अलबर्ट आइंस्टाइन

अल्बर्ट आइन्स्टाइन (Albert Einstein) : 20 वी सदी के महानतम वैज्ञानिक


मानव इतिहास के जाने-माने वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टाइन (Albert Einstein) 20 वीं सदी के प्रारंभिक बीस वर्षों तक विश्व के विज्ञान जगत पर छाए रहे। अपनी खोजों के आधार पर उन्होंने अंतरिक्ष, समय और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत दिये। वे सापेक्षता के … पढ़ना जारी रखें अल्बर्ट आइन्स्टाइन (Albert Einstein) : 20 वी सदी के महानतम वैज्ञानिक

LIGO ने दूसरी बार गुरुत्वाकर्षण तरंग देखने मे सफ़लता पायी


वैज्ञानिको ने दूसरी बार गुरुत्वाकर्षण तरंगो को पकड़ने मे सफ़लता पायी है। गुरुत्वाकर्षण तरंगे काल-अंतराल(space-time) मे उत्पन्न हुयी लहरे है, ये लहरे दूर ब्रह्माण्ड मे किसी भीषण प्रलय़ंकारी घटना से उत्पन्न होती है। वैज्ञानिको ने पाया है कि ये तरंगे पृथ्वी … पढ़ना जारी रखें LIGO ने दूसरी बार गुरुत्वाकर्षण तरंग देखने मे सफ़लता पायी

समय विस्तारण: पृथ्वी केंद्रक की आयु सतह से 2.5 वर्ष कम


’नेचर’ पत्रिका मे प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार पृथ्वी के केंद्रक की आयु उसकी सतह की आयु से 2.5 वर्ष कम है। दोनो की आयु मे यह अंतर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से उत्पन्न समय विस्तारण(Time Dilation) से आया है। इस … पढ़ना जारी रखें समय विस्तारण: पृथ्वी केंद्रक की आयु सतह से 2.5 वर्ष कम

परमाणू संरचना

कण भौतिकी(Particle Physics) क्या है?


नई वैज्ञानिक खोजो के समाचार मे प्रोटान, इलेक्ट्रान, न्युट्रान, न्युट्रीनो तथा क्वार्क का नाम आते रहता है। ये सभी के परमाण्विक कणो के एक चिड़ीयाघर के सदस्य  है  और ये इतने सूक्ष्म है कि उन्हे सूक्ष्मदर्शी से देखा जाना भी संभव नही है। हम आम तौर पर अपने आसपास जो भी कुछ देखते है वे सभी अणुओ और परमाणुओं से बने है, लेकिन हमे परमाण्विक मूलभूत कणो के अध्ययन के लिये अणु और परमाणु के भीतर भी झांकना होता है जिससे हम ब्रह्माण्ड की प्रकृति को समझ सके । इस विज्ञान की इस शाखा के अध्ययन को कण भौतिकी(Particle Physics), मूलभूत कण भौतिकी( Elementary Particle Physics) या उच्च ऊर्जा भौतिकी(High Energy Physics (HEP)) कहा जाता है।

परमाणु की संकल्पना ग्रीक दार्शनिक डेमोक्रिट्स तथा भारतीय ऋषी कणाद ने सदियो पहले दी थी, पिछली सदी(20 वीं) के प्रारंभ तक इन्हे हर तरह के पदार्थ के निर्माण के लिये आवश्यक मूलभूत कण माना जाता रहा था। प्रोटान, न्युट्रान और इलेक्ट्रान के बारे मे हमारा ज्ञान रदरफोर्ड के प्रसिद्ध प्रयोग के पश्चात ही विकसित हुआ है, जिसमे हम पाया था कि परमाणु का अधिकतर भाग रिक्त होता है तथा इसके केंद्र मे प्रोटान और न्युट्रान से बना एक घना केंद्रक होता है और बाह्य लगभग रिक्त स्थान मे इलेक्ट्रान गतिमान रहते है।

