संख्याओं से तारों तक: मेसोपोटामिया की अमर ज्ञान-यात्रा


रात का समय था। आकाश में तारे ऐसे चमक रहे थे मानो किसी प्राचीन कथा के मौन साक्षी हों। थोड़ी देर पहले बारिश हुई थी और अब मौसम साफ़ हो गया था। छत पर हल्की ठंडी हवा बह रही थी और मिट्टी की सोंधी गंध वातावरण को शांत और गूढ़ बना रही थी। छत पर कुर्सियों पर बैठे दोनों बच्चे गार्गी और अनुषा मेरी ओर उत्सुक आँखों से देख रहे थे। मेरे चेहरे पर एक गहरी, अनुभवी मुस्कान थी, जैसे मैं बस अभी समय के पार झाँक कर लौटा हूँ।

मैंने धीरे से कहा “आज मैं तुम्हें एक ऐसी कहानी सुनाऊँगा, जो सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के ज्ञान की जड़ से उपजी गाथा है मेसोपोटामिया की गाथा।”

गार्गी ने आश्चर्य से पूछा, “मेसोपोटामिया क्या होता है, पापा ?”

मैंने आकाश की ओर इशारा किया, जैसे तारों से संवाद कर रहा हूँ, “मेसोपोटामिया का अर्थ है, ‘दो नदियों के बीच की भूमि’। बहुत समय पहले, जब दुनिया आज जैसी नहीं थी, दो महान नदियों टाइग्रिस(दजला ) और यूफ्रेट्स(फ़रात ) के बीच एक भूमि थी, उसी भूमि को मेसोपोटामिया कहा गया। यही वह जगह थी जहाँ मानव ने पहली बार संगठित रूप से सोचना, गिनना, मापना और आकाश को समझना शुरू किया।”

प्राचीन मेसोपोटामिया की भूमि टाइग्रिस(दजला ) और यूफ्रेट्स(फ़रात ) नदियों के बीच फैली उपजाऊ धरती मानव सभ्यता के सबसे आरंभिक ज्ञान-केंद्रों में से एक थी। इसी क्षेत्र में सुमेरिया, बेबीलोन और असीरिया जैसी महान सभ्यताएँ विकसित हुईं। इन सभ्यताओं ने न केवल नगरों, प्रशासन और व्यापार को जन्म दिया, बल्कि गणित और विज्ञान की ऐसी नींव रखी जिसने आने वाले हजारों वर्षों तक मानव ज्ञान को दिशा दी। वर्त्तमान सन्दर्भ में मेसोपोटामिया का अधिकांश भाग आधुनिक इराक, सीरिया के उत्तर-पूर्वी और पूर्वी हिस्से, दक्षिण-पूर्वी तुर्की के कुछ भाग तथा कुवैत और ईरान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र (जैसे खुज़ेस्तान प्रांत) में आता है।

अब कल्पना कीजिए लगभग 4000 वर्ष पूर्व की एक सुबह। सूर्य धीरे-धीरे उग रहा है, और यूफ्रेट्स नदी के किनारे एक युवा शिष्य अपने गुरु के साथ मिट्टी की तख्ती पर कुछ चिन्ह उकेर रहा है। यही वह क्षण है जहाँ से हमारी कथा आरंभ होती है, ज्ञान की उस यात्रा की, जिसने संख्याओं, तारों और प्रकृति के रहस्यों को समझने का मार्ग प्रशस्त किया।

अनुषा ने उत्साह से कहा “क्या वहाँ के लोग बहुत बुद्धिमान थे?” मैंने सिर हिलाते हुए कहा “हाँ, वे अत्यंत जिज्ञासु और रचनात्मक थे। और सुमेर नाम की एक प्राचीन सभ्यता से इस कहानी की शुरुआत होती है।”

मैंने थोड़ा रुककर कहानी को और गहराई दी “सुमेर के लोग केवल किसान या व्यापारी नहीं थे, वे विचारक थे। उन्होंने सबसे पहले लेखन की एक प्रणाली विकसित की जिसे कीलाक्षर लिपि कहा गया। मिट्टी की तख्तियों पर वे चिन्ह बनाकर अपने विचार और गणनाएँ लिखते थे। सोचो, उस समय कागज नहीं था, फिर भी वे गणित के जटिल प्रश्न हल कर रहे थे।” पढ़ना जारी रखें संख्याओं से तारों तक: मेसोपोटामिया की अमर ज्ञान-यात्रा

सभ्यताओं का उदय: जब खगोलविज्ञान और ज्यामिति ने आकार लिया


संध्या का समय था। घर की छत पर अपनी दूरबीन स्थापित कर रहा था। छत पर मेरे साथ और अनुषा इस सारी प्रक्रिया को देख रहे थे। आकाश साफ़ था, तारे धीरे धीरे चमकने लगे थे, चन्द्रमा भी क्षितिज में ऊपर आ रहा था।

गार्गी : “पापा, ये तारे कैसे बने?”
अनुषा : “और लोग पहले बिना घड़ी के समय कैसे जानते थे?”

