क्या रूसी वैज्ञानिको ने एलियन सभ्यता के संकेत ग्रहण किये है ?


30 अगस्त 2016 से इंटरनेट (भारतीय मिडीया भी) मे सेती(SETI- “Search for Extraterrestrial Intelligence”) द्वारा एलीयन सभ्यता के संकेत पाये जाने के समाचार आ रहे है। लेकिन वैज्ञानिक इन समाचारो पर अभी तक सहमत नही है।

HD 164595 नामक सूर्य के जैसे तारे से रूसी खगोल वैज्ञानिक द्वारा ’कृत्रिम’ रेडियो संकेत पाये गये है। यह तारा हमसे 94 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है, खगोलिय पैमाने पर यह तारा हमारे पास मे ही है। इस तारे के पास नेपच्युन के आकार के ग्रह की उपस्थिति के स्पष्ट प्रमाण है।

मिडीया इन समाचार से उछल गया है और उन्होने एलियन सभ्यता की खोज की घोषणा कर दी है। उनके अनुसार सेती अंतरिक्ष से आये एक परग्रही रेडियो संकेतो की जांच कर रहा है। लेकिन दूसरी ओर वैज्ञानिक अभी सशंकित है, उनके अनुसार यदि यह किसी एलियन सभ्यता से उत्सर्जित रेडियो संकेत है तो वह सभ्यता काफ़ी उन्नत सभ्यता होगी। वे उस सभ्यता को कार्दाशेव पैमाने पर वर्ग II मे रख रहे है। लेकिन उनके अनुसार यह सब अभी दूर की कौड़ी है। पढ़ना जारी रखें क्या रूसी वैज्ञानिको ने एलियन सभ्यता के संकेत ग्रहण किये है ?

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 09 : उड़नतश्तरीयां


१९५२ मे न्युजर्सी स रा अमरीका मे दिखायी दी कथित उड़नतश्तरी का चित्र
1952 मे न्युजर्सी स रा अमरीका मे दिखायी दी कथित उड़नतश्तरी का चित्र

कुछ लोगो का विश्वास है कि परग्रही प्राणी उड़नतश्तरीयो से पृथ्वी की यात्रा कर चूके है। वैज्ञानिक सामान्यतः उड़नतश्तरी के समाचारो पर विश्वास नही करते है और तारो के मध्य की विशाल दूरी के कारण इसकी संभावना को रद्द कर देते है। वैज्ञानिको इस ठंडी प्रतिक्रिया के बावजूद उड़नतश्तरी दिखने के समाचार कम नही हुये है।

उड़नतश्तरीयो के देखे जाने के दावे लिखित इतिहास की शुरुवात तक जाते है। बाईबल मे ईश्वर के दूत इजेकील ने रहस्यमय ढंग से आकाश मे ’चक्र के अंदर चक्र’ का उल्लेख किया है जिसे कुछ लोग उड़नतश्तरी मानते है। 1450 ईसा पूर्व मिश्र के फराओ टूटमोस तृतिय के काल मे मिश्री(इजिप्त) इतिहासकारो ने आकाश मे 5 मीटर आकार के ’आग के वृत’ का उल्लेख किया है जो सूर्य से ज्यादा चमकदार थे और काफी दिनो तक आकाश मे दिखायी देते रहे तथा अंत मे आकाश मे चले गये। ईसापूर्व 91 मे रोमन लेखक जूलियस आब्सक्युन्स ने एक ग्लोब के जैसे गोलाकार पिंड के बारे मे लिखा है आकाशमार्ग से गया था। 1234 मे जनरल योरीतसुमे और उसकी सेना ने क्योटो जापान के आकाश मे रोशनी के गोलो को आकाश मे देखा था। १५५६ मे नुरेमबर्ग जर्मनी मे आकाश मे किसी युद्ध के जैसे बहुत सारे विचित्र पिंडो को देखा था। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 09 : उड़नतश्तरीयां”

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 08 : परग्रही सभ्यता मे वैज्ञानिक विकास : परग्रही जीवन श्रंखला भाग 08