परमाणू संरचना
परमाणू संरचना

कण भौतिकी विज्ञान को कण त्वरको ( particle accelerators) के अविष्कार के पश्चात तीव्र गति प्राप्त हुयी, जो कि प्रोटान या इलेक्ट्रान को अत्यंत तेज ऊर्जा देकर उन्हे ठोस परमाणु नाभिक से टकरा सकते है। इन टकरावों के परिणाम वैज्ञानिको के लिये आश्चर्यजनक थे, जब उन्होने इन टकरावो मे उत्पन्न ढेर सारे नये कणो को देखा।

1960 के दशक के प्रारंभ तक कण त्वरक कणों को अत्याधिक ऊर्जा देने मे सक्षम हो गये थे और इन टकरावो मे उन्होने 100 से ज्यादा नये कणो का निरीक्षण किया था। क्या ये सभी उत्पन्न कण मूलभूत है? वैज्ञानिक एक लंबी अवधि तक पिछली सदी के अंत तक संशय मे रहे। सैद्धांतिक अध्ययन और प्रयोगों कि एक लंबी श्रॄंखला के पश्चात ज्ञात हुआ कि इन मूलभूत कणो के दो वर्ग है जिन्हे क्वार्क(quark) और लेप्टान(lepton) कहा गया। लेप्टान कणो के उदाहरण इलेक्ट्रान(electron) , न्युट्रीनो(neutrino)) है।  इनके साथ मूलभूत बलों(fundamental forces) का एक समूह है जो इन कणो से प्रतिक्रिया करता है।  ये मूलभूत बल भी ऊर्जा का संवहन विशेष तरह के कणो की पारस्परिक अदलाबदली से करते है जिन्हे गाज बोसान(gauge bosons) कहते है। इसका एक उदाहरण फोटान है जोकि प्रकाशऊर्जा  का पैकेट है और विद्युत-चुंबकिय बल (electromagnetic force)का संवहन करता है। पढ़ना जारी रखें “कण भौतिकी(Particle Physics) क्या है?”

गुरुत्विय तरंगो की खोज: महाविस्फोट(Big Bang), ब्रह्मांडीय स्फिति(Cosmic Inflation), साधारण सापेक्षतावाद की पुष्टि


Update :BICEP2 के प्रयोग के आंकड़ो मे त्रुटि पायी गयी थी। इस प्रयोग के परिणामो को सही नही माना जाता है।

fabric_of_space_warp
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा सूर्य के आसपास उसके गुरुत्वाकर्षण द्वारा काल-अंतराल(space-time) मे लाये जाने वाली वक्रता के फलस्वरूप करती है। मान लिजीये यदि किसी तरह से सूर्य को उसके स्थान से हटा लिया जाता है तब पृथ्वी पर सूर्य की (या सूर्य के गुरुत्वाकर्षण)अनुपस्थिति का प्रभाव पडने मे कितना समय लगेगा ? यह तत्काल होगा या इसमे कुछ विलंब होगा ? सूर्य के पृथ्वी तक प्रकाश 8 मिनट मे पहुंचता है, सूर्य की अनुपस्थिति मे पृथ्वी पर अंधेरा होने मे तो निश्चय ही 8 मिनट लगेंगे, लेकिन गुरुत्विय अनुपस्थिति के प्रभाव मे कितना समय लगेगा ? यदि हम न्युटन के सिद्धांतो को माने तो यह प्रभाव तत्काल ही होगा लेकिन आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के अनुसार यह तत्काल नही होगा क्योंकि गुरुत्वाकर्षण भी तरंगो के रूप मे यात्रा करता है। इस लेख मे हम इसी गुरुत्विय तरंगो की चर्चा करेंगे।

हमारे पास ऐसा कोई उपाय नही है जिससे हम यह जान सके कि आज से लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले ब्रह्माण्ड के जन्म के समय क्या हुआ था। लेकिन वैज्ञानिको ने सोमवार 17 मार्च 2014 महाविस्फोट अर्थात बीग बैंग सिद्धांत को मजबूत आधार देने वाली नयी खोज की घोषणा की है। यदि यह खोज सभी जांच पड़ताल से सही पायी जाती है तो हम जान जायेंगे कि ब्रह्मांड एक सेकंड के खरबवें हिस्से से भी कम समय मे कैसे अस्तित्व मे आया।
कैलीफोर्नीया इंस्टीट्युट आफ टेक्नालाजी के भौतिक वैज्ञानिक सीन कैरोल कहते है कि

