2024 रसायन नोबेल पुरस्कार :डेविड बेकर(David Baker), डेमिस हसाबिस(Demis Hassabis),जॉन एम. जम्पर( John M. Jumper)


रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने रसायन विज्ञान में 2024 का # नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है, जिसमें आधा हिस्सा डेविड बेकर को “कम्प्यूटेशनल प्रोटीन डिजाइन के लिए” और दूसरा आधा हिस्सा डेमिस हसाबिस और जॉन एम. जम्पर को “प्रोटीन संरचना भविष्यवाणी के लिए” संयुक्त रूप से दिया जाएगा।

रसायनज्ञों ने लंबे समय से जीवन के रासायनिक उपकरणों – प्रोटीन को पूरी तरह से समझने और उस पर महारत हासिल करने का सपना देखा है। यह सपना अब पहुंच के भीतर है। डेमिस हसबिस और जॉन एम. जम्पर ने लगभग सभी ज्ञात प्रोटीन की संरचना की भविष्यवाणी करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता(AI) का सफलतापूर्वक उपयोग किया है। डेविड बेकर ने सीखा है कि जीवन के मूलभूत घटको में महारत कैसे हासिल की जाए और पूरी तरह से नए प्रोटीन कैसे बनाए जाएं। उनकी खोजों का महत्व और कार्यक्षमता बहुत अधिक है।

कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से प्रोटीन के रहस्यों की व्याख्या

जीवन का रसायन विज्ञान कैसे संभव होता है? इस प्रश्न का उत्तर प्रोटीन का अस्तित्व है, जिसे शानदार रासायनिक औजार के रूप में बताया जा सकता है। वे आम तौर पर 20 अमीनो एसिड से बने होते हैं जिन्हें अंतहीन तरीकों से जोड़ा जा सकता है। डीएनए में संग्रहीत जानकारी को ब्लूप्रिंट के रूप में उपयोग करते हुए, अमीनो एसिड को हमारी कोशिकाओं में एक साथ जोड़कर लंबी स्ट्रिंग बनाई जाती है।

फिर प्रोटीन का जादू होता है: अमीनो एसिड की स्ट्रिंग एक अलग – कभी-कभी अनोखी – त्रि-आयामी संरचना (चित्र 1) में मुड़ती और मुड़ती है। यह संरचना प्रोटीन को उनका कार्य देती है। कुछ रासायनिक निर्माण इकाइयां बन जाती हैं जो मांसपेशियों, सींग या पंख बना सकते हैं, जबकि अन्य हार्मोन या एंटीबॉडी बन सकते हैं। उनमें से कई एंजाइम बनाते हैं, जो जीवन की रासायनिक प्रतिक्रियाओं को आश्चर्यजनक सटीकता के साथ संचालित करते हैं। कोशिकाओं की सतहों पर बैठे प्रोटीन भी महत्वपूर्ण हैं, और कोशिका और उसके आस-पास के वातावरण के बीच संचार चैनल के रूप में कार्य करते हैं। पढ़ना जारी रखें 2024 रसायन नोबेल पुरस्कार :डेविड बेकर(David Baker), डेमिस हसाबिस(Demis Hassabis),जॉन एम. जम्पर( John M. Jumper)

2022 रसायन नोबेल पुरस्कार :केरोलिन आर बर्टोज़ी (Carolyn R. Bertozzi), मोर्टन मेल्डल(Morten Meldal) तथा के बैरी शार्प्लेस ( K. Barry Sharpless)


वर्ष 2022 का रसायन नोबेल पुरस्कार केरोलिन आर बेर्तोज़ज़ी (Carolyn R. Bertozzi), मोर्टन मैडल (Morten Meldal) तथा के बैरी शार्प्लेस ( K. Barry Sharpless) को दिया गया है।

नोबेल कमेटी के अनुसार इस वर्ष का रसायन नोबेल पुरस्कार अणु निर्माण के नए उपकरण के लिए दिया गया है।

इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार जिस कार्य पर दिया गया है वह कहता है कि क्लिक करें – और अणु एक साथ जुड़ जाते है और नया वांछित अणु बनता है।

