के सभी बलों और कणो के व्यवहार को एकीकृत करने का दावा करता है, संयोगवश खोजा गया था। 1970 मे कुछ वैज्ञानिक एक ऐसे मूलभूत क्वांटम स्ट्रींग की संकल्पना पर कार्य कर रहे थे जिसका त्रिआयामी विस्तार सीमीत हो और उसकी ज्यादा छोटे घटको द्वारा व्याख्या संभव ना हो। यह अध्ययन मूलभूत बलों के एकीकरण से संबधित नही था, यह भौतिकीय संदर्भो मे नयी गणितीय चुनौती मात्र था।

स्ट्रींग सिद्धांत के अनुसार मूलभूत कण
स्ट्रींग सिद्धांत के अनुसार मूलभूत कण

पारंपरिक रूप से ऐसी स्ट्रींग की व्याख्या एक रेखा (सरल या वक्र)  द्वारा अंतराल(Space) मे किसी समय पर उसकी स्थिति से की जा सकती है। यह स्ट्रींग किसी वलय के जैसे बंद या दो अंत बिन्दुओं के साथ खूली हो सकती है।

जैसे किसी कण के अंतर्भूत द्रव्यमान(mass) होता है, उसी तरह से स्ट्रींग के अंतर्भूत तनाव(Tension) होगा। जिस तरह से एक कण विशेष सापेक्षतावाद(Special Relativity) के नियमो से बंधा होता है उसी तरह से यह स्ट्रींग भी विशेष सापेक्षतावाद के नियमो से बंधी होगी। अंतत: हमे कणो की क्वांटम यांत्रिकी के तुल्य स्ट्रींग के लिये क्वांटम यांत्रिकी के नियम बनाने होंगे।

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बंद स्ट्रींग और खुला स्ट्रींग

स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 05 : परिचय


आवर्धन के स्तर 1.सामान्य स्तर - पदार्थ 2.आण्विक स्तर 3.परमाण्विक स्तर - प्रोटान, न्युट्रान और इलेक्ट्रान 4.परा-परमाण्विक स्तर - इलेक्ट्रान 5.परा-परमाण्विक स्तर - क्वार्क 6.स्ट्रींग स्तर
आवर्धन के स्तर 1.सामान्य स्तर – पदार्थ 2.आण्विक स्तर 3.परमाण्विक स्तर – प्रोटान, न्युट्रान और इलेक्ट्रान 4.परा-परमाण्विक स्तर – इलेक्ट्रान 5.परा-परमाण्विक स्तर – क्वार्क 6.स्ट्रींग स्तर

स्ट्रींग सिद्धांत के पिछे आधारभूत तर्क यह है कि मानक प्रतिकृति के सभी मूलभूत कण एक मूल वस्तु के भिन्न स्वरूप है : एक स्ट्रींग। सरल हिन्दी मे इसे एक महीन तंतु, एक धागे जैसी संरचना कह सकते है। लेकिन यह कैसे संभव है ?

सामान्यतः हम इलेक्ट्रान को को एक बिन्दु के जैसे मानते है जिसकी कोई आंतरिक संरचना नही होती है। एक बिंदु गति के अतिरिक्त कुछ भी क्रिया करने मे असमर्थ होता है। इसे शून्य आयामी संरचना( 0 dimension object) माना जाता है। लेकिन यदि स्ट्रींग सिद्धांत सही है और यदि हम इलेक्ट्रान को एक अत्यंत शक्तिशाली सुक्ष्मदर्शी(microscope) से देख पाये तो हम उसे एक बिंदु के जैसे नही एक स्ट्रींग के वलय अर्थात तंतु के वलय (Loop of String) रूप मे पायेंगे। यह तंतु एक आयाम की संरचना है, इसकी एक निश्चित लंबाई भी है। एक तंतु गति के अतिरिक्त भी क्रियायें कर सकता है, वह भिन्न तरीकों से दोलन कर सकता है। यदि एक तंतु वलय एक विशेष तरीके से दोलन करे तो कुछ दूरी पर हम यह नही जान पायेंगे की वह एक इलेक्ट्रान बिंदू है या एक तंतु वलय। लेकिन वह किसी और तरह से दोलन करे तो उसे फोटान कहा जा सकता है, तीसरी तरह से दोलन करने पर वह क्वार्क हो सकता है। अर्थात एक तंतु वलय भिन्न प्रकार से दोलन करे तो वह सभी मूलभूत कणो की व्याख्या कर सकता है। यदि स्ट्रींग सिद्धांत सही है, तब समस्त ब्रह्माण्ड कणो से नही तंतुओ से बना है।

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