स्टीफन विलियम हॉकिंग : ब्लैक होल को चुनौती देता वैज्ञानिक


विश्व प्रसिद्ध महान वैज्ञानिक और बेस्टसेलर रही किताब ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ के लेखक स्टीफन हॉकिंग ने शारीरिक अक्षमताओं को पीछे छोड़ते हु्ए यह साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है। हमेशा … पढ़ना जारी रखें स्टीफन विलियम हॉकिंग : ब्लैक होल को चुनौती देता वैज्ञानिक

रॉबर्ट बॉयल

राबर्ट बायल : रायल सोसायटी के संस्थापक


राबर्ट बॉयल (Robert Boyle ; 25 जनवरी 1627 – 31 दिसंबर1691ई.) आधुनिक रसायनशास्त्र का प्रवर्तक, अपने युग के महान वैज्ञानिकों में से एक, लंदन की प्रसिद्ध रॉयल सोसायटी के संस्थापक तथा कॉर्क के अर्ल की 14वीं संतान थे। वे एक … पढ़ना जारी रखें राबर्ट बायल : रायल सोसायटी के संस्थापक

मानव भ्रूण में जीन का संपादन(Gene editing in human embryos)

2017-विज्ञान की शीर्ष 10 घटनायें : एक सिंहावलोकन


कुछ कड़वी और कुछ मीठी यादों के साथ साल 2017 विदा लेने ही वाला है। चाहें राजनीतिक घटनाक्रम हो या वैश्विक वैज्ञानिक घटनाक्रम हर मामले में यह साल कई मायनों में अलग रहा। इस साल कई अहम वैज्ञानिक घटनाक्रम, महत्वपूर्ण … पढ़ना जारी रखें 2017-विज्ञान की शीर्ष 10 घटनायें : एक सिंहावलोकन

लुई पास्चर(Louis Pasteur)

लुई पाश्चर (Louis Pasteur) : मानवता के महान निष्काम सेवक


19वी शताब्दी के जिन महान वैज्ञानिकों ने निष्काम भाव से मानवता की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया ,उनमे से एक थे लुई पाश्चर (Louis Pasteur)। लुई पाश्चर (Louis Pasteur) ने अपनी महान वैज्ञानिकों खोजो के द्वारा बीमारी के … पढ़ना जारी रखें लुई पाश्चर (Louis Pasteur) : मानवता के महान निष्काम सेवक

योहानस केप्लर

योहानस केप्लर :आकाश मे ग्रहो की गति के नियम के प्रतिपादक


जोहानस केपलर (योहानेस केप्लर) जर्मनी के महान वैज्ञानिक और गणितज्ञ थे। केपलर के अनुसार सूर्य की कक्षा मे परिक्रमा करते ग्रहों का मार्ग(कक्षा) गोलाकार नही अपितु दिर्घवृत्ताकार(अंडाकार) होता है। अपनी-अपनी परिधि में परिक्रमा करते हुए हर ग्रह की गति में … पढ़ना जारी रखें योहानस केप्लर :आकाश मे ग्रहो की गति के नियम के प्रतिपादक

महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन


RamanujanSrinivasa-Color800pxश्रीनिवास रामानुजन् इयंगर (तमिल ஸ்ரீனிவாஸ ராமானுஜன் ஐயங்கார்) (22 दिसम्बर, 1887 – 26 अप्रैल, 1920) एक महान भारतीयगणितज्ञ थे। इन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है। इन्हें गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला, फिर भी इन्होंने विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में गहन योगदान दिए। इन्होंने अपने प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में अद्भुत अविष्कार किए वरन भारत को अतुलनीय गौरव भी प्रदान किया।

ये बचपन से ही विलक्षण प्रतिभावान थे। इन्होंने खुद से गणित सीखा और अपने जीवनभर में गणित के 3,884 प्रमेयों का संकलन किया। इनमें से अधिकांश प्रमेय सही सिद्ध किये जा चुके हैं। इन्होंने गणित के सहज ज्ञान और बीजगणित प्रकलन की अद्वितीय प्रतिभा के बल पर बहुत से मौलिक और अपारम्परिक परिणाम निकाले जिनसे प्रेरित शोध आज तक हो रहा है, यद्यपि इनकी कुछ खोजों को गणित मुख्यधारा में अब तक नहीं अपनाया गया है। हाल में इनके सूत्रों को क्रिस्टल-विज्ञान में प्रयुक्त किया गया है। इनके कार्य से प्रभावित गणित के क्षेत्रों में हो रहे काम के लिये रामानुजन जर्नल की स्थापना की गई है।

महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को मद्रास से 400 किमी दूर इरोड नामक एक छोटे से गांव में हुआ था। रामानुजन जब एक वर्ष के थे तभी उनका परिवार पवित्र तीर्थस्थल कुंभकोणम में आकर बस गया था। इनके पिता यहाँ एक कपड़ा व्यापारी की दुकान में मुनीम का कार्य करते थे। पाँच वर्ष की आयु में रामानुजन का दाखिला कुंभकोणम के प्राथमिक विद्यालय में करा दिया गया। पढ़ना जारी रखें “महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन”