फर्मीयान कण और बोसान कण

07 सरल क्वांटम भौतिकी: क्वांटम यांत्रिकी


मानव मन किसी भी नये तथ्य को समझने के लिये उसकी अपने आसपास की रोज़मर्रा की वस्तुओं और उनके व्यवहार से तुलना करके देखता है। इसी तथ्य के कारण शिक्षक हर सिद्धांत को समझाने कुछ उदाहरण देते रहते हैं। लेकिन यह बड़े पैमाने की वस्तुओं तक ही सीमित है, परमाणु स्तर पर यह नही किया जा सकता है; इस स्तर पर तुलना के लिये हमारे पास कोई रोज़मर्रा का उदाहरण नही होता है।

परमाणु और परमाण्विक कण हमारे आसपास के रोजाना की किसी भी अन्य वस्तुओं जैसे व्यवहार नहीं करते हैं, यह आधुनिक विज्ञान के सबसे बड़े आश्चर्यजनक तथ्यों मे से एक है। वे छोटी गेंदों के जैसे उछलते नहीं रहते हैं, इसके विपरीत वे तरंगों के जैसे व्यवहार करते हैं। स्टैंडर्ड मॉडल सिद्धांत इन कणों के गुण धर्मों और व्यवहार की व्याख्या गणितीय रूप से करता है, लेकिन इन कणों के व्यवहार को समझने के लिये हमारे पास रोज़ाना के जीवन में कोई उदाहरण नहीं है। इन कणो के व्यवहार की तुलना के लिये हमारे पास कोई उदाहरण नही है।

यदि आपने इस श्रृंखला के प्रारंभिक लेख नही पढ़े है, तो आगे बढ़ने से पहले उन्हे पढ़ें।

  1. मूलभूत क्या है ?
  2. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 1?
  3. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 2?
  4. ब्रह्माण्ड को कौन बांधे रखता है ?
  5. परमाणु को कौन बांधे रखता है?
  6. कमजोर नाभिकिय बल और गुरुत्वाकर्षण

भौतिक वैज्ञानिक इन छोटे कणों की व्याख्या के लिए क्वांटम शब्द का प्रयोग करते हैं जिसका अर्थ  “टुकड़ों में वृद्धि या खंड” होता है। ऐसा इसलिए है कि कुछ गुणधर्म केवल सुनिश्चित मान ले सकते हैं। उदाहरण के लिये विद्युत आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश का पूर्णांको में गुणनफल ही हो सकता है, या वह क्वार्क के विद्युत आवेश(1/3 तथा 2/3 ) के पूर्णांको में गुणनफल ही हो सकता है। क्वांटम यांत्रिकी इन कणों की आपसी प्रतिक्रिया की व्याख्या करती है।

कुछ महत्वपूर्ण क्वांटम संख्यायें निम्नलिखित है :

  • विद्युत आवेश : क्वार्क का विद्युत आवेश इलेक्ट्रॉन के विद्युत आवेश का 2/3 या 1/3 ही हो सकता है, लेकिन वे हमेशा पूर्णांक विद्युत आवेश वाले यौगिक कणों का निर्माण करते हैं। क्वार्क के अतिरिक्त अन्य कणों का आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश का पूर्णांक में गुणनफल ही होता है।
  • रंग आवेश : एक क्वार्क तीन रंग-आवेश में से किसी एक का हो सकता है तथा ग्लुआन आठ संभव रंग-प्रतिरंग युग्मों से एक का हो सकता है। अन्य सभी कण रंग उदासीन होते हैं।
  • पीढ़ी : क्वार्कों और लेप्टानों को पीढ़ी अलग करती है।
  • स्पिन : यह एक और विचित्र लेकिन महत्वपूर्ण गुण है। बड़े पिंड जैसे ग्रह या कंचे घूर्णन के कारण कोणीय संवेग या चुंबकीय क्षेत्र होता है। कण भी एक नन्हा सा कोणीय संवेग या चुंबकीय क्षेत्र रखते हैं इसलिए उनके इस गुणधर्म को स्पिन कहते हैं। यह शब्द थोड़ा गलत है क्योंकि ये कण वास्तविकता में स्पिन या घूर्णन नहीं करते हैं। स्पिन का मान प्लैंक के स्थिरांक के 0, 1/2, 1, 3/2 गुणनफल में होता है।

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ग्लुआन

05 सरल क्वांटम भौतिकी: परमाणु को कौन बांधे रखता है?


हम जानते है कि किसी परमाणु के दो भाग होते है,  प्रोटान और न्यूट्रॉन से बना परमाणु क्रेन्द्रक और उसके चारो ओर इलेक्ट्रान का बादल। परमाणु केन्द्र प्रोटानो के फलस्वरूप धनात्मक आवेशित होता है और विद्युत-चुंबकीय बलो के फलस्वरूप इलेक्ट्रान उसके चारो ओर परिक्रमा करते रहते है।

अब हमारे पास एक और समस्या है, परमाणु केन्द्र को कौन बांधे रखता है?

यदि आपने इस श्रृंखला के प्रारंभिक लेख नही पढ़े है, तो आगे बढ़ने से पहले उन्हे पढ़ें।

  1. मूलभूत क्या है ?
  2. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 1?
  3. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 2?
  4. ब्रह्माण्ड को कौन बांधे रखता है ?

परमाणु केन्द्र को कौन बांधे रखता है?

परमाणु केण्द्रक
परमाणु केण्द्रक
परमाणु केन्द्र बिखरता क्यों नही ?
परमाणु केन्द्र बिखरता क्यों नही ?

परमाणु का केन्द्र प्रोटान और न्यूट्रॉन के समूहों की एक घनी गेंद जैसे होता है। न्यूट्रॉन में आवेश नहीं होता है तथा धनात्मक प्रोटान एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, परमाणु केन्द्रक बिखरता क्यों नहीं है?

स्पष्ट है कि विद्युत-चुंबक बल परमाणु केन्द्रक को बांधे नही रख सकता है। तब दूसरा कौन सा बल हो सकता है ?

गुरुत्वाकर्षण ? ना जी ना! गुरुत्वाकर्षण बल इतना कमजोर है कि विद्युत चुंबक बल पर भारी हो कर परमाणु केन्द्रक को बांधे नहीं रख सकता है।

तब परमाणु केन्द्रक को बांधे कौन रखता है ?

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