क्या समय यात्रा संभव है?


एच जी वेल्स के उपन्यास “द टाईम मशीन” मे नायक एक विशेष कुर्सी पर बैठता है जिस पर कुछ जलते बुझते बल्ब लगे होते है, कुछ डायल होते है , नायक डायल सेट करता है, कुछ बटन दबाता है और अपने आपको भविष्य के हज़ारों वर्षों बाद में पाता है।

समय यान (Time Machine)- २००२ मे बनी हालीवुड की फिल्म मे दिखाया समय यान

उस समय तक इंग्लैड नष्ट हो चुका होता है और वहां पर मार्लाक और एलोई नामक नये प्राणीयों का निवास होता है। यह विज्ञान फतांसी की एक महान कथा है लेकिन वैज्ञानिकों ने समय यात्रा की कल्पना या अवधारणा पर कभी विश्वास नही किया है। उनके अनुसार यह सनकी,रहस्यवादी और धुर्तो के कार्यक्षेत्र की अवधारणा है , उनके पास ऐसा मानने के लिये ठोस कारण भी है। लेकिन क्वांटम गुरुत्व (Quantum Gravity) मे आश्चर्यजनक रूप से प्रगति इस अवधारणा की चूलो को हिला रही है। पढ़ना जारी रखें “क्या समय यात्रा संभव है?”

श्याम पदार्थ(Dark Matter)


भौतिकी में श्याम पदार्थ उस पदार्थ को कहते है जो विद्युत चुंबकीय विकिरण (प्रकाश, क्ष किरण) का उत्सर्जन या परावर्तन पर्याप्त मात्रा में नहीं करता जिससे उसे महसूस किया जा सके किंतु उसकी उपस्थिति साधारण पदार्थ पर उसके गुरुत्व प्रभाव से महसूस की जा सकती है। श्याम पदार्थ की उपस्थिति के लिये किये गये निरीक्षणों में प्रमुख है, आकाशगंगाओं की घूर्णन गति, किसी आकाशगंगाओं के समुह में आकाशगंगा की कक्षा मे गति और आकाशगंगा या आकाशगंगा के समुह में गर्म गैसो में तापमान का वितरण है। श्याम पदार्थ की ब्रह्मांड के आकार ग्रहण प्रक्रिया(१) तथा महा विस्फोट केन्द्रीय संश्लेषण(Big Bang Ncleosynthesis)(२)प्रमुख भूमिका रही है। श्याम पदार्थ का प्रभाव ब्रह्मांडीय विकिरण के फैलाव और वितरण में भी रहा है। यह सभी सबूत यह बताते है कि आकाशगंगाये, आकाशगंगा समुह(Cluster) और ब्रह्मांड में पदार्थ की मात्रा निरीक्षित मात्रा से कही ज्यादा है, जो कि मुख्यतः श्याम पदार्थ है जिसे देखा नहीं जा सकता। पढ़ना जारी रखें “श्याम पदार्थ(Dark Matter)”

श्याम उर्जा (Dark Energy)


यह विषय एक विज्ञान फैटंसी फिल्म की कहानी के जैसा है। श्याम ऊर्जा(Dark Energy), एक रहस्यमय बल जिसे कोई समझ नहीं पाया है, लेकिन इस बल के प्रभाव से ब्रह्मांड के पिंड एक दूसरे से दूर और दूर होते जा रहे है।

यह वह काल्पनिक बल है जिसका दबाव ऋणात्मक है और सारे ब्रह्मांड में फैला हुआ है। सापेक्षता वाद के सिद्धांत के अनुसार , इस ऋणात्मक दबाव का प्रभाव गुरुत्वाकर्षण के विपरीत प्रभाव के समान है।

श्याम ऊर्जा 1998 मे उस वक्त प्रकाश में आयी , जब अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के 2 समुहों ने विभिन्न आकाशगंगाओं में विस्फोट की प्रक्रिया से गुजर रहे सितारों(सुपरनोवा)(1) पर एक सर्वे किया। उन्होने पाया की ये सुपरनोवा की प्रकाश दीप्ति अपेक्षित प्रकाश दीप्ति से कम है, इसका मतलब यह कि उन्हें जितने पास होना चाहिये थी , वे उससे ज्यादा दूर है। इसका एक ही मतलब हो सकता था कि ब्रह्मांड के विस्तार की गति कुछ काल पहले की तुलना में बढ़ गयी है!(लाल विचलन भी देखे) पढ़ना जारी रखें “श्याम उर्जा (Dark Energy)”

महाविस्फोट का सिद्धांत (The Big Bang Theory)


किसी बादलों और चांद रहित रात में यदि आसमान को देखा जाये तब हम पायेंगे कि आसमान में सबसे ज्यादा चमकीले पिंड शुक्र, मंगल, गुरु, और शनि जैसे ग्रह हैं। इसके अलावा आसमान में असंख्य तारे भी दिखाई देते है जो कि हमारे सूर्य जैसे ही है लेकिन हम से काफी दूर हैं। हमारे सबसे नजदीक का सितारा प्राक्सीमा सेंटारी हम से चार प्रकाश वर्ष (10) दूर है। हमारी आँखों से दिखाई देने वाले अधिकतर तारे कुछ सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं। तुलना के लिये बता दें कि सूर्य हम से केवल आठ प्रकाश मिनट और चांद 14 प्रकाश सेकंड की दूरी पर है। हमे दिखाई देने वाले अधिकतर तारे एक लंबे पट्टे के रूप में दिखाई देते है, जिसे हम आकाशगंगा कहते है। जो कि वास्तविकता में चित्र में दिखाये अनुसार पेचदार (Spiral) है। इस से पता चलता है कि ब्रह्मांड कितना विराट है ! यह ब्रह्मांड अस्तित्व में कैसे आया ? पढ़ना जारी रखें “महाविस्फोट का सिद्धांत (The Big Bang Theory)”