सापेक्षतावाद के बारे मे जानने योग्य 12 तथ्य


आइंस्टाइन ने अपने सापेक्षतावाद सिद्धांत के द्वारा विश्व का अंतरिक्ष, समय, द्रव्यमान, ऊर्जा और गुरुत्वाकर्षण के प्रति दृष्टिकोण बदल कर रख दिया था। 1. आइंस्टाइन से पहले गति के को समझने के लिये आइजैक न्यूटन के नियमो का प्रयोग किया जाता था। 1687 मे न्यूटन ने प्रस्तावित किया था कि गुरुत्वाकर्षण समस्त ब्रह्माण्ड को प्रभावित…

ब्रह्माण्ड की 11 अद्भुत आकाशगंगाएँ


पृथ्वी से दूर स्थित अलग-अलग आकाशगंगाओं की रोशनी हम तक लाखों, करोड़ों साल में पहुँचती है। इसीलिए जब हम रात में आसमान को देखते हैं तो हम दरअसल समय की गहराई में झांक रहे होते हैं। नासा की शक्तिशाली हब्बल टेलिस्कोप ने अंतरिक्ष की कई आकाशगंगाओं की तस्वीरों को लेने का अद्भुत काम किया है।…

हृदय मे एक काला रहस्य समेटे खूबसूरत आकाशगंगायें


ब्रह्माण्ड के सबसे खूबसूरत पिण्डो मे स्पायरल आकाशगंगायें है। उनका भव्य प्रभावशाली स्वरूप सैकंडो से लेकर हजारो प्रकाशवर्ष तक विस्तृत होता है, उनकी बाहें सैकड़ो अरब तारो से बनी होती है तथा एक दूधिया धारा बनाती है। लेकिन उनके केन्द्रो की एक अलग कहानी होती है। आज प्रस्तुत है दो खूबसूरत आकाशगंगायें लेकिन अपने हृदय…

ब्रह्माण्ड, हमारी आकाशगंगा, विशालकाय, महाकाय… जब शब्द कम पड़ जाये…


हमारा ब्रह्माण्ड इतना विशाल है कि उसके वर्णन के लिये मेरे पास शब्द कम पड़ जाते है। इतना विशाल, महाकाय कि शब्द लघु से लघुतम होते जाते है। खगोल वैज्ञानिकों ने चीली के VISTA दूरबीन तथा हवाई द्विप की UKIRT दूरबीन के प्रयोग से संपूर्ण आकाश का अवरक्त किरणो मे एक असाधारण अविश्वसनीय रूप से…

eso510, Galaxy,

ऐठी हुयी आकाशगंगा : स्पायरल आकाशगंगा ESO 510-13


ये क्या ? स्पायरल आकाशगंगा ESO 510-13 के आकार को क्या हुआ ? क्या किसी ने इसे मरोड़ कर ऐंठ दिया है ? अधिकतर स्पायरल आकाशगंगाये का मुख्य मंडल (Disk) पतला और सपाट होता है लेकिन यह ठोस नही होता है। स्पायरल मंडल सामान्यत: अरबो तारो और गैसा का एक विशालकाय समूह होता है, जो…

खूबसूरत आइंस्टाइन वलय


इस चित्र के मध्य मे दिखायी दे रहा लाल-पिले रंग का पिंड एक सम्पूर्ण आकाशगंगा है। लेकिन इस आकाशगंग के चारो ओर निले रंग का वलय क्या है और कैसे बना है ? यह निले रंग का वलय गुरुत्विय लेंसीग से बनी मृगतृष्णा(mirage) है। इसे आइन्सटाइन वलय (Einstein Ring) कहते है। आइन्सटाइन वलय किसी तारे…

’मंदाकिनी’ आकाशगंगा केन्द्र के दैत्य को जागृत करने जा रहा है एक गैसीय बादल !


हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के केन्द्र मे स्थित महाकाय श्याम वीवर (Spermassive Black Hole) सामान्यतः एक सोते हुये दैत्य की तरह है। लेकिन यह दैत्य अपनी निद्रा से जागने जा रहा है। पृथ्वी से कई गुणा बड़ा एक गैसीय बादल इस श्याम वीवर की ओर 50 लाख मील/घंटे की गति से इसकी ओर बढ़ रहा है।…