सापेक्षतावाद : स्पेस-टाइम की गुत्थी और प्रकाश


विज्ञान हमें ब्रह्मांड को समझने में सहायता करता है। जब हम किसी वस्तु या घटना के बारे में बात करते हैं, तो हम यह जानना चाहते हैं कि वह कहाँ है और कब हुई। इन दो बातों को ही स्थान और समय कहा जाता है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार स्थान और समय अलग-अलग नहीं, बल्कि आपस में जुड़े हुए हैं। इस संयुक्त रूप को स्पेसटाइम कहा जाता है।

स्पेसटाइम का अर्थ है — स्थान और समय का एक साथ होना। किसी भी घटना को पूरी तरह समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक होता है कि वह घटना किस स्थान पर और किस समय हुई। इसलिए वैज्ञानिकों ने स्थान के तीन आयाम और समय के एक आयाम को मिलाकर स्पेसटाइम की कल्पना की है।

हम अपने रोज़मर्रा के जीवन में दो चीज़ों को अलग-अलग समझते हैं—
स्थान (Space) यानी हम कहाँ हैं
और समय (Time) यानी कब हैं।

लेकिन आधुनिक भौतिकी बताती है कि स्थान और समय अलग नहीं, बल्कि आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। इन्हें मिलाकर जो अवधारणा बनती है, उसे स्पेसटाइम (Spacetime) कहा जाता है।
स्पेसटाइम क्या है?

सरल शब्दों में, स्पेसटाइम ब्रह्मांड का वह ढांचा है जिसमें हर वस्तु और हर घटना घटती है।
जब भी हम किसी घटना का वर्णन करते हैं, तो हमें चार बातें बतानी पड़ती हैं—
तीन स्थान से जुड़ी (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) और एक समय से जुड़ी (कब)।
इन चारों को मिलाकर ही किसी घटना की पूरी पहचान होती है।

प्रकाशगति और स्पेसटाइम

आपको लगता है कि प्रकाश की गति सिर्फ़ एक संख्या है? 299,792,458 m/s.

यह तेज़ है, बहुत तेज़ ! यह सबसे तेज़ चीज़ है जिसे हम जानते हैं। ठीक है। लेकिन यह सबसे तेज होने की सीमा क्यों है? आप इससे तेज़ क्यों नहीं जा सकते? आपको क्या रोकता है?

ज़्यादातर लोगों ने इस बारे में कभी सोचा ही नहीं है। वे बस इसे मान लेते हैं क्योंकि आइंस्टीन ने ऐसा कहा था।

लोग मान लेते है कि प्रकाश की गति ब्रह्मांड की गति की सीमा है। क्यों ? क्योंकि यह बस ऐसा ही है।

लेकिन यह कोई जवाब नहीं है। यह सिर्फ़ शब्दों को दोहराना है। जब आप सच में पूछते हैं कि कोई भी चीज़ प्रकाश से तेज़ क्यों नहीं जा सकती? जब आप यह जानने की कोशिश करते हैं कि असल में आपको क्या रोक रहा है तब आपको कुछ ऐसा अजीब, रोज़मर्रा के अनुभव से से ऐसा कुछ पता चलता है जो अंतरिक्ष और समय के बारे में आपके सोचे हुए हर चीज़ को बदल देता है। यह आपकी रोजमर्रा के जीवन की सोच से मौलिक रूप से अलग है। पढ़ना जारी रखें सापेक्षतावाद : स्पेस-टाइम की गुत्थी और प्रकाश