हर्टजस्प्रुंग-रसेल आरेख

तारों की अनोखी दुनिया


लेखक -प्रदीप (Pk110043@gmail.com) आकाश में सूरज, चाँद और तारों की दुनिया बहुत अनोखी है। आपने घर की छत पर जाकर चाँद और तारों को खुशी और आश्चर्य से कभी न कभी जरुर निहारा होगा। गांवों में तो आकाश में जड़े प्रतीत होने वाले तारों को देखने में और भी अधिक आनंद आता है, क्योंकि शहरों…

KIC 8462852 का व्यवहार विचित्र क्यों है ? क्या यह धुल, ग्रहो के मलबे से है या एलियन सभ्यता के कारण ?

KIC 8462852 : एलीयन सभ्यता ? रहस्य और गहराया!


अक्टूबर मे हमने एक लेख मे एक विचित्र तारे KIC 8462852 से उत्सर्जित प्रकाश मे आने वाली विचित्र कमी के बारे मे चर्चा की थी। इस तारे के प्रकाश मे आने वाली कमी का एक संभावित कारण किसी एलियन सभ्यता द्वारा विशाल डायसन गोले का निर्माण भी था। अब इस तारे से संबधित कुछ और…

वशिष्ठ अरुंधति तारे : दो नही कुल छः तारे!


वशिष्ठ, जिसका बायर नामांकन “ज़ेटा अर्से मॅजोरिस” (ζ UMa या ζ Ursae Majoris) है, सप्तर्षि तारामंडल(Big Dipper/Ursa Major) का चौथा सब से दीप्तिमान तारा है, जो पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से 70वाँ सब से दीप्तिमान तारा भी है। शक्तिशाली दूरबीन से देखने पर ज्ञात हुआ है कि यह वास्तव में 4 तारों का एक…

सूर्य: धधकते आग के गोले की 8 दिलचस्प बातें


इसमें तो कोई दो राय नहीं कि सूर्य है तो जीवन है। ग्रहण के समय यही धधकता आग का गोला चांद के पीछे ढक जाता है और कुछ समय के लिए धरती पर अंधेरा छा जाता है। आइये जानें सूर्य से जुड़ी दिलचस्प बातें।

अंतरिक्ष मे जीवन की संभावना : दो नये पृथ्वी के आकार के ग्रहो की खोज


जब आप रात्रि आकाश का निरीक्षण कर रहे हो तो हो सकता है कि आप इस तारे केप्लर 62को नजर-अंदाज कर दें। यह एक साधारण तारा है, कुछ छोटा , कुछ ठंडा, सूर्य से कुछ ज्यादा गहरे पीले रंग का, इस तारे के जैसे खरबो तारे हमारी आकाशगंगा मे हैं। लेकिन यह तारा अपने आप…

भगोड़ा सितारा ज़ीटा ओफ़ीयुची!


ब्रह्मांडीय सागर मे किसी जहाज़ के जैसे तैरता हुआ यह भगोड़ा सितारा! इस तारे का नाम ज़ीटा ओफ़ीयुची है जो एक विशाल धनुषाकार खगोलीय तंरग का निर्माण कर रहा है। य चित्र अवरक्त प्रकाश मे लिया गया है। इस प्रतिनिधी रंग छवि के मध्य मे निले रंग का तारा ज़ीटा ओफ़ीयुची है को सूर्य से…

20 मई 2012 का कंकणाकृति सूर्यग्रहण


20 मई 2012 के कंकणाकृति सूर्यग्रहण की खूबसूरत तस्वीर। हम जानते है कि सूर्यग्रहण पृथ्वी और सूर्य के मध्य चंद्रमा के आ जाने के कारण से होता है। सामान्य परिस्थितियों मे पृथ्वी से सूर्य का दृश्य आकार और चंद्रमा का दृश्य आकार समान होता है। सूर्य चंद्रमा से हजारो गुणा बड़ा है लेकिन वह पृथ्वी…