सापेक्षतावाद : विशेष सापेक्षतावाद


सापेक्षतावाद, आधुनिक भौतिकी की वह क्रांति है जिसने हमारे समय, स्थान और गुरुत्व के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया। इससे पहले, भौतिकी का शासन न्यूटन के नियमों के अधीन था। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण और गति के नियमों का वर्णन किया, जिन्हें सदियों तक मानक माना गया। लेकिन 19वीं शताब्दी के अंत में भौतिकी के कुछ पहलुओं में विरोधाभास उभरने लगे। विशेष रूप से, प्रकाश की गति और विद्युत चुंबकीय तरंगों के व्यवहार ने यह संकेत दिया कि न्यूटनियन सिद्धांत सार्वभौमिक नहीं हो सकता।

इस समस्या का समाधान अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रस्तुत किया। 1905 में, उन्होंने विशेष सापेक्षतावाद (Special Relativity) का परिचय दिया। इस सिद्धांत ने दो मौलिक सिद्धांतो पर जोर दिया:

भौतिकी के नियम सभी समानांतर (inertial) संदर्भ फ्रेमों में समान हैं।

प्रकाश की गति सभी अवलोककों के लिए समान और अपरिवर्तनीय है। पढ़ना जारी रखें सापेक्षतावाद : विशेष सापेक्षतावाद

सापेक्षतावाद : स्पेस-टाइम की गुत्थी और प्रकाश


विज्ञान हमें ब्रह्मांड को समझने में सहायता करता है। जब हम किसी वस्तु या घटना के बारे में बात करते हैं, तो हम यह जानना चाहते हैं कि वह कहाँ है और कब हुई। इन दो बातों को ही स्थान और समय कहा जाता है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार स्थान और समय अलग-अलग नहीं, बल्कि आपस में जुड़े हुए हैं। इस संयुक्त रूप को स्पेसटाइम कहा जाता है।

स्पेसटाइम का अर्थ है — स्थान और समय का एक साथ होना। किसी भी घटना को पूरी तरह समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक होता है कि वह घटना किस स्थान पर और किस समय हुई। इसलिए वैज्ञानिकों ने स्थान के तीन आयाम और समय के एक आयाम को मिलाकर स्पेसटाइम की कल्पना की है।

हम अपने रोज़मर्रा के जीवन में दो चीज़ों को अलग-अलग समझते हैं—
स्थान (Space) यानी हम कहाँ हैं
और समय (Time) यानी कब हैं।

लेकिन आधुनिक भौतिकी बताती है कि स्थान और समय अलग नहीं, बल्कि आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। इन्हें मिलाकर जो अवधारणा बनती है, उसे स्पेसटाइम (Spacetime) कहा जाता है।
स्पेसटाइम क्या है?

सरल शब्दों में, स्पेसटाइम ब्रह्मांड का वह ढांचा है जिसमें हर वस्तु और हर घटना घटती है।
जब भी हम किसी घटना का वर्णन करते हैं, तो हमें चार बातें बतानी पड़ती हैं—
तीन स्थान से जुड़ी (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) और एक समय से जुड़ी (कब)।
इन चारों को मिलाकर ही किसी घटना की पूरी पहचान होती है।

प्रकाशगति और स्पेसटाइम

आपको लगता है कि प्रकाश की गति सिर्फ़ एक संख्या है? 299,792,458 m/s.

यह तेज़ है, बहुत तेज़ ! यह सबसे तेज़ चीज़ है जिसे हम जानते हैं। ठीक है। लेकिन यह सबसे तेज होने की सीमा क्यों है? आप इससे तेज़ क्यों नहीं जा सकते? आपको क्या रोकता है?

ज़्यादातर लोगों ने इस बारे में कभी सोचा ही नहीं है। वे बस इसे मान लेते हैं क्योंकि आइंस्टीन ने ऐसा कहा था।

लोग मान लेते है कि प्रकाश की गति ब्रह्मांड की गति की सीमा है। क्यों ? क्योंकि यह बस ऐसा ही है।

लेकिन यह कोई जवाब नहीं है। यह सिर्फ़ शब्दों को दोहराना है। जब आप सच में पूछते हैं कि कोई भी चीज़ प्रकाश से तेज़ क्यों नहीं जा सकती? जब आप यह जानने की कोशिश करते हैं कि असल में आपको क्या रोक रहा है तब आपको कुछ ऐसा अजीब, रोज़मर्रा के अनुभव से से ऐसा कुछ पता चलता है जो अंतरिक्ष और समय के बारे में आपके सोचे हुए हर चीज़ को बदल देता है। यह आपकी रोजमर्रा के जीवन की सोच से मौलिक रूप से अलग है। पढ़ना जारी रखें सापेक्षतावाद : स्पेस-टाइम की गुत्थी और प्रकाश

