सापेक्षतावाद : विशेष एवं सामान्य सापेक्षतावाद के प्रयोगात्मक प्रमाण


सापेक्षतावाद के सिद्धांतों ने हमें ब्रह्मांड के व्यवहार को समझने और आधुनिक तकनीक में अनुप्रयोग करने का मार्ग दिखाया है।

विशेष सापेक्षतावाद के प्रमुख प्रायोगिक प्रमाण

विशेष सापेक्षतावाद (Special Theory of Relativity) आधुनिक भौतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे 1905 में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रस्तुत किया। यह सिद्धांत मुख्य रूप से उच्च वेग (प्रकाश के वेग के समीप) से गतिमान वस्तुओं के व्यवहार का वर्णन करता है। इस सिद्धांत के दो मुख्य सिद्धांत हैं:

भौतिकी के नियम सभी जड़त्वीय संदर्भ तंत्रों में समान होते हैं।

निर्वात में प्रकाश का वेग सभी प्रेक्षकों के लिए समान रहता है।

यह सिद्धांत केवल गणितीय नहीं है, बल्कि अनेक प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया जा चुका है। इन प्रयोगों ने समय प्रसार (Time Dilation), लंबाई संकुचन (Length Contraction), और द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध जैसे प्रभावों की पुष्टि की है। पढ़ना जारी रखें सापेक्षतावाद : विशेष एवं सामान्य सापेक्षतावाद के प्रयोगात्मक प्रमाण

सापेक्षतावाद : सामान्य सापेक्षतावाद


विशेष सापेक्षतावाद ने समय, स्थान और गति के संबंध को समझने में क्रांति ला दी थी। लेकिन यह केवल गति करते हुए अवलोकनकर्ताओं के लिए लागू होता था और गुरुत्वाकर्षण का समावेश नहीं करता था। 1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसे और आगे बढ़ाया और प्रस्तुत किया सामान्य सापेक्षतावाद (General Relativity), जो गुरुत्वाकर्षण और स्पेसटाइम की गहराई तक संबंध समझाता है।

विशेष सापेक्षतावाद के बाद सामान्य सापेक्षतावाद की आवश्यकता क्यों पड़ी?

विशेष सापेक्षतावाद (1905) यह मानकर चलता है कि
1. सभी संदर्भ फ्रेम जड़त्वीय (inertial) हैं
2. गति समान वेग से हो रही है
3. गुरुत्वाकर्षण का इसमें कोई स्थान नहीं है

यह सिद्धांत प्रकाश की गति, समय फैलाव, लंबाई संकुचन, द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता आदि को बहुत सुंदर ढंग से समझाता है, लेकिन इसमें कुछ मूलभूत सीमाएँ थीं पढ़ना जारी रखें सापेक्षतावाद : सामान्य सापेक्षतावाद

कण त्वरण का एनीमेशन

15 सरल क्वांटम भौतिकी : कण त्वरक(Particle Acclerator) कणो को गति कैसे देते है?


कणो के साथ प्रयोग कैसे किये जाते है ?

कण त्वरक भौतिक वैज्ञानिको की दो समस्यायें हल करते है।

  • प्रथम:  सभी कण तरंग की तरह व्यवहार करते है, वैज्ञानिक कणों से संवेग मे वृद्धि कर उनके तरंगदैर्ध्य(Wavelength) को इतना कम करते है कि उनसे परमाणु के अंदर देखा जा सके।
  • द्वितीय:  इन गतिमान कणो की ऊर्जा से वैज्ञानिक अध्यन के लिये अस्थायी भारी कणो का निर्माण करते हैं।

कण त्वरक कैसे कार्य करते है।

आधारभूत रूप पर एक कण त्वरक एक कण को विद्युत चुंबकिय क्षेत्र से गति प्रदान करता है और उस कण को लक्ष्य या किसी अन्य कण से टकराता है। इस टकराव के आसमाप जांच यंत्र लगे होते है जो इस घटना का विवरण दर्ज करतें है।

clip_image003प्रश्न: आप के सबसे पास का कण त्वरक कौनसा है ?
टीवी या आपके कंप्युटर का मानीटर (एल सी डी/ या प्लाज्मा वाले नही!)
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