जब भी ट्रिगर दबाया जाता है, दोनो संभव परिणामो को समाविष्ट करने ब्रह्माण्ड का विभाजन हो जाता है और दो समांतर ब्रह्माण्ड बन जाते है।

क्वांटम आत्महत्या और श्रोडीन्गर की बिल्ली


 जब भी ट्रिगर दबाया जाता है, दोनो संभव परिणामो को समाविष्ट करने ब्रह्माण्ड का विभाजन हो जाता है और दो समांतर ब्रह्माण्ड बन जाते है।
जब भी ट्रिगर दबाया जाता है, दोनो संभव परिणामो को समाविष्ट करने ब्रह्माण्ड का विभाजन हो जाता है और दो समांतर ब्रह्माण्ड बन जाते है।

एक व्यक्ति अपने सर पर तनी बंदूक के साथ बैठा है। यह साधारण बंदूक नही है, यह एक क्वांटम सिद्धांत आधारित बंदूक है जो किसी क्वांटम कण के स्पिन को मापने मे सक्षम है। जब भी बंदूक का ट्रिगर दबाया जाता है, एक क्वांटम कण या क्वार्क का स्पिन मापा जाता है। स्पिन के मापन के आधार पर गोली चलेगी या नही चलेगी। यदि क्वार्क का स्पिन घड़ी के सुईयों की दिशा मे है तो बंदूक से गोली चलेगी। यदि क्वार्क का स्पिन घड़ी की सुईयों के विपरीत है तो गोली नही चलेगी, केवल ट्रिगर की क्लिक होगी।

घबराहट के साथ वह व्यक्ति एक गहरी सांस लेता है और ट्रिगर दबा देता है। बंदूक से केवल क्लिक ही होता है। वह फ़िर से ट्रिगर दबाता है, क्लिक, फिर से ट्रिगर, परिणाम वही क्लिक। वह व्यक्ति बार बार ट्रिगर दबाते रहेगा लेकिन परिणाम वही रहेगा, गोली नही चलेगी। हालांकि बंदूक सही तरह से कार्य कर रही है और उसमे गोलीयाँ भी भरी हुयी है, वह व्यक्ति कितनी ही बार ट्रिगर दबायेगा, बंदूक से गोली कभी नही चलेगी। वह यह प्रक्रिया अनंत तक दोहराता रहेगा और क्वांटम अमर रहेगा।
अब हम समय यात्रा कर इस प्रयोग के आरंभ मे वापस जाते है। वह व्यक्ति प्रथम बार ट्रिगर दबाता है, बंदूक मे क्वार्क की दिशा का मापन घड़ी की सुईयों की दिशा मे होता है। बंदूक से गोली चलती है। वह व्यक्ति अब मृत है।

लेकिन रूकिये! उस व्यक्ति ने प्रथम बार ट्रिगर दबाया था और उसके पश्चात अनंत बार ट्रिगर दबाया था और हम पहले से ही जानते हैं कि बंदूक से गोली नही चली थी। अब वह व्यक्ति मृत कैसे हो सकता है ? वह व्यक्ति नही जानता कि वह जीवित और मृत दोनो अवस्था मे है। जब भी वह ट्रिगर दबाता है, ब्रह्माण्ड का विभाजन हो जाता है और दो ब्रह्माण्ड बन जाते है। यह विभाजन होते रहता है, दोबारा , तीबारा, चौथी बार, जब भी वह व्यक्ति ट्रिगर दबाता है ब्रह्माण्ड का एक और विभाजन होता है।

इस वैचारिक प्रयोग (thought experiment) को क्वांटम आत्महत्या(quantum suicide) कहा जाता है। इसे प्रिंसटन विश्वविद्यालय(Princeton University) के सैद्धांतिक भौतिक वैज्ञानिक मैक्स टेगमार्क(Max Tegmark) ने 1997 मे प्रस्तावित किया था। वे अब एम आई टी(MIT) मे है। वैचारिक प्रयोग केवल मस्तिष्क मे किये जाते हैं। क्वांटम स्तर मानव द्वारा ब्रह्माण्ड मे खोजा गया पदार्थ का सूक्ष्मतर स्तर भाग है। यह इतना सूक्ष्म है कि इस स्तर पर पारंपरिक तौर पर वैज्ञानिक प्रयोग करना लगभग असंभव हो जाता है। पढ़ना जारी रखें “क्वांटम आत्महत्या और श्रोडीन्गर की बिल्ली”

आधुनिक जांचयंत्र

16 सरल क्वांटम भौतिकी : आधुनिक जांचयंत्र(Detectors) द्वारा कण त्वरकों के आंकड़ो का विश्लेषण कैसे होता है ?


