सापेक्षतावाद सिद्धांत : ब्रह्माण्ड के गुणधर्म


यदि आप ब्रह्माण्ड की व्याख्या कुछ मूलभूत शब्दो मे करना चाहें तो  आप कह सकते है कि ब्रह्माण्ड के कुछ सरल गुणधर्म होते हैं। हम इन सभी गुणों से परिचित भी हैं, इतने ज्यादा कि हम उन पर ध्यान भी नही देतें हैं। लेकिन विशेष सापेक्षतावाद के अंतर्गत ये गुणधर्म हमारी अपेक्षा के विपरीत आश्चर्यजनक रूप से व्यवहार करतें हैं। विशेष सापेक्षतावाद पर आगे बढने से पहले ब्रह्माण्ड के इन मूलभूत गुणो की चर्चा करतें है।

अंतराल/अंतरिक्ष(Space)

त्री-आयामी
त्री-आयामी

हम जो भी कुछ भौतिक वस्तुओ को देखते है या जो भी घटना घटीत होती है , वह अंतराल/अंतरिक्ष के तीन आयामो मे होती है। अंतराल/अंतरिक्ष यह हमारे भौतिक विश्व का त्रीआयामी चित्रण है। इसी अंतराल/अंतरिक्ष के कारण किसी भी पिंड/वस्तु की तीन दिशाओ मे लंबाई, चौडाई और ऊंचाई होती है और वह तीन दिशाओ दायें/बायें, उपर/नीचे तथा आगे/पिछे  गति कर सकता है।

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सापेक्षतावाद सिद्धांत : परिचय


einsteenअलबर्ट आइन्स्टाइन ने 1905 में “विशेष सापेक्षतावाद(Theory of Special Relativity)” तथा 1915 में “सामान्य सापेक्षतावाद(Theory of General Relativity)” के सिद्धांत को प्रस्तुत कर भौतिकी की नींव हीला दी थी। सामान्य सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार न्युटन के गति के तीन नियम(Newtons laws of motion) पूरी तरह से सही नहीं है, जब किसी पिंड की गति प्रकाश गति के समीप पहुंचती है वे कार्य नहीं करते है। साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार न्युटन का गुरुत्व का सिद्धांत भी पूरी तरह से सही नहीं है और वह अत्याधिक गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्रो में कार्य नहीं करता है।

हम सापेक्षतावाद को विस्तार से आगे देखेंगे, अभी हम केवल न्युटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत तथा साधारण सापेक्षतावाद सिद्धांत के मध्य के अंतर को देखेंगे। ये दोनों सिद्धांत कमजोर गुरुत्वाकर्षण के लिए समान गणना करते है , यह एक सामान्य परिस्तिथी है जो हम रोजाना देखते और महसूस करते है। लेकिन निचे तीन उदाहरण दिए है जिसमे इन दोनों सिद्धांतो की गणनाओ में अंतर स्पष्ट हो जाता है। पढ़ना जारी रखें “सापेक्षतावाद सिद्धांत : परिचय”

