ओल्बर्स का पैराडाक्स

रात्रि आसमान मे अंधेरा क्यों छाया रहता है ? ओल्बर्स का पैराडाक्स


ब्रह्मांड मे अरबो आकाशगंगाये है, हर आकाशगंगा मे अरबो तारे है। यदि हम आकाश की ओर नजर उठाये तो इन तारों की संख्या के आधार पर आकाश के हर बिंदु पर कम से कम एक तारा होना चाहिये? तो रात्रि … पढ़ना जारी रखें रात्रि आसमान मे अंधेरा क्यों छाया रहता है ? ओल्बर्स का पैराडाक्स

क्या अदृश्य मानव संभव है?


हाल ही मे एक हिन्दी फिल्म आयी है ’मिस्टर ए़क्स” जिसमे नायक अदृश्य हो सकता है। कहानीयों मे , फिल्मो मे अदृश्य होने का कथानक नया नही है, एच जी वेल्स की कहानी ’The invisible man(अदृश्य मानव)‘ मे अदृश्यता का कथानक है। 50 के दशक मे आयी हिंदी फिल्म ’मिस्टर एक्स इन बांबे’ , 80 के दशक की ’मिस्टर इंडीया’ या कुछ वर्षो पहले आयी फिल्म ’गायब’ इन सभी मे नायक अदृश्य हो सकता है। हालीवुड की फिल्म ’The Hollow Man’ मे भी यही कथानक है। इस लेख मे हम चर्चा करेंगे कि क्या अदृश्य मानव संभव है?

सबसे पहले हम समझने है कि प्रयास करते है कि हमारी आंखे किसी वस्तु को कैसे देखती है?

हमारी आंखे किसी वस्तु को कैसे देखती है?

800px-Blausen_0388_EyeAnatomy_01हमारी आंखे किसी कैमरे की तरह होती है। आंखो मे एक लॆंस और एक पर्दा होता है। इस परदे पर हमारी आंखो द्वारा देखे जा सकने वाली किसी भी वस्तु की छवि बनती है। लेंस पारदर्शी होता है जिससे जब हम किसी भी वस्तु को देखते है तब उस उस वस्तु द्वारा परावर्तित प्रकाश की किरणे आंखो के लेंस द्वारा हमारी आंखो के पर्दे अर्थात रेटिना पर केंद्रित की जाती है। रेटीना अपारदर्शी होता है, जिससे उस पर छवि बनती है। इस रेटिना मे दो तरह की प्रकाश संवेदक तंत्रिकायें होती है जिन्हे शंकु और राड कहते है। ये तंत्रिकाये उन पर पड़ने वाली प्रकाश किरणो को महसूस कर उन संकेतो को हमारे मस्तिष्क तक पहुंचाती है जिससे हमारा मस्तिष्क उस छवि को देख पाता है।

इस सारी प्रक्रिया मे महत्वपुर्ण है पारदर्शी लेंस और अपारदर्शी रेटिना, लेंस प्रकाश को केद्रित कर रेटिना पर छवि बना रहा है।

कोई दृश्य वस्तु क्या होती है ?

दृश्य/अदृश्य
दृश्य/अदृश्य

किसी भी वस्तु के हमारी आंखो द्वारा देखे जा सकने के लिये आवश्यक है कि उस वस्तु से परावर्तित प्रकाश हमारी आंखो तक पहुंचे। यदि उस वस्तु के आरपार प्रकाश निकल जाये तो उस वस्तु को देखा नही जा सकेगा। अर्थात वह वस्तु अदृश्य होगी। किसी मानव के अदृश्य होने का अर्थ है कि प्रकाश उसके शरीर के भी आर पार चला जाना चाहिये। उसी स्थिति मे मानव अदृश्य हो पायेगा। लेकिन इसका अर्थ यह भी होगा कि मानव शरीर  पारदर्शी होगा, अर्थात आंखो के अंदर का रेटिना भी पारदर्शी होगा।

जब रेटिना भी पारदर्शी होगा तो छवि कहाँ बनेगी? जब छवि ही नही बनेगी तो हम देख ही नही पायेंगे! अर्थात अदृश्य मानव अंधा होगापढ़ना जारी रखें “क्या अदृश्य मानव संभव है?”

