2024 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : विक्टर एम्ब्रोस (Victor Ambros) और गैरी रुवकुन (Gary Ruvkun)


फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2024 का नोबेल पुरस्कार विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को माइक्रोआरएनए की खोज और पोस्ट-ट्रांसक्रिप्शनल जीन विनियमन में इसकी भूमिका के लिए दिया गया है।
इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार दो वैज्ञानिकों को जीन(Gene) गतिविधि को विनियमित(Regulate) करने के तरीके को नियंत्रित करने वाले एक मौलिक सिद्धांत की खोज के लिए सम्मानित करता है।

हमारे गुणसूत्रों में संग्रहीत जानकारी की तुलना हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं के लिए एक निर्देश पुस्तिका से की जा सकती है। ये निर्देश पुस्तिका कोशिका को निर्देश देती है कि उसकी संरचना कैसी हो, उसे क्या कार्य करना चाहिए, इत्यादी। प्रत्येक कोशिका में एक जैसे गुणसूत्र होते हैं, इसलिए प्रत्येक कोशिका में जीन का बिल्कुल समान सेट और उस कोशिका की कार्य प्रणाली के लिए निर्देशों का बिल्कुल समान सेट होता है। फिर भी, विभिन्न प्रकार कीकोशिका जैसे कि मांसपेशी और तंत्रिका कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली एक दूसरे से भिन्न होती है।। इन कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली में ये अंतर कैसे उत्पन्न होते हैं?

इसका उत्तर जीन द्वारा कोशिका कार्य के विनियमन (रेगुलेशन)/जीन विनियमन में निहित है, जो प्रत्येक कोशिका को केवल केवल उसके प्रकार से संबधित निर्देशों निर्देशों का चयन करने की अनुमति देता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक कोशिका प्रकार में केवल जीन का सही सेट सक्रिय हो। सरल शब्दों में जीन विनियमन तय करता है कि मांसपेशी संबधित कोशिका , मांशपेशी की संरचना और कार्य संबधित निर्देशों को की चुन कर सक्रीय करे!

विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन इस बात में रुचि रखते थे कि विभिन्न कोशिका प्रकार कैसे विकसित होते हैं। उन्होंने माइक्रोआरएनए(microRNA) की खोज की, जो छोटे आरएनए(RNA) अणुओं का एक नया वर्ग है जो जीन विनियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी अभूतपूर्व खोज ने जीन विनियमन के एक बिल्कुल नए सिद्धांत खोजा जो मनुष्यों सहित समस्त बहुकोशीय जीव की संरचना और जीवन के लिए आवश्यक है!। अब यह ज्ञात है कि मानव जीनोम में एक हज़ार से अधिक माइक्रोआरएनए (microRNA)के लिए निर्देश है। उनकी आश्चर्यजनक खोज ने जीन विनियमन के एक बिल्कुल नए आयाम का खुलासा किया। जीवों के विकास और कार्यप्रणाली के लिए माइक्रोआरएनए (microRNA) मूल रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। पढ़ना जारी रखें 2024 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : विक्टर एम्ब्रोस (Victor Ambros) और गैरी रुवकुन (Gary Ruvkun)

2023 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : कैटालिन कारिको (Katalin Karikó ) और ड्रू वीसमैन (Drew Weissman)


वर्ष 2022 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कारों का ऐलान सोमवार 2 अक्टूबर 2023 को किया गया है। इस बार यह पुरस्कार कैटालिन कारिको (Katalin Karikó ) और ड्रू वीसमैन (Drew Weissman) को मिला है

कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में नोबेल असेंबली ने फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2023 का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से कैटालिन कारिको और ड्रू वीसमैन को

“न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित उनकी खोजों के लिए देने का फैसला किया है, जिसने सीओवीआईडी ​​​​-19 के खिलाफ प्रभावी एमआरएनए टीकों के विकास को सक्षम किया है।”

दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं की खोजें 2020 की शुरुआत में शुरू हुई महामारी के दौरान सीओवीआईडी ​​​​-19 के खिलाफ प्रभावी एमआरएनए टीके विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण थीं।

उन्होंने अपने अभूतपूर्व निष्कर्षों के माध्यम से, जिसने मूल रूप से हमारी समझ को बदल दिया है कि एमआरएनए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ कैसे संपर्क करता है। दोनों नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने आधुनिक समय में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक के दौरान अभूतपूर्व दर से टीका विकास के लिए योगदान दिया । पढ़ना जारी रखें 2023 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : कैटालिन कारिको (Katalin Karikó ) और ड्रू वीसमैन (Drew Weissman)

2022 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : स्वान्ते पाबो


वर्ष 2022 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कारों का ऐलान सोमवार 3 अक्टूबर 2022 को किया गया है। इस बार को यह पुरस्कार स्वान्ते पाबो को मिला है।

यह पुरस्कार उन्हे मानव नुमा(आदिमानव ) प्रजातियों के जीनोम तथा मानव प्रजाति के विकास पर खोज के लिए दिया गया है।

मानव जाती हमेशा अपने उद्गम के बारे में जानने के लिए उत्सुक रही है। हम कहाँ से आये है, हम अपने पहले आयी हुई प्रजातियों से किस तरह से संबधित है ? ऐसा क्या है जो हमने होमो सेपियंस बनाता है और अन्य आदिमानव प्रजातियों से अलग करता है ?

अपनी इस क्रांतिकारी शोध के दौरान स्वान्ते पाबो ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसे असंभव समझा जा रहा था। उन्होंने निएंडरथल के जीनोम की संरचना का मापन किया जोकि होमो सेपियंस के लुप्त पूर्वज या सम्बन्धी है। उन्होंने एक ऐसी आदिमानव प्रजाति भी खोज निकाली जिसे देनिसोवा कहते है। सबसे महत्वपूर्ण है कि पाबो ने पाया कि आज से 70,000 वर्ष पहले होमो सेपियंस ने अफ्रिका से बाहर की यात्रा आरम्भ की। मानव जींस के वर्तमान मानव तक के प्रवाह का अध्यन वर्त्तमान चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, इससे हम जान सकते है कि किस तरह से हम बाह्य संक्रमणों से लड़ने के लिए अपनी प्रतिरोध क्षमता को मजबूत कर सकते है।

पाबो की महत्वपूर्ण खोज ने विज्ञान की एक नई शाखा को जन्म दिया है जिसे पेलियोजिनोमिक्स (paleogenomics) कहते है। लुफ्त आदिमानवों के जीनोम और जीवित मानव प्रजाति के जीनोम के मध्य अंतर का अध्ययन कर हम जान सकते है कि ऐसा क्या है जो हमें “होमो सेपियंस” बनाता है। पढ़ना जारी रखें 2022 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : स्वान्ते पाबो