हिग्स बोसान संबधित 10 महत्वपूर्ण तथ्य


  1.  हिग्स बोसान ’ईश्वर कण’ नही है। जी हाँ लोग उसे ईश्वर कण कहते है क्योंकि लेओन लेडरमैन ने अपननी ’ईश्वर कण” नामक पुस्तक मे हिग्स बोसान को यह नाम दिया था। यह पुस्तक के विपणन के लिये एक अच्छा नाम था लेकिन वैज्ञानिक रूप से गलत था। इसी पुस्तक मे लेखक लेओन लेडरमैन तथा सह लेखक डीक टेरेसी ने लिखा है कि प्रकाशक इस पुस्तक का नाम ’गाडडैम पार्टीकल’ रखने के लिये तैयार नही था जबकि यह नाम हिग्स कण को खोजने मे आने वाली कठिनाईयों तथा अधिक लागत के संदर्भ मे उपयुक्त नाम था।
  2.  हिग्स बोसान के लिये नोबेल मिलेगा लेकिन किसे ? हम नही जानते है। हिग्स बोसान का आईडीया 1963 तथा 1964 के बहुत से शोधपत्रो के द्वारा प्रकाश मे आया था। एक शोधपत्र फ्रांसवा एन्ग्लेर्ट(Francois Englert) तथा राबर्ट ब्राउट (Robert Brout) का था, दो शोधपत्र पिटर हिग्स(Peter Higgs) के और एक शोधपत्र गेराल्ड गुरानिक(Gerald Guralnik) ,रिचर्ड हेगन(Richard Hagen) तथा टाम किबल(Tom Kibble) का था। परंपराओं के अनुसार एक वर्ष मे भौतिकी का नोबेल अधिकतम तीन लोगों को दिया जाता है। इसलिये चयन कठिन है। हिग्स बोसान की सैद्धांतिक खोज के साथ प्रायोगिक खोज भी महत्वपूर्ण है लेकिन इसमे समस्त विश्व मे फैले लगभग 7000 वैज्ञानिको का योगदान है जोकि नोबेल पुरस्कार के चयन को और कठिन बनाता है। यह संभव है कि लार्ज हेड्रान कोलाइडर( Large Hadron Collider) के निर्माताओं मे से किसी को नोबेल दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त यह भी संभव है कि तीन व्यक्तियों के नियमो से बाहर जाकर शांति के नोबेल की तरह इसे एक संस्था को दिया जाये। पढ़ना जारी रखें “हिग्स बोसान संबधित 10 महत्वपूर्ण तथ्य”

हिग्स बोसान मिल ही गया !


जिनीवा में CERN के भौतिक विज्ञानीयों  ने  बुधवार 4 जुलाई 2012 को एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि उन्‍हें प्रयोग के दौरान नए कण मिले, जिसके गुणधर्म हिग्‍स बोसोन से मिलते  हैं। उन्‍होंने बताया कि वैज्ञानिक नए कणों के आंकड़ो के विश्‍लेषण … पढ़ना जारी रखें हिग्स बोसान मिल ही गया !

समय : समय क्या नही है ?


जीवन समय मे कैद एक यात्रा है, कुछ पलों के अतिरिक्त जो स्वतंत्र होते है।

समय को समझने के लिये सिद्धांतो की गहराई मे जाने से पहले हम समय से संबधित कुछ गलतफहमीयों को दूर करना होगा। ये गलतफहमीयाँ मुख्यतः समय के प्रवाह से उत्पन्न होती है तथा काल-अंतराल(space-time) मे द्रव्यमान द्वारा उत्पन्न वक्रता(curvacture) को सही रूप से नही समझ पाने से उत्पन्न होती है।

ब्लाक ब्रह्मांड

ब्लाक ब्रह्माण्ड  के परिपेक्ष्य मे समय एक भूदृश्य(landscpae) के समान है, जिसमे भूतकाल, वर्तमान और भविष्यकाल तीनो एक साथ भिन्न भिन्न आयामो मे मौजूद हैं। इसका अर्थ है कि मानव के साथ डायनासोर अभी भी है, साथ ही आपकी अपनी बहुत सी प्रतिलिपीयाँ है तथा सारा ब्रह्मांड भी भविष्यकाल और भूतकाल की विभिन्न अवस्थाओं मे एक साथ उपस्थित है।

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ब्रह्माण्ड का विस्तार

समय : समय कैसे उत्पन्न होता है ?


कार्य स्थगन समय की चोरी है।

-एडवर्ड यंग

ब्रह्माण्ड का विस्तार
ब्रह्माण्ड का विस्तार

समय कैसे उत्पन्न होता है ?

इस प्रश्न पर विचार करने से पहले कुछ मानी हुयी अवधारणाओं पर एक नजर डालते है।

  1. हम एक विस्तार करते हुये ब्रह्माण्ड मे रहते है।
  2. द्रव्यमान ग्रेविटान का उत्सर्जन करता है जो अंतराल से प्रतिक्रिया करता है।
  3. द्रव्यमान से अंतराल मे ऋणात्मक वक्रता आती है।(साधारण सापेक्षतावाद)
  4. समय ऋणात्मक रूप से वक्र अंतराल मे धीमा होता है।(साधारण सापेक्षतावाद)
  5. गति करते पिंडो मे भी समय धीमा हो जाता है।(विशेष सापेक्षतावाद)
  6. समय के धीमे होने के फलस्वरूप बलो की क्षमता कम होती है।(वैचारीक प्रयोग)

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