अर्ध-प्रकाशगति(149,896 किमी/सेकंड) से घूर्णन करता श्याम विवर


श्याम विवर(black hole) इस ब्रह्मांड की सबसे विचित्र संरचनाओं मे से एक है। वे ब्रह्माण्ड के ऐसे निरंकुश दानव है जो अपने आसपास फटकने वाले चंद्रमा, ग्रह, तारे और समूचे सौर मंडलो को निगल जाते है। इनकी पकड़ से प्रकाश … पढ़ना जारी रखें अर्ध-प्रकाशगति(149,896 किमी/सेकंड) से घूर्णन करता श्याम विवर

प्रश्न आपके, उत्तर हमारे: 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक के प्रश्नों के उत्तर


पृथ्वी का भार
पृथ्वी का द्रव्यमान

प्रश्न 1 :पूरी पृथ्वी का भार कितना है किलोग्राम मे बताईये अंकों मे और शब्दों ?

RISHI KUMAR अक्टूबर 5, 2013

उत्तर : शायद आपका आशय द्रव्यमान से है; पृथ्वी का द्रव्यमान 5.97219 × 10‍24 किलोग्राम है। 

पृथ्वी सूर्य कि परिक्रमा कर रही है इसलिये तकनीकी रूप से उसका भार शून्य है।

भार और द्रव्यमान दोनो भिन्न राशीयाँ है, भार गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होता है, द्रव्यमान नही।

समांतर ब्रह्माण्ड की अवधारणा
समांतर ब्रह्माण्ड की अवधारणा

प्रश्न 2 : सर में ये जानना चाहता हू के असल में ब्रह्मांड क्या है? और में ये सुनता और पढ़ता हू के ब्रह्मांड अनेक है कहाँ है सर अनेक ब्रह्मांड में सर उठा के देखता हू तो मुझको तो केवल एक ही ब्रह्मांड दिखाई देता है, इस ब्रह्मांड की अवधारणा क्या है.
दूसरा प्रश्न – क्या हमारी मंदाकिनी के बीच में कोई श्याम विवर है अगर नही तो इस मंदाकिनी के समस्त ग्रह, तारे आदि किस के चक्कर लगा रहे है और क्या ये आवश्यक है के प्रत्येक आकाशगंगा के केन्द में कोई श्याम विवर हो ही?

Nadeem Ahmed Khan अक्टूबर 12, 2013

उत्तर : ब्रह्माण्ड का अर्थ है, सम्पूर्ण अस्तित्व अर्थात जो भी हम देखते है, महसूस करते है, ग्रह, तारे, आकाशगंगा तथा उनके मध्य का रिक्त स्थान!
अब आते है आपके पहले प्रश्न के दूसरे भाग की ओर, अन्य ब्रह्माण्ड/समांतर ब्रह्माण्ड की ओर। अभी तक मूल ब्रह्माण्ड जिसके हम और आप एक भाग है, उसके अतिरिक्त अन्य ब्रह्मांड का अस्तित्व केवल एक अवधारणा है, सिद्धांत रूप मे ही है। वे हैं या नही, हम पक्के तौर पर नही कह सकते। एक अवधारणा के अनुसार वे किसी अन्य ऐसे आयाम मे हो सकते है जिसे हम देख या महसूस नही कर सकते है।
दूसरा प्रश्न : आप सही है कि हमारी मंदाकिनी आकाशगंगा के मध्य एक महाकाय श्याम विवर है। हमारी मंदाकिनी के सारे तारे उसी कि परिक्रमा कर रहे है। अभी तक के निरीक्षणो के अनुसार सभी आकाशगंगाओं के मध्य मे महाकाय श्याम विवर है और संभव है कि यह आकाशगंगा के निर्माण के लिये आवश्यक हो।

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प्रश्न आपके उत्तर हमारे : सितंबर 1, 2013 से सितंबर 30,2013 तक के प्रश्न


जहाज लोहे से बना होता है लेकिन पानी मे क्यों नही डूबता ?
जहाज लोहे से बना होता है लेकिन पानी मे क्यों नही डूबता ?