“यह खोज हमे बताती है कि ब्रह्माण्ड का जन्म कैसे हुआ था। मानव जाति जिसका आधुनिक विज्ञान कुछ सौ वर्ष ही पूराना है लेकिन वह अरबो वर्ष पहले हुयी एक घटना जिसने ब्रह्माण्ड को जन्म दिया को समझने के समिप है, यह एक विस्मयकारी उपलब्धि है”।

वैज्ञानिको ने पहली बार आइंस्टाइन द्वारा साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत मे प्रस्तावित गुरुत्विय तरंगो के अस्तित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण पाया है। गुरुत्विय तरंगे काल-अंतराल(space-time) मे उठने वाली ऐसी लहरे है जो महाविस्फोट से उत्पन्न सर्वप्रथम थरथराहट है।
पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित दूरदर्शी जिसका नाम BICEP2 — Background Imaging of Cosmic Extragalactic Polarization 2 है, इस खोज मे सबसे महत्वपूर्ण साबित हुयी है। इस दूरबीन ने महाविस्फोट से उत्पन्न प्रकाश के ध्रुवीकरण(polarization) को विश्लेषित करने मे प्रमुख भूमिका निभायी है, जिसके फलस्वरूप वैज्ञानिक यह महत्वपूर्ण खोज कर पाये हैं। पढ़ना जारी रखें “गुरुत्विय तरंगो की खोज: महाविस्फोट(Big Bang), ब्रह्मांडीय स्फिति(Cosmic Inflation), साधारण सापेक्षतावाद की पुष्टि”

विज्ञान विश्व को चुनौती देते 20 प्रश्न


1 ब्रह्मांड किससे निर्मित है?

dmdeखगोल वैज्ञानिकों के सामने एक अनसुलझी पहेली है जो उन्हे शर्मिन्दा कर देती है। वे ब्रह्मांड के 95% भाग के बारे मे कुछ नहीं जानते है। परमाणु, जिनसे हम और हमारे इर्द गिर्द की हर वस्तु निर्मित है, ब्रह्मांड का केवल 5% ही है! पिछले 80 वर्षों की खोज से हम इस परिणाम पर पहुँचे हैं कि ब्रह्मांड का 95% भाग रहस्यमय श्याम ऊर्जा और श्याम पदार्थ से बना है। श्याम पदार्थ को 1933 मे खोजा गया था जो कि आकाशगंगा और आकाशगंगा समूहों को एक अदृश्य गोंद के रूप मे बाँधे रखे है।। 1998 मे खोजीं गयी श्याम ऊर्जा ब्रह्मांड के विस्तार गति मे त्वरण के लिये उत्तरदायी है। लेकिन वैज्ञानिकों के सामने इन दोनो की वास्तविक पहचान अभी तक एक रहस्य है!

2 जीवन कैसे प्रारंभ हुआ?

originoflifeचार अरब वर्ष पहले किसी अज्ञात कारक ने मौलिक आदिम द्रव्य(Premordial Soup) मे एक हलचल उत्पन्न की। कुछ सरल से रसायन एक दूसरे से मील गये और जीवन का आधार बनाया। ये अणु अपनी प्रतिकृति बनाने मे सक्षम थे। हमारा और समस्त जीवन इन्हीं अणुओं के विकास से उत्पन्न हुआ है। लेकिन ये सरल मूलभूत रसायन कैसे, किस प्रक्रिया से इस तरह जमा हुये कि उन्होंने जीवन को जन्म दिया? डी एन ए कैसे बना? सबसे पहली कोशीका कैसी थी? स्टेनली-मिलर के प्रयोग के 50 वर्ष बाद भी वैज्ञानिक एकमत नहीं है कि जीवन का प्रारंभ कैसे हुआ? कुछ कहते है कि यह धूमकेतुओ से आया, कुछ के अनुसार यह ज्वालामुखी के पास के जलाशयों मे प्रारंभ हुआ, कुछ के अनुसार वह समुद्र मे उल्कापात से प्रारभ हुआ। लेकिन सही उत्तर क्या है?

पढ़ना जारी रखें “विज्ञान विश्व को चुनौती देते 20 प्रश्न”