अधिकतर आधुनिक जांचयंत्र एकाधिक उपकरणो द्वारा निर्मित होते है, जोकि हर घटना के विभिन्न पहलूओं की जांच करते है। ये सभी उपकरण इस तरह से लगे होते है कि वैज्ञानिक त्वरक मे हो रही कणो के टकराव की घटनाओं से अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकें।

यह किसी आधुनिक त्वरक का जांचयत्र है:
आधुनिक जांचयंत्र

ट्रेकींग कक्ष : जांचयत्र का सबसे अंदरूनी भाग जिसमे निर्मित कणो के पथ को दर्ज करने वाले संवेदी उपकरण लगे होते है।
विद्युत-चुंबकिय (EM) कैलोरीमीटर : यह उपकरण इलेक्ट्रान, पाजीट्रान तथा फोटानो की कुल ऊर्जा मापता है। कण त्वरकों मे इलेक्ट्रान और पाजीट्रान की बौछार होती है। इलेक्ट्रान और पाजीट्रान परमाणुओं के विद्युत क्षेत्र द्वारा मोड़ दिये जाते है, जिससे वे फोटान उत्सर्जित करते है। ये फोटान इलेक्ट्रान पाजीट्रान युग्म का निर्माण करते है, जो फोटान का उत्सर्जन करते है। यह प्रक्रिया अनेक चक्रो मे चलते रहती हैं। प्रक्रिया के अंत मे इलेक्ट्रान और पाजीट्रान की कुल संख्या, प्रक्रिया के प्रारंभ के कणो की ऊर्जा के अनुपात मे ही होती है।

हेड्रान कैलोरीमीटर: यह हेड्रान कणो की कुल ऊर्जा का मापन करता है। हेड्रान कण इस क्षेत्र के घने पदार्थ से प्रतिक्रिया करते है जिससे आवेशित कणो की बौछार का निर्माण होता है। इन आवेशित कणो की ऊर्जा का मापन किया जाता है।

म्युआन कक्ष : इस क्षेत्र तक म्युआन तथा न्युट्रीनो ही पहुंच पाते है। इस क्षेत्र मे म्युआन की जांच हो जाती है लेकिन न्युट्रीनो इससे भी बच निकलते है। न्युट्रीनो होने का अनुमान जांच प्रक्रिया की कुल ऊर्जा मे लापता(गुम) ऊर्जा से लगाया जाता है।

चुंबक : इससे कणो की दिशा को नियंत्रित किया जाता है। पढ़ना जारी रखें “16 सरल क्वांटम भौतिकी : आधुनिक जांचयंत्र(Detectors) द्वारा कण त्वरकों के आंकड़ो का विश्लेषण कैसे होता है ?”

कण त्वरण का एनीमेशन

15 सरल क्वांटम भौतिकी : कण त्वरक(Particle Acclerator) कणो को गति कैसे देते है?


कणो के साथ प्रयोग कैसे किये जाते है ?

कण त्वरक भौतिक वैज्ञानिको की दो समस्यायें हल करते है।

  • प्रथम:  सभी कण तरंग की तरह व्यवहार करते है, वैज्ञानिक कणों से संवेग मे वृद्धि कर उनके तरंगदैर्ध्य(Wavelength) को इतना कम करते है कि उनसे परमाणु के अंदर देखा जा सके।
  • द्वितीय:  इन गतिमान कणो की ऊर्जा से वैज्ञानिक अध्यन के लिये अस्थायी भारी कणो का निर्माण करते हैं।

