विकिरण(Radiation) क्या होता है?


विकिरण (Radition)
यह शब्द आजकल भयावहता उत्पन्न करता है। जब भी हम इस शब्द को सुनते है, हमारी आंखो के सामने कैंसर के मरीज, हिरोसीमा और नागासाकी के परमाणु बम द्वारा उत्पन्न विध्वंस आ जाता है।

आधुनिक मीडीया भी हमारे इस भय को बढाने का काम करता है। ज्यादा दिन नही गुजरे है जब जापान मे आयी सुनामी के कारण फुकुशीमा परमाणु संयंत्र दुर्घटना से उत्पन्न विकिरण से पुरे विश्व मे भय उत्पन्न हो गया था। हाल ही मे एक विवादास्पद शोध द्वारा मोबाईल फोन द्वारा कैंसर उत्पन्न किये जाने के समाचार ने भय को बढ़ावा दिया था!

विकिरण होता क्या है ?

वैज्ञानिक परिभाषा के अनुसार:

विकिरण ऊर्जा का वह प्रकार है जो अंतराल मे यात्रा करते समय तरंग जैसा व्यवहार करता है।

इस परिभाषा के अंतर्गत विकिरण मे साधारण दृश्य प्रकाश किरणे, अवरक्त प्रकाश(टी वी के रीमोट से उत्सर्जित) किरणे, रेडीयो तरंग(मोबाईल, रेडीयो, टीवी द्वारा प्रयुक्त), पराबैंगनी किरणे, एक्स रे आ जाती है। पढ़ना जारी रखें “विकिरण(Radiation) क्या होता है?”

नाभिकिय विकिरण कब हानीकारक होता है ?: कुछ तथ्य


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जापानी नाभिकिय दुर्घटना : तथ्यो का अभाव और समाचारो की बाढ़


11 मार्च 2011 को जापान मे आये रिक्टर स्केल पर 9.0 के भूकंप और भूकंप से उत्पन्न सुनामी से हुयी जान माल की हानी से सम्पूर्ण मानव जाति दुखी है। मानवता को हुयी इस क्षति के लिये ये दो कारक भूकंप और सूनामी काफी नही थे कि एक तीसरा संकट आ खड़ा हुआ। जापान के फुकुशीमा के नाभिकिय संयंत्र से नाभिकिय विकिरण का संकट पैदा हो गया है।

नाभिकिय संयंत्र की कार्यप्रणाली
नाभिकिय संयंत्र की कार्यप्रणाली

40 वर्ष पूराने फुकुशीमा के दायची नाभिकिय संयंत्र मे आयी इस गड़बड़ी का कारण वैकल्पिक सुरक्षा जनरेटर का काम ना करना है। यह वैकल्पिक सुरक्षा जनरेटर नाभिकिय संयंत्र को उसके काम ना करने की स्थिति मे ठंडा रखते है। ठंडा रखने का यह कार्य किसी शीतक को संयंत्र मे पंप कर किया जाता है, यह शीतक पानी भी हो सकता है। सामान्य स्थिति मे नाभिकिय संयत्र से उत्पन्न विद्युत ही उसे ठंडा करने के कार्य मे उपयोग की जाती है लेकिन रखरखाव के समय जब नाभिकिय संयत्र को बंद किया जाता है तब यह वैकल्पिक जनरेटर से उत्पन्न विद्युत ही संयत्र को ठंडा करने के कार्य मे उपयोग की जाती है। इन्ही वैकल्पिक सुरक्षा जनरेटरो को रखरखाव के अतिरिक्त आपातकालीन स्थिति मे प्रयोग किया जाता है। पढ़ना जारी रखें “जापानी नाभिकिय दुर्घटना : तथ्यो का अभाव और समाचारो की बाढ़”

क्या सौर मंडल मे बृहस्पति से चार गुणा बड़े ग्रह की खोज हो गयी है ?


सौर मंडल

नही ! अभी तक सौर मंडल मे बृहस्पति से बड़े ग्रह की खोज के कोई पुख्ता प्रमाण नही मीले है।

नेपच्युन के बाद दसंवे ग्रह की खोज का प्रयास शताब्दियो से जारी है। सामान्यतः किसी अज्ञात ग्रह की खोज ज्ञात पिंडो के आसामान्य व्यवहार से प्रारंभ होती है। जब खगोल विज्ञानी किसी ज्ञात ग्रह या धूमकेतुओ के समूह को न्युटन के गति के नियमो का पालन न करते हुये असामान्य गति करते देखते है तब वे किसी अज्ञात भारी पिंड द्वारा अपने गुरुत्व से उस ग्रह/पिंड  को प्रभावित करने का सिद्धांत आगे कर देते है। इसके बाद सभी खगोलिय दूरबीने उस पिंड की खोज मे लग जाती है।

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क्या मोबाईल फोन से कैंसर हो सकता है ?


मानव मन को चिंतित होने के लिये बस एक कारण चाहिये होता है। समस्या यह है कि चिंता करने के इन कारणो के अनगिनत श्रोत है और हम ऐसे कारणो से चिंतित होते रहते है जो कि चिंता का कोई कारण ही नही होते।
अतंरजाल पर , अखबारो मे ऐसा ही एक कारण आते रहता है कि मोबाईल फोन से कैंसर हो सकता है। शोध के बाद शोध और ऐसी अनगिनत शोधो के बाद भी कैंसर और मोबाईल फोन के बीच मे कोई रिश्ता नही पाया गया है। लेकिन लोगो की चिंता जारी है !

देखते है कि विशेषज्ञ क्या राय रखते है।  पढ़ना जारी रखें “क्या मोबाईल फोन से कैंसर हो सकता है ?”