सापेक्षतावाद : सामान्य सापेक्षतावाद
विशेष सापेक्षतावाद ने समय, स्थान और गति के संबंध को समझने में क्रांति ला दी थी। लेकिन यह केवल गति करते हुए अवलोकनकर्ताओं के लिए लागू होता था और गुरुत्वाकर्षण का समावेश नहीं करता था। 1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसे और आगे बढ़ाया और प्रस्तुत किया सामान्य सापेक्षतावाद (General Relativity), जो गुरुत्वाकर्षण और स्पेसटाइम की गहराई तक संबंध समझाता है।
विशेष सापेक्षतावाद के बाद सामान्य सापेक्षतावाद की आवश्यकता क्यों पड़ी?
विशेष सापेक्षतावाद (1905) यह मानकर चलता है कि
1. सभी संदर्भ फ्रेम जड़त्वीय (inertial) हैं
2. गति समान वेग से हो रही है
3. गुरुत्वाकर्षण का इसमें कोई स्थान नहीं है
यह सिद्धांत प्रकाश की गति, समय फैलाव, लंबाई संकुचन, द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता आदि को बहुत सुंदर ढंग से समझाता है, लेकिन इसमें कुछ मूलभूत सीमाएँ थीं
एम्बेड करने के लिए यह यूआरएल अपनी वर्डप्रेस साइट में कॉपी और पेस्ट करें
एम्बेड करने के लिए यह कोड अपनी साइट में कॉपी और पेस्ट करें