ब्रह्माण्ड की अनंत गहराईयो की ओर : वायेजर 1


वायेजर १ एक सर्वकालिक सबसे सफल अंतरिक्ष अभियान है। 1977 मे प्रक्षेपित इस अंतरिक्षयान ने बृहस्पति और शनि की यात्रा की थी और ऐसे चित्र भेजे थे जिसकी हमने कभी कल्पना भी नही की थी।बृहस्पति और शनी के बाद यह … पढ़ना जारी रखें ब्रह्माण्ड की अनंत गहराईयो की ओर : वायेजर 1

ये क्या जगह है दोस्तो !


मुझसे यदि यह अनुमान लगाने कहा जाता कि नीचे दी गयी तस्वीर कहां की है मै निश्चय ही मंगल ग्रह कहता। आप क्या सोचते है ? … पढ़ना जारी रखें ये क्या जगह है दोस्तो !

सौर ज्वाला! सूर्य पर आया चुंबकित तूफान। सूर्य के ग्यारह-वर्षीय चक्र के गुज़रने के दौरान ऐसी सौर हलचलें देखी गईं।

सौर ज्वाला


क्या हो रहा है सूर्य पर ! तस्वीर के दाये निचे कोने पर ध्यान दिजिये ! क्या है यह ? यह तस्वीर सोलर डायनेमिक्स ओबजरवेटोरी द्वारा … पढ़ना जारी रखें सौर ज्वाला

ब्रम्हाण्डिय पुष्प


नाजूक ब्रम्हाण्डीय पंखुड़ीयो की तरह यह खगोलीय धूल और गैस का बादल 1300 प्रकाशवर्ष दूर सेफियस नक्षत्रमंडल मे पुष्पित हो रहा है ! इसे इण्द्रधनुष की ग्रीक … पढ़ना जारी रखें ब्रम्हाण्डिय पुष्प

तारे का जन्म

लाखों तारे आसमां मे


आप से एक मासूम सा प्रश्न है। कितने दिनों पहले आपने रात्रि में आसमान में सितारों को देखा है ? कुछ दिन, कुछ माह या कुछ वर्ष पहले ? कब आप अपने घर की छत पर या आंगन में आसमानी सितारों के तले सोये है ? बच्चों को तारों को दिखाकर बताया है कि वह जो तारा दिख रहा है वह ध्रुव तारा है, उसके उपर सप्तऋषि है ? वो देखो आकाश के मध्य में व्याघ्र है ?

आज इन तारों के बारे में बात की जाये ।

आसमान में जो टिमटिमाते बिन्दु जैसे तारे दिखायी दे रहे है, वह हमारे सूर्य जैसे विशाल है। इनमें से कुछ तो सूर्य से हज़ारों गुणा बड़े और विशालकाय है। ये तारे हमारी पृथ्वी से हज़ारों अरबों किमी दूर है, इसलिये इतने छोटे दिखायी दे रहे है।

एक तारा एक विशालकाय चमकता हुआ गैस का पिण्ड होता है जो गुरुत्वाकर्षण के कारण बंधा हुआ होता है। पृथ्वी के सबसे पास का तारा सूर्य है, यही सूर्य पृथ्वी की अधिकतर ऊर्जा का श्रोत है। अन्य तारे भी पृथ्वी से दिखायी देते है लेकिन रात में क्योंकि दिन में वे   सूर्य की रोशनी से दब जाते है। एक कारण हमारा वायुमंडल में होनेवाला प्रकाश किरणो का विकिरण है जो धूल के कणों से सूर्य की किरणों के टकराने से उत्पन्न होता है। यह विकिरण वायु मण्डल को ढंक सा लेता है जिससे हम दिन में तारे नहीं देख पाते है। पढ़ना जारी रखें “लाखों तारे आसमां मे”

मानव इतिहास का सबसे सफल अभियान :वायेजर 2


वायेजर २ यह एक मानव रहित अंतरग्रहीय शोध यान था जिसे वायेजर 1 से पहले 20 अगस्त 1977 को प्रक्षेपित किया गया था। यह अपने जुड़वा यान वायेजर 1 के जैसा ही है, लेकिन वायेजर 1 के विपरित इसका पथ … पढ़ना जारी रखें मानव इतिहास का सबसे सफल अभियान :वायेजर 2