प्रश्न 1 : जब एक लोहे का टुकडा पानी मेँ डूब जाता है तो लोहे का बडा जहाज क्योँ नहीँ डूबता?

-Mahesh Manikpuri  सितम्बर 2, 2013

उत्तर : आर्कमीडीज के सिद्धांत से! लोहे के जहाज़ का आयतन(volume) उसके भार(weight) से अधिक होता है। लोहे का जहाज़ अपने आयतन के बराबर पानी विस्थापित(displace) करता है, यह विस्थापित जल अपने आयतन के तुल्य बल(force) जहाज़ पर लगाता है जिससे जहाज़ पानी पर तैरता है।

जबकि लोहे के टुकड़े का आयतन उसके भार से कम होता है, उसके द्वारा विस्थापित जल उसके भार से कम होता है जिससे वह डूब जाता है।

प्रश्न 2:पहले मुर्गी आयी या अण्डा?

-सागर सितम्बर 2, 2013

उत्तर: जीव विज्ञान के अनुसार जीवों का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। मुर्गी और अंडे के विकास मे लाखों वर्ष लगे है। “मुर्ग़ी और अंडे मे पहले कौन आया?” इस प्रश्न के कोई मायने नहीं है क्योंकि इन दोनो का विकास एक साथ एक क्रम मे हुआ है। 

प्रश्न 3 :क्वांटम कंप्यूटर किस सिद्धांत पर आधारित हैं और यह हमारे आज के कंप्यूटर से किस प्रकार भिन्न होंगे? और आज क्या इन्हें बनाया जा चुका है?और एक सिद्धांत है जिसका मुझे नाम नहीं पता । पर वो शायद कुछ ऐसा है कि एक कण के साथ जो होता है वही किसी दुसरे के साथ भी होता है। और शायद इसकी खोज आइन्स्टीन ने की थी। तो यह सिद्धांत सही से वास्तव में क्या है और इसका नाम क्या है ये मुझे नहीं पता। कृपया इसे बताएं।

-अनमोल सितम्बर 2, 2013

उत्तर : क्वांटम कंप्युटर अभी एक अवधारणा है इसमे सूचनाये क्वांटम टेलीपोर्टेशन के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचायी जायेंगी। दूसरा प्रश्न जिस शब्द को आप भूल गये है वह “क्वांटम एन्टेंगलमेंट” है जो कि क्वांटम टेलीपोर्टेशन से ही संबधित है। इस विषय पर एक लेख क्वांटम भौतिकी श्रॄंखला मे है।

प्रश्न 4 :सर समय क्यो केवल आगे ही क्यो चलता है पिछे क्यो नही

-Ashutosh rao सितम्बर 4, 2013

मेरे पास पूरा उत्तर तो नही लेकिन इस लेख को पढे।

प्रश्न 5: अगर फ्युचर होता है तो हमे फ्युचर मे टाईम मशीन बना ली होगी तो फिर फ्युचर से हमे मिलने कोई क्यों नही आया ?

-अविशेष सितम्बर 7, 2013

यह एक मजबूत तर्क है कि समय यात्रा संभव होती तो भविष्य से समय यात्री आना चाहीये। लेकिन यह भी हो सकता है कि भविष्य के समय यात्री मात्र एक मूक दर्शक हों। वे हम से मिलने मे और कोई बदलाव करने मे असमर्थ हो। समय यात्री शायद भूतकाल मे कोई भी हस्तक्षेप करने मे असमर्थ होंगे क्योकि कोई भी हस्तक्षेप भविष्य को भी बदल देगा। कल्पना किजीये कि कोई समययात्री भूतकाल मे जाकर अपने दादा की उनके विवाह से पहले हत्या कर देता है, इस अवस्था मे वह स्वयं भी पैदा नही हो पायेगा।

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