2025 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : मैरी ई. ब्रुनको(Mary E. Brunkow), फ्रेड रामस्डेल(Fred Ramsdell ) और शिमोन साकागुची(Shimon Sakaguchi )


कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली ने 2025 का फिजियोलॉजी या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार “परिधीय प्रतिरक्षा सहिष्णुता से संबंधित उनकी खोजों के लिए” निम्नलिखित को देने का निर्णय लिया है: मैरी ई. ब्रुनकोइंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स बायोलॉजी,सिएटल, अमेरिका फ्रेड रैम्सडेलसोनोमा बायोथेरेप्यूटिक्स,सैन … पढ़ना जारी रखें 2025 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : मैरी ई. ब्रुनको(Mary E. Brunkow), फ्रेड रामस्डेल(Fred Ramsdell ) और शिमोन साकागुची(Shimon Sakaguchi )

बारबरा मैकक्लिंटॉक

बारबरा मैकक्लिंटॉक : दुनिया के सबसे महान आनुवंशिकीविदों में से एक


दुनिया के सबसे महान आनुवंशिकीविदों में से एक बारबरा मैकक्लिंटॉक थीं, जो अब तक की सबसे प्रेरणादायक अमेरिकी महिलाओं में से एक हैं। 1902 में हार्टफोर्ड, कनेक्टिकट में जन्मी मैकक्लिंटॉक ने ‘जंपिंग जीन’ की खोज की, डीएनए के टुकड़े जो एक कोशिका में दिए गए गुणसूत्र पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। मैकक्लिंटॉक ने 1992 में 90 वर्ष की उम्र में अपनी मृत्यु तक अपनी प्रयोगशाला में काम किया। सोमवार, 16 जून 2025 को उनकी उम्र 123 वर्ष हो जाती। मैकक्लिंटॉक आज भी अपने आत्मविश्वास, बुद्धिमत्ता और असाधारण निडर भावना से सभी उम्र के वैज्ञानिकों को प्रेरित करती हैं। उन्होंने सभी के लिए एक कालातीत सबक छोड़ा है। बेजोड़ दृढ़ता का सबक। उन्होंने एक बार कहा था, “अगर आपको पता है कि आप सही रास्ते पर हैं, अगर आपके पास यह आंतरिक ज्ञान है, तो कोई भी आपको रोक नहीं सकता… चाहे वे कुछ भी कहें”। पढ़ना जारी रखें बारबरा मैकक्लिंटॉक : दुनिया के सबसे महान आनुवंशिकीविदों में से एक

हिन्दूकुश-हिमालय हुआ अधीर


आजकल हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ खूब हुड़दंग मचा रहा है। जाड़ों के मौसम की उठापटक जो पहले से दिसंबर-जनवरी के महीनों में देखी जाती थी इधर के सालों में जाड़ों की वही बारिश, ओलावृष्टि, बर्फ़बारी की हरकतें फ़रवरी के आख़िरी हफ्तों से मार्च के आख़िर यहाँ तक गर्मियों में भी देखने को मिल रही हैं। पहले ऐसा किसी साल अचानक से देखने को मिलता था अब तो यह लेटलतीफी मौसम की एक आदत सी बन गई है। वहीं बर्फ़ पड़ने में आई कमी आमजन की आँखों ने भी पकड़ी है। बर्फ़ खिसकने की दुर्घटनाएं तो जुबाँ पर चढ़ी ही हुई हैं। माणा में तो अवधाव के चलते 8 मजदूरों की जान भी चली गई। पहाड़ों में बर्फ़ अब कम टिकती है, तो खासोआम सभी आए दिन कहते-सुनते हैं। हिमालय और उसके पार खड़े बर्फ़ के बड़े-बड़े पर्वत, पूरा हिन्दूकुश, वो तिब्बत का पठार, जहाँ-जहाँ तक हमें ये बर्फ़ का अकूत भण्डार मिलता है वहाँ के मिज़ाज में गड़बड़ी आ रही है। पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुव के अलावा, उस पूरे क्षेत्र में बिना किसी शोर-शराबा के भारी बदलाव आ रहे हैं। वहाँ की हवा, पानी, मिट्टी, नदी-नाले, जंगलों की दुनिया सबकुछ बदल रहा है बल्कि साफ कहें तो बिगड़ रहा है, बिगड़ चुका है। ये खतरनाक बदलाव क्या हैं, क्यों हैं और इनके क्या भयावह परिणाम होंगे इन सब पर वैज्ञानिक रिपोर्ट आती रहती हैं। ऐसे ही कुछ रिपोर्टों के आधार पर कुछ बातें आपके सामने इस लेख के जरिए लाया हूँ। यह लेख वाडिया हिमालयी भूविज्ञान संस्थान की हिन्दी भाषा पत्रिका अश्मिका में प्रकाशित हुआ है। लेख पोस्ट में टेक्स्ट और तस्वीरों दोनों तौर पर सबकी आसानी के लिए दिया जा रहा है। पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया, राय ज़रूर दीजिएगा। साथ ही हिन्दूकुश-हिमालय के लिए भी सोचने-विचारने के लिए समय निकालएगा। पढ़ना जारी रखें हिन्दूकुश-हिमालय हुआ अधीर

2024 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : विक्टर एम्ब्रोस (Victor Ambros) और गैरी रुवकुन (Gary Ruvkun)


फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2024 का नोबेल पुरस्कार विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को माइक्रोआरएनए की खोज और पोस्ट-ट्रांसक्रिप्शनल जीन विनियमन में इसकी भूमिका के लिए दिया गया है।
इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार दो वैज्ञानिकों को जीन(Gene) गतिविधि को विनियमित(Regulate) करने के तरीके को नियंत्रित करने वाले एक मौलिक सिद्धांत की खोज के लिए सम्मानित करता है।