कण त्वरक कैसे कार्य करते है।

आधारभूत रूप पर एक कण त्वरक एक कण को विद्युत चुंबकिय क्षेत्र से गति प्रदान करता है और उस कण को लक्ष्य या किसी अन्य कण से टकराता है। इस टकराव के आसमाप जांच यंत्र लगे होते है जो इस घटना का विवरण दर्ज करतें है।

clip_image003प्रश्न: आप के सबसे पास का कण त्वरक कौनसा है ?
टीवी या आपके कंप्युटर का मानीटर (एल सी डी/ या प्लाज्मा वाले नही!)
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इलेक्ट्रान : जांच कण

14 सरल क्वांटम भौतिकी : यह कैसे जाना जाये कि वास्तव मे क्या हो रहा है ? : कण त्वरक (Particle Accelerator)


इलेक्ट्रान : जांच कण
इलेक्ट्रान : जांच कण

भौतिक वैज्ञानिक प्रकाश को परमाणु तथा परमाणु से छोटे कणो की जांच के लिये प्रयोग नही कर सकते हैं, क्योंकि प्रकाश का तरंगदैर्ध्य(Wavelength) इन कणो के आकार से अधिक होता है। पिछले लेख मे हम देख चुके हैं कि किसी भी वस्तु की जांच के लिये उससे छोटे जांचयंत्र(तरंग) का प्रयोग करना आवश्यक होता है। लेकिन हम जानते हैं कि सभी कण ‘तरंग‘ गुणधर्म रखते है, इन कणो का जांचयंत्र के रूप मे प्रयोग किया जा सकता है। किसी भी कण की जांच के लिये भौतिक वैज्ञानिको को सबसे कम तरंगदैर्ध्य के कण की आवश्यकता होती है। हमारे प्राकृतिक विश्व मे अधिकतर कणो का तरंगदैर्ध्य हमारी आवश्यकता से अधिक होता है। प्रश्न उठता है कि भौतिक वैज्ञानिक किसी कण के तरंगदैर्ध्य को कम कैसे करते है कि उसे एक जांचयंत्र की तरह प्रयोग किया जा सके ?

संवेग तथा तरंगदैर्ध्य
संवेग तथा तरंगदैर्ध्य

किसी कण का संवेग(momentun) तथा तरंगदैर्ध्य(Wavelength) विलोमानुपात(Inverse Propotion) मे होते है। अर्थात जितना अधिक संवेग, उतनी कम तरंगदैर्ध्य! भौतिक वैज्ञानिक इसी नियम के प्रयोग से कण त्वरकों मे जांचकण की गति को तेज कर देते है जिससे उसकी तरंगदैर्ध्य कम हो जाती है। इस प्रक्रिया की विधि :

  • अपने जांच कण को त्वरक(particle Acclerator) मे डाले।
  • जांचकण की गति को प्रकाशगति के समीप तक तेज कर उसके संवेग को बढ़ा दे।
  • अब जांचकण का संवेग अत्याधिक है, इसलिये उसकी तरंगदैर्ध्य लघुतम होगी।
  • अब जांचकण को लक्ष्य से टकराने दे और उसके बाद की घटना को अंकित कर ले।

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हमारी आंखे और विश्व का अहसास

13 सरल क्वांटम भौतिकी : यह कैसे जाना जाये कि वास्तव मे क्या हो रहा है ?


यह कैसे जाना जाये कि वास्तव मे क्या हो रहा है ?

मान लेते हैं कि रदरफोर्ड के प्रयोग के जैसे अन्य प्रयोगों से मूलभूत कणो की उपस्थिति जान पाना संभव है लेकिन हम यह कैसे जाने कि वास्तव मे क्या हो रहा है ?

श्रोत/लक्ष्य/जांच ( source/target/detection) के सबसे सामान्य उदाहरण को लेते है , जिससे हम सारे विश्व को देखते है।

जब हम प्रकाश को लेते है तब हम जानते हैं कि प्रकाश किरणे लाखों अरबो ’फोटान’ से बनी होती है। अन्य मूलभूत कणो के जैसे फोटान कण भी ’तरंग’ के जैसे व्यवहार रखते है। इसी कारण से फोटान कण हर उस वस्तु के बारे मे सूचना रखते है, जिससे वे टकराते है अर्थात प्रतिक्रिया करते है।