यदि हम मानव इतिहास के पिछले 100,000 वर्षो मे विज्ञान के विकास पर दृष्टिपात करे तो हम पायेंगे कि यह अफ्रिका मे मानव के जन्म से लेकर अब तक यह उर्जा की खपत मे बढो़त्तरी का इतिहास है। रशियन खगोल विज्ञानी निकोलाइ कार्दाशेव के अनुसार सभ्यता के विकास के विभिन्न चरणो को ऊर्जा की खपत के अनुसार श्रेणीबद्ध लिया जा सकता है। इन चरणो के आधार पर परग्रही सभ्यताओं का वर्गीकरण किया जा सकता है। भौतिकी के नियमो के अनुसार उन्होने संभव सभ्यताओं को तीन प्रकार मे बांटा। 1 पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 08 : परग्रही सभ्यता मे वैज्ञानिक विकास : परग्रही जीवन श्रंखला भाग 08”

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 07 : अनुपात का सिद्धांत और दानवाकार प्राणी


किग कान्गहॉलीवुड की फिल्मो मे कुछ जीवो को विशालकाय दिखाया जाता है जैसे किंग कांग या गोड्जीला। इसी तरह परग्रही जीवो को भी कभी कभी विशालकाय मान लीया जाता है। लेकिन किसी भी जीव के आकार की एक सीमा होती है, वह उससे ज्यादा विशाल नही हो सकता। यदि किंग कांग सचमुच मे होता तब वह न्युयार्क को आतंकित नही कर पाता। इसके विपरित उसके पहले कदम के साथ ही उसकी टांगे टूट जाती। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 07 : अनुपात का सिद्धांत और दानवाकार प्राणी”

परग्रही (चित्रकार की कल्पना)

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 06 : वे कैसे दिखते होंगे ?


परग्रही (चित्रकार की कल्पना)
परग्रही (चित्रकार की कल्पना)

हमारे मन में परग्रही के आकार-प्रकार की जो भी कल्पना है वह हालीवुड की फिल्मो से है। विभिन्न हालीवुड की फिल्मे जैसे एम आई बी,  एलीयन,  स्पीसीज इत्यादि मे अधिकतर परग्रहीयो को मानव के जैसे आकार में या कीड़े मकोड़ों के जैसे दर्शाया है। इन फिल्मो को देखकर हमारे मन में परग्रहीयो का वही रूप बस गया है।

परग्रही जीवन की सममिती

वैज्ञानिकों ने भौतिकी, जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान के नियमों का प्रयोग कर यह अनुमान लगाने का प्रयास किया है कि परग्रही जीव कैसे दिखते होंगे। न्युटन को आश्चर्य होता था कि वह अपने आसपास जितने भी प्राणी देखते है सभी के सभी द्विपक्षीय सममिति वाले है, दो आंखें, दो हाथ और दो पैर एक सममिति में ! यह संयोगवश है या भगवान की कृति ? पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 06 : वे कैसे दिखते होंगे ?”

परग्रही जीवन श्रंखला भाग 05 : पृथ्वी जैसे सौर बाह्य ग्रह की खोज


परग्रही जीवन की खोज के लिये प्रस्तावित ड्रेक का समिकरण पूरी तरह से परिकल्पित(Hypothetical) है। यह समिकरण एक संभावना ही दर्शाता है जो कि वास्तविकता भी हो सकती है। दूसरी ओर सेटी प्रोजेक्ट अंतरिक्ष मे जीवन की खोज बेतरतीब रूप से कर रहा है। परग्रही जीवन की खोज का एक उपाय सौर मंडल के बाहर पृथ्वी जैसे ग्रहो की खोज कर उन पर सेटी का ध्यान केन्द्रित करना होगा।

हाल ही मे अंतरिक्ष मे जीवन की खोज को सौर मंडल के बाहर ग्रहो की खोज  से मजबूती मीली है। सौरमंडल बाह्य ग्रहो की खोज के पिछे एक परेशानी यह है कि ये ग्रह स्वयं  प्रकाश उत्सर्जित नही करते है जिससे उन्हे किसी दूरबीन से नही देखा जा सकता। ये ग्रह अपने मातृ तारे से हजारो गूणा धुंधले होते है। पढ़ना जारी रखें “परग्रही जीवन श्रंखला भाग 05 : पृथ्वी जैसे सौर बाह्य ग्रह की खोज”