जल एक सार्वत्रिक विलायक

परग्रही जीवन भाग 6 : जल – जीवन का विलायक


वर्तमान मे जीवन के विलायक के रूप मे केवल जल ही ज्ञात है। अब हम देखते है जल की ऐसी कौनसी विशेषताये है जो उसे जीवन का विलायक बनाये हुये है, कैसे वह आदर्श जैव विलायक के रूप मे सभी आवश्यक शर्तो को पूरा करता है। यह हमे अन्य विलायको के आदर्श जीवन के विलायक…

केप्लर अंतरिक्ष वेधशाला :सौर मंडल के बाहर जीवन की खोज को समर्पित वेधशाला


केप्लर अंतरिक्ष वेधशाला नासा का सौर मंडल से बाहर पृथ्वी सदृश ग्रहों को खोजने का अबतक का सबसे सफ़ल अभियान रहा है। इस अभियान का नाम महान खगोल शास्त्री योहानस केप्लर को समर्पित था। इसे 7 मार्च 2009 को अंतरिक्ष मे भेजा गया था और अपने 9 वर्षो के अभियान के पश्चात इसे 30 अक्टूबर 2018…

जल

परग्रही जीवन भाग 5 : जीवन अमृत – जल एक महान विलायक


अब तक हमारी चर्चा का केंद्र जीवित प्राणीयों की जैवरासायनिक संरचनाओं पर रहा है। यह सब बहुत महत्वपूर्ण था लेकिन हम इस तथ्य को नजर अंदाज नही कर सकते कि ये जैव अणु निर्वात मे कार्य नही करते है। पृथ्वी पर सभी जैव जैव कोशीकाओं के अंदर सभी जैव रासायनिक प्रक्रियायें द्रव जल की उपस्थिति…

परग्रही जीवन भाग 4 :बोरान आधारित जीवन


सिलिकान के पश्चात बोरान अकेला तत्व है जोकि कार्बन को चुनौती दे सकता है। यह तत्व आवर्तसारणी मे कार्बन के बांए स्थित है, जबकि सिलिकान कार्बन के नीचे है। जैव रसायनशास्त्रीयों की बोरान मे दिलचस्पी का कारण इसके द्वारा प्रदर्शित बहुआयामी तथा अत्याधिक असामान्य रासायनिक व्यवहार है। यह सिलिकान के जैसे उच्च तापमान पर बहुत…

कांच के गुंबदो के अंदर मानव कालोनी(कोपरनिकस डोम)

मानवता : पृथ्वी के अतिरिक्त एक और घर की तलाश


शीत ऋतु , अमावस की रात, निरभ्र आकाश मे चमकते टिमटिमाते तारे, उत्तर से दक्षिण की ओर तारों से भरा श्वेत जलधारा के रूप मे मंदाकीनी आकाशगंगा का पट्टा! आकाश के निरीक्षण के लिये इससे बेहतर और क्या हो सकता है। अपनी दूरबीन उठाई और आ गये छत पर; ग्रह, तारों और निहारिकाओ को निहारने…

ओमुअमुआ: Oumuamua

ओमुअमुआ(Oumuamua) : सौर मंडल के बाहर से आया एक मेहमान


पहली बार खगोलविज्ञानियों ने एक क्षुद्रग्रह को खोज निकाला है जो बाहरी अंतरिक्ष से हमारे सौरमंडल में प्रवेश कर चुका है। चिली स्थित ESO(European Southern Observatory) के वेरी लार्ज टेलिस्कोप(Very Large Telescope: VLT) और विश्व के अन्य वेधशालाओं के निरीक्षण हमे बताते है कि यह अनोखा क्षुद्रग्रह हमारे सौरमंडल में प्रवेश करने से पहले लाखों…

परग्रही जीवन भाग 3 : क्या सिलीकान आधारित जीवन संभव है?


कार्बन के विकल्प के रूप मे सिलीकान का प्रस्ताव 1891 मे खगोलभौतिक वैज्ञानिक जुलियस स्कीनर(Julius Scheiner) ने रखा था। उनके इस तर्क के पीछे कारण था कि सिलिकान के बहुत से यौगिक उच्च तापमान पर भी स्थाई रहते है, इस अवधारणा के अनुसार पृथ्वी की तुलना मे उच्च तापमान वाले ग्रहों का जीवन सिलिकान आधारित…