हमारे गुणसूत्रों में संग्रहीत जानकारी की तुलना हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं के लिए एक निर्देश पुस्तिका से की जा सकती है। ये निर्देश पुस्तिका कोशिका को निर्देश देती है कि उसकी संरचना कैसी हो, उसे क्या कार्य करना चाहिए, इत्यादी। प्रत्येक कोशिका में एक जैसे गुणसूत्र होते हैं, इसलिए प्रत्येक कोशिका में जीन का बिल्कुल समान सेट और उस कोशिका की कार्य प्रणाली के लिए निर्देशों का बिल्कुल समान सेट होता है। फिर भी, विभिन्न प्रकार कीकोशिका जैसे कि मांसपेशी और तंत्रिका कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली एक दूसरे से भिन्न होती है।। इन कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली में ये अंतर कैसे उत्पन्न होते हैं?

इसका उत्तर जीन द्वारा कोशिका कार्य के विनियमन (रेगुलेशन)/जीन विनियमन में निहित है, जो प्रत्येक कोशिका को केवल केवल उसके प्रकार से संबधित निर्देशों निर्देशों का चयन करने की अनुमति देता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक कोशिका प्रकार में केवल जीन का सही सेट सक्रिय हो। सरल शब्दों में जीन विनियमन तय करता है कि मांसपेशी संबधित कोशिका , मांशपेशी की संरचना और कार्य संबधित निर्देशों को की चुन कर सक्रीय करे!

विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन इस बात में रुचि रखते थे कि विभिन्न कोशिका प्रकार कैसे विकसित होते हैं। उन्होंने माइक्रोआरएनए(microRNA) की खोज की, जो छोटे आरएनए(RNA) अणुओं का एक नया वर्ग है जो जीन विनियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी अभूतपूर्व खोज ने जीन विनियमन के एक बिल्कुल नए सिद्धांत खोजा जो मनुष्यों सहित समस्त बहुकोशीय जीव की संरचना और जीवन के लिए आवश्यक है!। अब यह ज्ञात है कि मानव जीनोम में एक हज़ार से अधिक माइक्रोआरएनए (microRNA)के लिए निर्देश है। उनकी आश्चर्यजनक खोज ने जीन विनियमन के एक बिल्कुल नए आयाम का खुलासा किया। जीवों के विकास और कार्यप्रणाली के लिए माइक्रोआरएनए (microRNA) मूल रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। पढ़ना जारी रखें 2024 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : विक्टर एम्ब्रोस (Victor Ambros) और गैरी रुवकुन (Gary Ruvkun)

भूविज्ञानी : मैरी थार्प


मंगलवार, 30 जुलाई 2024 को मैरी थार्प की जयंती है, जो अपने समय की सबसे महान भूगर्भशास्त्रियों में से एक थीं। उस दिन उनकी उम्र 104 साल होती। आइए इस अवसर पर याद करें कि कैसे अन्याय की बाधाओं के बावजूद, उन्होंने धैर्यपूर्वक भूविज्ञान में हमारी कल्पना से परे क्रांति लाने के लिए अपनी यात्रा जारी रखी। पढ़ना जारी रखें भूविज्ञानी : मैरी थार्प

2022 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : स्वान्ते पाबो


वर्ष 2022 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कारों का ऐलान सोमवार 3 अक्टूबर 2022 को किया गया है। इस बार को यह पुरस्कार स्वान्ते पाबो को मिला है।

यह पुरस्कार उन्हे मानव नुमा(आदिमानव ) प्रजातियों के जीनोम तथा मानव प्रजाति के विकास पर खोज के लिए दिया गया है।

मानव जाती हमेशा अपने उद्गम के बारे में जानने के लिए उत्सुक रही है। हम कहाँ से आये है, हम अपने पहले आयी हुई प्रजातियों से किस तरह से संबधित है ? ऐसा क्या है जो हमने होमो सेपियंस बनाता है और अन्य आदिमानव प्रजातियों से अलग करता है ?

अपनी इस क्रांतिकारी शोध के दौरान स्वान्ते पाबो ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसे असंभव समझा जा रहा था। उन्होंने निएंडरथल के जीनोम की संरचना का मापन किया जोकि होमो सेपियंस के लुप्त पूर्वज या सम्बन्धी है। उन्होंने एक ऐसी आदिमानव प्रजाति भी खोज निकाली जिसे देनिसोवा कहते है। सबसे महत्वपूर्ण है कि पाबो ने पाया कि आज से 70,000 वर्ष पहले होमो सेपियंस ने अफ्रिका से बाहर की यात्रा आरम्भ की। मानव जींस के वर्तमान मानव तक के प्रवाह का अध्यन वर्त्तमान चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, इससे हम जान सकते है कि किस तरह से हम बाह्य संक्रमणों से लड़ने के लिए अपनी प्रतिरोध क्षमता को मजबूत कर सकते है।

पाबो की महत्वपूर्ण खोज ने विज्ञान की एक नई शाखा को जन्म दिया है जिसे पेलियोजिनोमिक्स (paleogenomics) कहते है। लुफ्त आदिमानवों के जीनोम और जीवित मानव प्रजाति के जीनोम के मध्य अंतर का अध्ययन कर हम जान सकते है कि ऐसा क्या है जो हमें “होमो सेपियंस” बनाता है। पढ़ना जारी रखें 2022 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : स्वान्ते पाबो