समय यात्रा(Time Travel) : स्टीफ़न हाकिंग के साथ


स्टीफेंस हाकिंग: नमस्ते! मेरा नाम स्टीफेंस हाकिंग है मुझे आप भौतिकविज्ञानी, खगोलविद् और एक सपने देखनेवाला भी कह सकते है। मैं चल-फिर नही सकता और मुझे बात भी कंप्यूटर से ही करनी पड़ती है लेकिन मेरा दिमाग सोचने के लिए स्वतंत्र … पढ़ना जारी रखें समय यात्रा(Time Travel) : स्टीफ़न हाकिंग के साथ

प्रकाशगति से ब्रह्मांड की यात्रा


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टैकयोन

क्या प्रकाशगति से तेज संचार संभव है?


प्रकाश की गति इतनी ज्यादा होती है कि यह लंदन से न्यूयार्क की दूरी को एक सेकेंड में 50 से ज़्यादा बार तय कर लेगी। लेकिन मंगल और पृथ्वी के बीच (22.5 करोड़ किलोमीटर की दूरी) यदि दो लोग प्रकाश गति से भी बात करें, तो एक को दूसरे तक अपनी बात पहुंचाने में 12.5 मिनट लगेंगे।

वॉयेजर अंतरिक्ष यान हमारी सौर व्यवस्था के सबसे बाहरी हिस्से यानी पृथ्वी से करीब 19.5 अरब किलोमीटर दूर है। हमें पृथ्वी से वहाँ संदेश पहुँचाने में 18 घंटे का वक्त लगता है।इसीलिए प्रकाश से ज्यादा गति में संचार के बारे में दिलचस्पी बढ़ रही है। जी हाँ, अचरज तो होगा पर वैज्ञानिक अब इस दिशा में काम करने में जुटे हैं।

अंतरिक्ष में ख़ासी दूरियों के कारण यदि संदेश प्रकाश की गति से भी भेजा जाए तो उसे एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचने में समय लगता है।

भौतिक विज्ञान क्या कहता है?

वैसे प्रकाश से अधिक गति का संचार भौतिक विज्ञान के स्थापित नियमों को तोड़े बिना संभव नहीं है। लेकिन इस दिशा में कोशिश शुरू हो चुकी है, जिसमें प्रकाश से भी तेज़ गति से संचार को संभव माना जा रहा है। अब तक इस गति को हासिल करने की जरूरत महसूस नहीं होती थी। मनुष्य ने सबसे ज्यादा दूरी चंद्रमा तक तय की है करीब 384,400 किलोमीटर। प्रकाश को ये दूरी तय करने में महज़ 1.3 सेकेंड का वक्त लगता है। अगर कोई चंद्रमा से प्रकाश की गति से संचार करे तो इतना ही वक्त लगेगा। अंतर ज्यादा नहीं है, इसलिए इस मामले में तो प्रकाश से ज्यादा की गति से संचार करने या नहीं करने से फर्क नहीं पड़ता।

लेकिन अगर हम मंगल तक की दूरी तय करें, तो फर्क समझ में आता है। सौर मंडल के बाहरी क्षेत्र में मौजूद वॉयेजर से भी संपर्क साधने के समय प्रकाश से तेज़़ गति से संचार की बात समझ में आती है। सबसे नजदीकी तारा मंडल अल्फ़ा सेटॉरी पृथ्वी से 40 ट्राइलियन किलोमीटर दूर है। वहां के संदेश को पृथ्वी तक पहुंचने में 4 साल का वक्त लगता है। ऐसे में परंपरागत संचार व्यवस्था बहुत उपयोगी नहीं है।

आइंस्टाइन को ग़लत साबित करेंगे?

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प्रकाशगति से तेज न्युट्रिनो ?: क्रांतिकारी खोज या प्रायोगिक गलती ?


ओपेरा कण जांचक( OPERA particle detector)
ओपेरा कण जांचक( OPERA particle detector)

अपडेट मार्च 17,2012: आइंस्टाइन का सिद्धांत कि प्रकाशगति से तेज यात्रा असंभव  है, अभी तक सही है, प्रकाशगति से तेज न्युट्रिनो प्रयोग के पीछे एक उपकरण की गलती थी। इस प्रयोग मे प्रयुक्त एक फाइबर आप्टिक केबल ढीला होने से समय की सही गणना नही हो पा रही थी, जिससे प्रकाशगति से तेज न्युट्रीनो का भ्रम उत्पन्न हो रहा था।

जेनेवा स्थित भौतिकी की दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला सर्न(CERN) में वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने परमाण्विक कण (Subatomic Particles) न्यूट्रिनो की गति प्रकाश की गति से भी ज़्यादा पाई है।

अगर ऐसा सच हुआ तो ये भौतिकी के मूलभूत नियमों को पलटने वाली खोज होगी। शोधकर्ता स्वीकार कर रहे हैं कि वे इस नतीजे से काफ़ी आश्चर्यचकित हैं और इसीलिए उन्होंने कोई दावा नहीं करते हुए अन्य लोगों से स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करने की अपील की है।

आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार कोई भी कण प्रकाशगति से तेज नही चल सकता है। यदि यह निरीक्षण सत्य है तब भौतिकी की किताबो को नये सीरे से लिखना होगा। पढ़ना जारी रखें “प्रकाशगति से तेज न्युट्रिनो ?: क्रांतिकारी खोज या प्रायोगिक गलती ?”

स्टार ट्रेक का अंतरिक्ष यान (यु एस एस एंटरप्रायज)

विज्ञान फंतासी कथाओं मे विज्ञान


स्टार ट्रेक का अंतरिक्ष यान (यु एस एस एंटरप्रायज)
स्टार ट्रेक का अंतरिक्ष यान (यु एस एस एंटरप्रायज)

विज्ञान फतांसी कथायें सामान्यतः ऐसी कल्पित कहानियाँ होती है,जिसकी घटनाये वैज्ञानिक आधार पर संभव होती हैं और वे विज्ञान के मूलभूत नियमो का उल्लंघन नही करती हैं। इन कथाओं का घटनाक्रम भविष्य, भविष्य का विज्ञान और तकनिकी ज्ञान, अंतरिक्ष यात्रा अथवा परग्रही प्राणीयों पर केन्द्रित होता है। कभी कभी वैज्ञानिक आविष्कारों के परिणामो का अध्ययन भी इन कथाओं का उद्देश्य होता है।

विज्ञान गल्प मे तर्कसंगत ढंग से प्रस्तुत समांतर विश्व या भविष्य का भी समावेश होता है। यह जादुई या तिलस्मी कहानीयों के जैसे ही लेकिन भिन्न होती है क्योंकि इस गल्पो की घटनायें वैज्ञानिक आधार पर संभव होती है। इन कहानीयों का घटनाक्रम और पात्र काल्पनिक होते है लेकिन वे विज्ञान के मूलभूत नियमों का पालन करते है।

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