पॉल डिराक:  वैज्ञानिक जिसने गणित में छिपे ब्रह्मांड को खोजा


बीसवीं शताब्दी की भौतिकी में कुछ वैज्ञानिक ऐसे हुए जिन्होंने केवल नई खोजें नहीं कीं, बल्कि यह बदल दिया कि हम प्रकृति को देखने और समझने का तरीका क्या होना चाहिए। पॉल एड्रियन मौरिस डिराक (Paul Adrien Maurice Dirac) उन्हीं महान वैज्ञानिकों में से एक थे।

डिराक का नाम क्वांटम यांत्रिकी, सापेक्षता, एंटीमैटर और आधुनिक क्वांटम फील्ड थ्योरी के विकास के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया है। उनकी सबसे अद्भुत विशेषता यह थी कि वे प्रकृति के बारे में भौतिक कल्पनाओं की अपेक्षा गणितीय संरचना और उसकी सुंदरता पर अधिक भरोसा करते थे।

उनका प्रसिद्ध विचार था कि किसी भौतिक सिद्धांत की सुंदरता केवल सजावट नहीं है; वह इस बात का संकेत हो सकती है कि सिद्धांत प्रकृति की वास्तविक संरचना के करीब है।

शांत स्वभाव का असाधारण वैज्ञानिक
पॉल डिराक का जन्म 8 अगस्त 1902 को ब्रिस्टल, इंग्लैंड में हुआ था।

उनका बचपन और शिक्षा सामान्य अर्थों में असाधारण वैज्ञानिक बनने की तैयारी जैसी नहीं दिखती थी। उन्होंने पहले इंजीनियरिंग का अध्ययन किया और बाद में गणित की ओर आकर्षित हुए। धीरे-धीरे उनकी रुचि उस समय विकसित हो रही नई क्वांटम भौतिकी की ओर चली गई।

डिराक अत्यंत शांत, कम बोलने वाले और अंतर्मुखी व्यक्ति माने जाते थे। वे अनावश्यक बातचीत पसंद नहीं करते थे। उनके बारे में वैज्ञानिक समुदाय में यह धारणा प्रसिद्ध थी कि यदि उनके पास कहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण न हो, तो वे चुप रहना पसंद करते थे।

लेकिन जब वे गणितीय समीकरण लिखते थे, तो वही शांत व्यक्ति प्रकृति के सबसे गहरे रहस्यों को व्यक्त कर देता था। पढ़ना जारी रखें पॉल डिराक:  वैज्ञानिक जिसने गणित में छिपे ब्रह्मांड को खोजा

प्रागैतिहासिक काल में गणित और विज्ञान


गार्गी ने आकाश की ओर देखते हुए पूछा, “पापा, क्या हमेशा से लोग इतने ज्ञानवान थे? क्या हमेशा से विज्ञान और गणित था?”

मेरे चहरे पर मुस्कुराहट आ गई , मेरी आँखे नदी के पार देखने लगी, जैसे समय के पार देख रहा हूँ , मैंने कहा, “नहीं, विज्ञान और गणित हमेशा से किताबों में नहीं थे, लेकिन उनके बीज मानव के भीतर हमेशा से थे। चलो, मैं तुम्हें उस समय की कहानी सुनाता हूँ जब मानव ने पहली बार सोचना शुरू किया था।”

दोनों बच्चे उत्सुकता से मेरी ओर झुक गए। मैंने कहना शुरू किया, “बहुत-बहुत पहले, जब न शहर थे, न खेत, न घर , तब मानव जंगलों में रहता था। वह शिकार करता था, फल इकट्ठा करता था, और हर दिन उसके लिए एक नई चुनौती होती थी। यही पाषाण युग था, जब पत्थर उसके सबसे बड़े साथी थे। लेकिन बेटी, उस समय भी मानव केवल जीवित रहने के लिए नहीं जी रहा था, वह प्रकृति को, समय को, और स्वयं को समझने की कोशिश कर रहा था।”

“क्या वह भी हमारी तरह सोचता था?” गार्गी ने पूछा।

“हाँ,” मैंने उत्तर दिया, “शायद और भी अधिक ध्यान से। वह हर चीज़ को देखता था कि सूरज कब उगता है, कब ढलता है, चाँद कैसे बदलता है, और तारे कैसे हर रात एक ही रास्ते पर चलते हैं। उसने देखा कि जब ठंड बढ़ती है, तो कुछ जानवर गायब हो जाते हैं और कुछ नए आ जाते हैं। उसने समझना शुरू किया कि यह सब किसी नियम के अनुसार हो रहा है। यही विज्ञान की शुरुआत थी, प्रकृति के नियमों को समझने की कोशिश।”

अनुषा ने थोड़ी देर सोचकर कहा, “तो विज्ञान का मतलब सिर्फ किताबें नहीं हैं?”

मैंने शाम के लिए अलाव जलाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी, लकडीयो को जलाने के लिए एक ढेरी के रूप में जमा रहा था।

मैंने माचिस की तीली से आग जलाते हुए उत्तर दिया,, “बिल्कुल नहीं। विज्ञान का मतलब है प्रश्न पूछना। और उस समय मानव हर चीज़ पर प्रश्न करता था। जब उसने पहली बार देखा कि दो पत्थरों को टकराने से चिंगारी निकलती है, तो उसने सोचा, क्या इससे कुछ और हो सकता है? उसने कोशिश की, बार-बार की, और एक दिन आग जल उठी। इसी तरह जैसे मैंने तीली को माचिस की इस सतह से रगड़ कर उसे जलाया।” पढ़ना जारी रखें प्रागैतिहासिक काल में गणित और विज्ञान

भौतिकी से जुड़ी कुछ सामान्य भ्रांतियाँ


कुछ नया सीखने मे सबसे बड़ी बाधा रहती है हमारे द्वारा पहले से सीखा हुआ (अ)ज्ञान! जिस भरे हुये पात्र मे कुछ और नही भरा जा सकता, उस तरह से कुछ नया सीखने के लिये कभी कभी पहले से सीखा … पढ़ना जारी रखें भौतिकी से जुड़ी कुछ सामान्य भ्रांतियाँ