विज्ञान यात्रा : शून्य से अनंत की ओर


कल्पना कीजिए एक अंधेरी रात में

मिश्र में नील के किनारे एक मिस्री पुजारी।

गंगा के तट पर एक यज्ञ के लिए वेदी निर्माण की योजना बनाता ऋषि।

बीजिंग में एक खगोल अधिकारी।

माया पिरामिड पर खड़ा एक विद्वान।

एथेंस में प्लेटो का शिष्य।

ये सभी आकाश देख रहे हैं। वे एक दूसरे को नहीं जानते, उन्हें एक-दूसरे के बारे में पता नहीं। पर वे एक ही काम कर रहे हैं, समय को पकड़ने की कोशिश।

आप प्राचीन मिस्र में हैं। आपके सामने रेगिस्तान फैला है और  दूर बह रही है एक नदी, नील।

हर वर्ष नील उफनती है, बाढ़ आती है। सारे खेत डूब जाते है। सारी सीमाएँ मिट जातीं है। लेकिन नील वरदान दे जाती है , जब पानी उतरता तो भूमि उर्वर हो जाती।

पर समस्या यह थी, सीमाएँ कहाँ थीं? खेत किसका था?

यहीं से गणित की शुरुआत हुई। मिस्र के “रस्सी खींचने वाले” (rope stretchers) लोग लंबी गांठदार रस्सियों से भूमि नापते। वे समकोण बनाते, त्रिभुज बनाते, क्षेत्रफल निकालते। उन्हें पता था, यदि एक त्रिभुज में भुजाओं का अनुपात 3:4:5 हो, तो वह समकोण त्रिभुज है।

आज हम इसे इस रूप में जानते हैं: a2 + b2 = c2

यह सूत्र बाद में यूनान में प्रसिद्ध हुआ, लेकिन मिस्र और भारत में इसका व्यावहारिक उपयोग पहले से ज्ञात था।

यह केवल ज्यामिति नहीं थी। यह कृषि, कर-व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था का आधार था।

इन मिस्री पुजारियों के सामने एक और जीवन मरण का प्रश्न था, कि नील  कब बहेगी? पढ़ना जारी रखें विज्ञान यात्रा : शून्य से अनंत की ओर

लुब्धक तारा अर्थात सिरिअस तारा


लुब्धक तारा(Sirius) रात्री आकाश मे सबसे ज्यादा चमकदार तारा है। यह सूर्य के सबसे समीप के तारों मे से एक है, इसकी दूरी 9 प्रकाशवर्ष है। सौर मंडल से दूरी मे इसका स्थान सांतवां है। रात्री आकाश मे इसे खोजना … पढ़ना जारी रखें लुब्धक तारा अर्थात सिरिअस तारा