श्याम विवर या ब्लैक होल! ये ब्रह्मांड मे विचरते ऐसे दानव है जो अपनी राह मे आने वाली हर वस्तु को निगलते रहते है। इनकी भूख अंतहीन है, जितना ज्यादा निगलते है, उनकी भूख उतनी अधिक बढ़्ती जाती है। ये … पढ़ना जारी रखें श्याम विवर: 10 विचित्र तथ्य
खगोलशास्त्रीयो की एक टीम द्वारा प्रस्तुत एक शोध पत्र ने एलीयन या परग्रही के कारण खलबली मचा दी है। रूकिये! रूकिये! उछलिये मत! इस शोधपत्र मे एलीयन शब्द का कोई उल्लेख नही है, ना ही वह पत्र अप्रत्यक्ष रूप से … पढ़ना जारी रखें KIC 8462852: क्या इस तारे पर एलीयन सभ्यता है?
कालटेक विश्वविद्यालय (Caltech University) के वैज्ञानिको ने ब्रह्मांड के आरंभीक समय मे बनने वाले पिंडो की खोज मे वर्षो व्यतित किये है। ये वैज्ञानिक अब एक बार फ़िर से सुर्खियों मे है, उन्होने अब तक की सर्वाधिक दूरी पर स्थित कुछ आकाशगंगाये खोज निकाली है। 28 अगस्त 2015 को विज्ञान शोध पत्रिका आस्ट्रोफिजिकल जरनल लेटर्स(Astrophysical Journal Letters) मे प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार उन्होने एक आकाशगंगा EGS8p7 खोज निकाली है जो कि 13.2 अरब वर्ष पुरानी है। जबकि हमारा ब्रह्माण्ड 13.8 अरब वर्ष पुराना है।
इस वर्ष के आरंभ मे नासा की अंतरिक्ष वेधशालाओं हब्बल(Hubble Space Telescope) तथा स्पिट्जर(Spitzer Space Telescope) से प्राप्त आंकड़ो के अनुसार EGS8p7 को आगे शोध के लिये उम्मीदवार माना गया था। हवाई द्विप की डब्ल्यु एम केक वेधशाला(W.M. Keck Observatory ) के अवरक्त किरणो के प्रयोग से एकाधिक पिंड के वर्णक्रम का अध्ययन करने वाले उपकरण( multi-object spectrometer for infrared exploration (MOSFIRE)) का प्रयोग किया। इस प्रयोग मे उन्होने स्पेक्ट्रोग्राफिक विश्लेषण (spectrographic analysis) द्वारा आकाशगंगा द्वारा उतसर्जित विकिरण मे लाल विचलन(redshift) का अध्ययन किया। किसी भी तरंग मे लाल विचलन डाप्लर प्रभाव के कारण होता है। इस प्रभाव को आप अपने से दूर जा रही ट्रेन की सीटी की पिच मे आये परिवर्तन से महसूस कर सहते है। लेकिन ब्रह्माण्डीय पिंडो मे ध्वनि तरंग की बजाय प्रकाश की तरंग मे बदलाव होता है, यह परिवर्तन तरंग के वास्तविक रंग से लाल रंग की ओर विचलन के रूप मे होता है।
वैज्ञानिक चकित है क्योंकि इस आकाशगंगा को हमे दिखायी ही नही पड़ना चाहिये। क्योंकि यह आकाशगंगा एक ऐसे समय से है जिसके पिंडो से निकला उत्सर्जन अनावेशित हायड्रोजन के बादलो द्वारा अवशोषित हो जाना चाहिए।
पारंपरिक रूप से किसी भी विकिरण मे आये लाल विचलन का प्रयोग आकाशगंगाओ की दूरी मापने मे होता है लेकिन ब्रह्मांड मे सर्वाधिक दूरस्थ पिंडो के प्रकाश मे उत्पन्न लाल विचलन के मापन मे कठिनायी होती है। ये दूरस्थ पिंड ही ब्रह्मांड के प्रारंभ मे निर्मित पिंड होते है। बिग बैंग के तुरंत पश्चात सारा ब्रह्मांड आवेशित कण इलेक्ट्रान-प्रोटान तथा प्रकाशकण- फोटान का एक अत्यंत घना सूप था। ये फोटान इलेक्ट्रान से टकरा कर बिखर जाते थे जिससे शुरुवाती ब्रह्माण्ड मे प्रकाश गति नही कर पाता था। बिग बैंग के 380,000 वर्ष पश्चात ब्रह्मांड इतना शीतल हो गया कि मुक्त इलेक्ट्रान और प्रोटान मिलकर अनावेशित हायड्रोजन परमाणु का निर्माण करने लगे, इन हायड्रोजन परमाणुओं ने ब्रह्माण्ड को व्याप्त रखा था, इस अवस्था मे प्रकाश ब्रह्माण्ड मे गति करने लगा था। जब ब्रह्माण्ड की आयु आधे अरब वर्ष से एक अरब वर्ष के मध्य थी, तब प्रथम आकाशगंगाओं का निर्माण हुआ है, इन आकाशगंगाओ ने अनावेशित हायड्रोजन गैसे को पुनः आयोनाइज्ड कर दिया जिससे ब्रह्मांड अब भी आयोनाइज्ड है। पढ़ना जारी रखें “सबसे दूरस्थ सबसे प्राचीन आकाशगंगा की खोज : आयु 13.2 अरब वर्ष”
मान ही लिजिये की आपके मन मे कभी ना कभी यह प्रश्न आया होगा कि ब्रह्माण्ड के बाहर क्या है? खगोलशास्त्री जानते है कि बिग बैंग के पश्चात से ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है, लेकिन यह विस्तार किसमे हो … पढ़ना जारी रखें ब्रह्माण्ड के बाहर क्या है?
जो भी कुछ हम जानते है और उसके अतिरिक्त भी सब कुछ एक महाविस्फोट अर्थात बिग बैंग के बाद अस्तित्व मे आया था। अब वैज्ञानिको के अनुसार इस ब्रह्मांड का अंत भी बड़े ही नाटकीय तरिके से होगा, महाविच्छेद(The Big Rip)।
ये नये सैद्धांतिक माडेल के अनुसार ब्रह्मांड के विस्तार के साथ, सब कुछ, आकाशगंगाओं से लेकर, ग्रह, तारे, परमाण्विक कण से लेकर काल-अंतराल (Space-Time)तक अंततः दृश्य से बाहर होने से पहले विदीर्ण हो जायेंगे!