मै अपनी दूरबीन को स्थापित कर चूका था, जानता था कि ये सारे प्रश्न आने ही वाले है।

मै : “तुम्हारे प्रश्न ही विज्ञान की शुरुआत हैं, क्या तुम समय की यात्रा कर विज्ञान की कहानी देखना चाहोगे?”

दोनों बच्चे उत्साह से उछल पड़े “हाँ!”

मैने एक चित्रों वाली एक पुस्तक खोली और अचानक चारों ओर प्रकाश फैल गया।

पुस्तक में एक चमकीले तारे का चित्र था। उस चित्र को बच्चों को दिखाया और पूछा इस तारें को जानते हो ?

दोनों समवेत स्वर में बोले, “नहीं!”

यह सिरिअस तारा है, और अपनी दूरबीन को आसमान में उस तारे की और घुमा दिया। इस तारे को अब दूरबीन से देखो और बताओ कि इसमें क्या विशेषता है ?

गार्गी : ये नीले रंग का तारा है।
अनुषा : ये बाकी तारों से अधिक चमकीला तारा है।

बिलकुल सही पहचाना। क्या तुम जानते हो कि यह तारा प्राचीन मानव सभ्यताओं को भी ज्ञात था, लगभग सारी सभ्यताओं ने इसे कोई ना कोई नाम दिया था। प्राचीन मिस्र में इस तारे को ‘सोपडेट’ कहा जाता था, यूनानी इसे ‘डॉग स्टार’ कहते थे जबकि भारत में इसे ‘मृगव्याध’ या ‘लुब्धक’ कहा गया। प्राचीन चीन में इस तारे को ‘स्वर्गीय भेड़िया’ (Heavenly Wolf) कहा जाता था।

अब एक रहस्य सुनो अफ्रिका के माली में एक जनजाति रहती है, ‘डोगन (Dogon)’ उनका दावा था कि सिरिअस के साथ एक अदृश्य साथी तारा भी है। आधुनिक विज्ञान ने बाद में सीरिअस B की खोज की लेकिन डोगोन जनजाति को इसका ज्ञान पहले से था। यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है कि उन्हें यह जानकारी कैसे मिली।”

जब अगली बार तुम रात में सिरिअस को देखो तो उसे केवल एक साधारण तारा मत समझना, वह हजारों वर्षों की मानव सभ्यता की कहानी है।

क्या तुम तारे के महत्त्व के बारे में और जानना चाहोगे ?

गार्गी : “बिलकुल जानना चाहेंगे!”

चलो हम समय यात्रा कर प्राचीन मिस्र में चलते है, जहाँ नील नदी किनारे एक बड़ी समस्या पर चर्चा हो रही है। पढ़ना जारी रखें सभ्यताओं का उदय: जब खगोलविज्ञान और ज्यामिति ने आकार लिया

विज्ञान यात्रा : शून्य से अनंत की ओर


कल्पना कीजिए एक अंधेरी रात में

मिश्र में नील के किनारे एक मिस्री पुजारी।

गंगा के तट पर एक यज्ञ के लिए वेदी निर्माण की योजना बनाता ऋषि।

बीजिंग में एक खगोल अधिकारी।

माया पिरामिड पर खड़ा एक विद्वान।

एथेंस में प्लेटो का शिष्य।

ये सभी आकाश देख रहे हैं। वे एक दूसरे को नहीं जानते, उन्हें एक-दूसरे के बारे में पता नहीं। पर वे एक ही काम कर रहे हैं, समय को पकड़ने की कोशिश।

आप प्राचीन मिस्र में हैं। आपके सामने रेगिस्तान फैला है और  दूर बह रही है एक नदी, नील।

हर वर्ष नील उफनती है, बाढ़ आती है। सारे खेत डूब जाते है। सारी सीमाएँ मिट जातीं है। लेकिन नील वरदान दे जाती है , जब पानी उतरता तो भूमि उर्वर हो जाती।

पर समस्या यह थी, सीमाएँ कहाँ थीं? खेत किसका था?

यहीं से गणित की शुरुआत हुई। मिस्र के “रस्सी खींचने वाले” (rope stretchers) लोग लंबी गांठदार रस्सियों से भूमि नापते। वे समकोण बनाते, त्रिभुज बनाते, क्षेत्रफल निकालते। उन्हें पता था, यदि एक त्रिभुज में भुजाओं का अनुपात 3:4:5 हो, तो वह समकोण त्रिभुज है।

आज हम इसे इस रूप में जानते हैं: a2 + b2 = c2

यह सूत्र बाद में यूनान में प्रसिद्ध हुआ, लेकिन मिस्र और भारत में इसका व्यावहारिक उपयोग पहले से ज्ञात था।

यह केवल ज्यामिति नहीं थी। यह कृषि, कर-व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था का आधार था।

इन मिस्री पुजारियों के सामने एक और जीवन मरण का प्रश्न था, कि नील  कब बहेगी? पढ़ना जारी रखें विज्ञान यात्रा : शून्य से अनंत की ओर