हमारी आंखे और विश्व का अहसास
हमारी आंखे और विश्व का अहसास

मान लिजिये कि आपके पीछे एक प्रकाश बल्ब है तथा सामने एक टेनिस गेंद रखी है। फोटान प्रकाश बल्ब (श्रोत) से उत्सर्जित होकर , टेनिस गेंद (लक्ष्य) से टकराकर विचलीत होते है तथा यही फोटान आपकी आंख (जांच यंत्र) से टकराते है। आपकी आंखे फोटान के आने की दिशा से गेंद की दिशा तथा आकार का निष्कर्ष निकालती हैं और आप जानते है कि आपके सामने एक गोलाकार गेंद रखी है। यही नही इन फोटानो के विभिन्न तरंगदैर्ध्य से आप जानते हैं कि गेंद का रंग हरा तथा पीला है। (ध्यान रहे कि फोटानो की हर तरंगदैर्ध्य का एक अलग रंग होता है, और इसी से वस्तुओं का रंग निर्धारित होता है, लेख के नीचे इस पर टिप्पणी देंखे।*)

हमारा मस्तिष्क फोटानो की इन सुचनाओं को ग्रहण कर उनका विश्लेषण करता है तथा उसमे टेनिस गेंद की छवि का निर्माण करता है। टेनिस बाल की यह मानसिक छवि हमे उसकी वास्तविकता का अहसास कराती है।

विभिन्न वस्तुओं से टकराकर वापिस आती प्रकाश किरणो से हम विश्व का अहसास करते है , देखते हैं। कुछ प्राणी जैसे चमगादड़ तथा डाल्फीन ध्वनि तरंगो के उत्सर्जन और जांच से विश्व का अहसास करते है। किसी भी भौतिक वस्तु की जांच के लिये किसी भी तरह की परावर्तित तरंग का प्रयोग किया जा सकता है।
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प्रति-पदार्थ ?

11 सरल क्वांटम भौतिकी: भौतिकी के अनसुलझे रहस्य


अब तक हमने सभी मूलभूत कणो और मूलभूत बलों की जानकारी प्राप्त की है। क्या इसका अर्थ है कि इसके आगे जानने के लिये कुछ भी शेष नही है ?

नही! हमारी वर्तमान भौतिकी अधूरी है, हमारे पास ऐसे बहुत से प्रश्न है, जिसका कोई उत्तर नही है। हमारा सबसे सफल सिद्धांत ’स्टैंडर्ड माडेल’ अपूर्ण है, इसके विस्तार की आवश्यकता है।

स्टैन्डर्ड माडेल से आगे

स्टैन्डर्ड माडेल “पदार्थ की संरचना और उसके स्थायित्व” के अधिकतर प्रश्नो का उत्तर छः तरह के क्वार्क , छः तरह के लेप्टान और चार मूलभूत बलो से दे देता है। लेकिन स्टैडर्ड माडेल सम्पूर्ण नही है, इसके विस्तार की संभावनायें है। वर्तमान मे स्टैण्डर्ड माडेल के पास सभी प्रश्नो का उत्तर नही है, इसके समक्ष बहुत से अनसुलझे प्रश्न है।

  • जब हम ब्रह्माण्ड का निरीक्षण करते है तब हम पदार्थ ही दिखायी देता है, प्रतिपदार्थ नही। क्या पदार्थ और प्रतिपदार्थ की मात्रा समान नही है, क्यों ? क्या इन दोनो  के मध्य सममीती नही है? क्यों ?

    प्रति-पदार्थ ?
    प्रति-पदार्थ ?
  • श्याम पदार्थ(dark matter) क्या है? उसे हम देख नही सकते है लेकिन उसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को देख सकते है,  ऐसा क्यों  ?
  • स्टैन्डर्ड माडेल किसी कण के द्रव्यमान की गणना करने मे असमर्थ क्यों है?
  • क्या क्वार्क और लेप्टान मूलभूत कण है ? या वे भी और छोटे घटक कणो से बने है ?
  • क्वार्क और लेप्टान की ठीक ठीक तीन पीढ़ी क्यों है ? चार या दो क्यों नही ?
  • इन सब के मध्य गुरुत्वाकर्षण की क्या भूमिका है ?

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