फिलीपींस में मिली आदि मानव की नई प्रजाति


हम आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) पिछले दस हजार सालों से एकमात्र मानव प्रजाति होने के इस कदर अभ्यस्त हो चुके हैं कि किसी दूसरी मानव प्रजाति के बारे में कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के आरंभ में मानव वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों ने हमारी इस सोच को बदलते हुए बताया कि…

इंसानी करतूतों से जैव प्रजातियों पर मंडराता लुप्त होने का खतरा


हमारा जैव मंडल एक विशाल इमारत की तरह है। हम इंसान इस इमारत के सबसे ऊपरी मंजिल पर बैठे हैं। अगर हम इस इमारत में से जीवों की कुछ प्रजातियों को मिटा भी देते हैं, तो इमारत से सिर्फ कुछ र्इंटें ही गायब होंगी, इमारत तो फिर भी खड़ी रहेगी। परंतु यदि लाखों-लाख की संख्या…

देश की स्वास्थ्य रक्षा के लिए जरूरी है जीनोम मैपिंग


हाल ही में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा एक परियोजना के तहत भारत के एक हजार ग्रामीण युवाओं के जीनोम की सिक्वेंसिंग (अनुक्रमण) किए जाने की योजना तैयार की गई है। दरअसल यह सरकारी नेतृत्व में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए चलाई जा रही एक बड़ी परियोजना का एक हिस्सा होगी, जिसके अंतर्गत लगभग…

जल

परग्रही जीवन भाग 5 : जीवन अमृत – जल एक महान विलायक


अब तक हमारी चर्चा का केंद्र जीवित प्राणीयों की जैवरासायनिक संरचनाओं पर रहा है। यह सब बहुत महत्वपूर्ण था लेकिन हम इस तथ्य को नजर अंदाज नही कर सकते कि ये जैव अणु निर्वात मे कार्य नही करते है। पृथ्वी पर सभी जैव जैव कोशीकाओं के अंदर सभी जैव रासायनिक प्रक्रियायें द्रव जल की उपस्थिति…

मानव भ्रूण में जीन का संपादन(Gene editing in human embryos)

2017-विज्ञान की शीर्ष 10 घटनायें : एक सिंहावलोकन


कुछ कड़वी और कुछ मीठी यादों के साथ साल 2017 विदा लेने ही वाला है। चाहें राजनीतिक घटनाक्रम हो या वैश्विक वैज्ञानिक घटनाक्रम हर मामले में यह साल कई मायनों में अलग रहा। इस साल कई अहम वैज्ञानिक घटनाक्रम, महत्वपूर्ण खोज, शोध अवलोकन और वैश्विक बदलाव भी प्रत्यक्ष रूप से सामने आए। प्रसिद्ध पत्रिका साइंस…

क्रोयोनिक्स : मृत्यु पर विजय पाने का प्रयास


वर्तमान मे ऐसे व्यक्तियों की संख्या बढ़ते जा रही है जो अपने शरीर को क्रायोजेनिकली संरक्षित रखने के लिये कंपनीयों को बड़ी राशि प्रदान कर रहे है। उन्हे मृत्यु के पश्चात भी भविष्य मे पुनर्जीवन की आशा है। क्रायोजेनिक तकनीक को ‘निम्नतापकी’ कहा जाता है, जिसका ताप -0 डिग्री से -150 डिग्री सेल्सियस होता है। ‘क्रायो’ यूनानी शब्द…

पृथ्वी पर जीवन का उद्भव कैसे हुआ ?


पृथ्वी का जन्म आज से 4.5 अरब वर्ष पहले हुआ था। यह माना जाता है कि पृथ्वी की सतह पर जीवन का उद्भव पहले एक अरब वर्ष मे ही हो गया था। सबसे प्राचीन ज्ञात जीव सूक्ष्म तथा आकृतिहीन थे। इनके जीवाश्म सूक्ष्म राड के जैसे है जिन्हे जीवहीन प्रक्रियाओं से बने पदार्थ से अलग…