सापेक्षतावाद सिद्धांत : प्रकाश के गुणधर्म


प्रकाश (सूर्य)

प्रकाश ऊर्जा का ही एक रूप है। प्रकाश का व्यवहार थोड़ा विचित्र है। न्युटन के कारपसकुलर अवधारणा(corpuscular hypothesis) के अनुसार प्रकाश छोटे छोटे कणों (जिन्हें न्युटन ने कारपसकल नाम दिया था।) से बना होता है। न्युटन का यह मानना प्रकाश के परावर्तन(reflection) के कारण था क्योंकि प्रकाश एक सरल रेखा मे परावर्तित होता है और यह प्रकाश के छोटे कणों से बने होने पर ही संभव है। केवल कण ही एक सरल रेखा मे गति कर सकते है।

थामस यंग का प्रकाश अपवर्तन दिखाता डबल-स्लिट प्रयोग जिसने प्रकाश के तरंग होने की पुष्टि की थी।

लेकिन उसी समय क्रिस्चियन हायजेन्स( Christian Huygens) और थामस यंग( Thomas Young) के अनुसार प्रकाश तरंगो से बना होता था। हायजेन्स और यंग का सिद्धांत प्रकाश के अपवर्तन(refraction) पर आधारित था, क्योंकि माध्यम मे परिवर्तन होने पर प्रकाश की गति मे परिवर्तन आता था, यह प्रकाश के तरंग व्यवहार से ही संभव था। न्युटन के कारपसकुलर अवधारणा के ताबूत मे अंतिम कील मैक्सवेल(James Clerk Maxwell) ने ठोंक दी थी, उनके चार सरल समीकरणों ने सिद्ध कर दिया कि प्रकाश विद्युत-चुंबकिय क्षेत्र की स्वयं प्रवाहित तरंग( self-propagating waves) मात्र है। इन समीकरणों से प्रकाश की गति की सटीक गणना भी हो गयी थी। लेकिन २० वी शताब्दि मे फोटो-इलेक्ट्रिक प्रभाव(Photoelectric effect) की खोज ने प्रकाश के कणो के बने होने के सिद्धांत मे एक नयी जान डाल दी।

इन दोनो मे क्या सही है? क्या प्रकाश कण है ? या एक तरंग ? पढ़ना जारी रखें “सापेक्षतावाद सिद्धांत : प्रकाश के गुणधर्म”

प्रति-पदार्थ ?

11 सरल क्वांटम भौतिकी: भौतिकी के अनसुलझे रहस्य


अब तक हमने सभी मूलभूत कणो और मूलभूत बलों की जानकारी प्राप्त की है। क्या इसका अर्थ है कि इसके आगे जानने के लिये कुछ भी शेष नही है ?

नही! हमारी वर्तमान भौतिकी अधूरी है, हमारे पास ऐसे बहुत से प्रश्न है, जिसका कोई उत्तर नही है। हमारा सबसे सफल सिद्धांत ’स्टैंडर्ड माडेल’ अपूर्ण है, इसके विस्तार की आवश्यकता है।

स्टैन्डर्ड माडेल से आगे

स्टैन्डर्ड माडेल “पदार्थ की संरचना और उसके स्थायित्व” के अधिकतर प्रश्नो का उत्तर छः तरह के क्वार्क , छः तरह के लेप्टान और चार मूलभूत बलो से दे देता है। लेकिन स्टैडर्ड माडेल सम्पूर्ण नही है, इसके विस्तार की संभावनायें है। वर्तमान मे स्टैण्डर्ड माडेल के पास सभी प्रश्नो का उत्तर नही है, इसके समक्ष बहुत से अनसुलझे प्रश्न है।

  • जब हम ब्रह्माण्ड का निरीक्षण करते है तब हम पदार्थ ही दिखायी देता है, प्रतिपदार्थ नही। क्या पदार्थ और प्रतिपदार्थ की मात्रा समान नही है, क्यों ? क्या इन दोनो  के मध्य सममीती नही है? क्यों ?

    प्रति-पदार्थ ?
    प्रति-पदार्थ ?
  • श्याम पदार्थ(dark matter) क्या है? उसे हम देख नही सकते है लेकिन उसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को देख सकते है,  ऐसा क्यों  ?
  • स्टैन्डर्ड माडेल किसी कण के द्रव्यमान की गणना करने मे असमर्थ क्यों है?
  • क्या क्वार्क और लेप्टान मूलभूत कण है ? या वे भी और छोटे घटक कणो से बने है ?
  • क्वार्क और लेप्टान की ठीक ठीक तीन पीढ़ी क्यों है ? चार या दो क्यों नही ?
  • इन सब के मध्य गुरुत्वाकर्षण की क्या भूमिका है ?

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