रसायन विज्ञान 2022 का नोबेल पुरस्कार कठिन प्रक्रियाओं को आसान बनाने के बारे में है। बैरी शार्पलेस और मोर्टन मेल्डल ने रसायन विज्ञान के एक कार्यात्मक रूप की नींव रखी है – “क्लिक करें रसायन विज्ञान(click chemistry)” – जिसमें आणविक संरचना के मूलभूत भाग जल्दी और कुशलता से एक साथ प्रतिक्रिया करते हैं। कैरोलिन बर्टोज़ी ने क्लिक केमिस्ट्री को एक नए आयाम में ले लिया है और जीवित जीवों में इसका उपयोग करना शुरू कर दिया है।

बहुत ही सरल शब्दों में इसे ऐसे मान सकते है, आपके सामने बच्चो के खेलने वाले लीगो ब्लॉक्स है, आप उनमे से मनचाहे ब्लॉक्स पर क्लिक करते है और मनचाही आकृति बन जाती है। अब आप रसायन शास्त्र में लीगो ब्लॉक्स की जगह निर्माण कार्य के मूलभूत अणु ले लें और इस प्रक्रिया से वांछित विशाल अणु बनाये जिसे आप दवा निर्माण या औद्योगिक रसायन विज्ञान में प्रयोग कर सकते है। पढ़ना जारी रखें 2022 रसायन नोबेल पुरस्कार :केरोलिन आर बर्टोज़ी (Carolyn R. Bertozzi), मोर्टन मेल्डल(Morten Meldal) तथा के बैरी शार्प्लेस ( K. Barry Sharpless)

हिग्स बोसान, नोबेल पुरस्कार, धर्म और भारत


 वैज्ञानिक पीटर हिग्स और फ्रांसोआ एंगलर्ट
वैज्ञानिक पीटर हिग्स और फ्रांसोआ एंगलर्ट

स्विट्जरलैंड में महाप्रयोग के दौरान ब्रह्मांड का सबसे छोटा कण खोजने वाले दो वैज्ञानिकों को इस साल भौतिक शास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस कण ही खोज पिछले साल हुई है।

ब्रिटेन के 80 साल के वैज्ञानिक पीटर हिग्स और बेल्जियम के फ्रांसवा एंगलर्ट को भौतिकी के लिए 2013 का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने इस अति सूक्ष्म कण हिग्स बोसान के अस्तित्व के बारे में 1964 में ही भविष्यवाणी की थी। नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा है कि इस भविष्यवाणी के बाद यह बताना संभव हुआ कि हिग्स कण का भी द्रव्यमान होता है।

दोनों वैज्ञानिकों को 80 लाख क्रोनर की इनामी राशि दी जाएगी। पिछले साल जुलाई में दुनिया के सबसे बड़े प्रयोग के बाद स्विट्जरलैंड की सर्न(CERN) प्रयोगशाला ने इस सूक्ष्म कण के अस्तित्व का एलान किया था। इसके बाद से ही इन दोनों को नोबेल पुरस्कार का दावेदार बताया जाने लगा।

पुरस्कार की घोषणा करते हुए रॉयल स्वीडिश अकादमी ऑफ साइंसेज ने एक बयान में कहा, “पुरस्कृत सिद्धांत पार्टिकल भौतिकी के मानक का केंद्रीय हिस्सा है, जो बताता है कि हमारे ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ।”
हिग्स कण का सिद्धांत 1964 में एडिनबरा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्रोफेसर पीटर हिग्स ने अपनी टीम के पांच सदस्यों के साथ दिया। प्रोफेसर हिग्स ने तब कहा था कि एक दिन विज्ञान हिग्स कणों तक पहुंच जाएगा। उन्होंने इस दिन के बारे में कभी कहा था, “मुझे अपने जीवन में ऐसा होने की उम्मीद नहीं है और मैं अपने परिवार वालों से कहूंगा कि वह फ्रिज में कुछ शैंपेन रख दें। एक न एक दिन विज्ञान यहां तक पहुंच ही जाएगा, तब फ्रिज वाली शैंपेन निकाल कर जश्न मनाया जाएगा।” हालांकि हिग्स के जीते जी न सिर्फ इस कण के अस्तित्व का पता चला, बल्कि उन्हें इस विशाल खोज के लिए नोबेल पुरस्कार भी दिया जा रहा है। यानी उनके लिए फ्रिज से शैंपेन निकालने का वक्त आ गया है।

बोसान कणों की अवधारणा भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस ने रखी थी। बोस के ही नाम पर इन कणों को बोसान कहा जाता है। पढ़ना जारी रखें “हिग्स बोसान, नोबेल पुरस्कार, धर्म और भारत”