स्ट्रींगो के मध्य प्रतिक्रियायें

स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 08 : विसंगतियो का निराकरण और सुपरस्ट्रींग सिद्धांत का प्रवेश


स्ट्रींग सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण बल को अन्य बलों के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत कर देता था लेकिन इस सिद्धांत के कुछ पूर्वानुमान जैसे टेक्यान और 26 आयामी ब्रह्माण्ड इसे हास्यास्पद स्थिति मे ले आते थे। वैज्ञानिको ने इन विसंगतियों को दूर करने का प्रयास किया और एक नये सिद्धांत सुपरस्ट्रींग का विकास किया जिसमे टेक्यान नही थे, 26 आयाम का ब्रह्माण्ड 10 आयामो मे सीमट गया था। यह सिद्धांत आश्चर्यजनक रूप से महासममीती, महाएकीकृत सिद्धांत (GUT) तथा कालिजा-केलीन सुझाव सभी का समावेश करता था।

स्ट्रींग सिद्धांत मे ऋणात्मक द्रव्यमान के वर्गमूल से काल्पनिक द्रव्यमान वाले टेक्यान का निर्माण होता है। किसी बाह्य निरीक्षक के दृष्टिकोण से यह स्ट्रींग की ऋणात्मक ऊर्जा वाली अवस्था के रूप मे होगा। वस्तुतः यह क्वांटम यांत्रीकी के एक तथ्य से संबधित है, अनिश्चितता के सिद्धांत के अनुसार किसी स्थानिय प्रणाली(localised system) मे की निम्नतम ऊर्जा शून्य की ओर प्रवृत्त होकर कम होती है, लेकिन हमेशा शून्य से ज्यादा रहती है। इस ऊर्जा को अविलोपशील ऊर्जा (non-vanishing) कहते है क्योंकि यह कम होती है लेकिन कभी शून्य नही होती है। स्ट्रींग सिद्धांत मे टेक्यान की उपस्थिति को गणितीय रूप से इसी ’अविलोपशीलशून्यबिंदु ऊर्जा(zero-point energy) की उपस्थिति के रूप मे देखा जा सकता है। इससे यह माना गया कि यदि हम एक ऐसे विशेष क्वांटम प्रणाली को परिभाषित कर पाये जिसमे यह शून्यबिंदु ऊर्जा विलोपित(नष्ट) हो जाये अर्थात शून्य हो जाये तब हम एक विशेष स्ट्रींग सिद्धांत का निर्माण कर पायेंगे जिसमे टेक्यान नही होंगे। पढ़ना जारी रखें “स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 08 : विसंगतियो का निराकरण और सुपरस्ट्रींग सिद्धांत का प्रवेश”

पृथ्वी के आकार के ग्रह की खोज!


खगोलशास्त्रीयों ने दूसरी पृथ्वी की खोज मे एक मील का पत्त्थर पा लीया है, उन्होने एक तारे की परिक्रमा करते हुये दो ग्रहों की खोज की है। और ये दोनो ग्रह पृथ्वी के आकार के है! इन ग्रहों को केप्लर … पढ़ना जारी रखें पृथ्वी के आकार के ग्रह की खोज!

’मंदाकिनी’ आकाशगंगा केन्द्र के दैत्य को जागृत करने जा रहा है एक गैसीय बादल !


हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के केन्द्र मे स्थित महाकाय श्याम वीवर (Spermassive Black Hole) सामान्यतः एक सोते हुये दैत्य की तरह है। लेकिन यह दैत्य अपनी निद्रा … पढ़ना जारी रखें ’मंदाकिनी’ आकाशगंगा केन्द्र के दैत्य को जागृत करने जा रहा है एक गैसीय बादल !

कण त्वरकों मे सूक्ष्म कणों के टकराने से भारी ऊर्जा का निर्माण होता है।

ईश्वर कण(हिग्स बोसान) की खोज : शायद हाँ, शायद ना


कण त्वरकों मे सूक्ष्म कणों के टकराने से भारी ऊर्जा का निर्माण होता है।
कण त्वरकों मे सूक्ष्म कणों के टकराने से भारी ऊर्जा का निर्माण होता है।

जेनेवा में महाप्रयोग से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें हिग्स बोसोन या ईश्वर कण की एक झलक मिली है। समझा जाता है कि यही वो अदृश्य तत्व है जिससे किसी भी मूलभूत कण(फर्मीयान अथवा बोसान) को द्रव्यमान मिलता है।

लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी निर्णायक प्रमाणो के लिए उन्हें आने वाले महीनों में अभी और प्रयोग करने होंगे।

पिछले दो वर्षों से स्विट्ज़रलैंड और फ्रांस की सीमा पर 27 किलोमीटर लंबी सुरंग में अति सूक्ष्म कणों को आपस में टकराकर वैज्ञानिक एक अदृश्य तत्व की खोज कर रहे हैं जिसे हिग्स बोसोन या ईश्वर कण(god particle) कहा जाता है। इसे ईश्वर कण इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यही वह अदृश्य-अज्ञात कण है जिसकी वजह से सृष्टि की रचना संभव हो सकी। अगर वैज्ञानिक इस तत्व को ढूँढने में कामयाब रहते हैं तो सृष्टि की रचना से जुड़े कई रहस्यों पर से परदा उठ सकेगा। इस शोध पर अब तक अरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं और लगभग आठ हज़ार वैज्ञानिक पिछले दो वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं।

पढ़ना जारी रखें “ईश्वर कण(हिग्स बोसान) की खोज : शायद हाँ, शायद ना”

महासममीती

स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 07 : विसंगतियों का निराकरण


इसके पहले के हम देख चुके है कि स्ट्रींग सिद्धांत सफलता पूर्वक गुरुत्वाकर्षण को क्वांटम सिद्धांत के साथ एकीकृत कर चुका है। लेकिन इसमे कुछ ऐसी विसंगतिया थी, जो इसे हास्यास्पद बनाती थी। इन विसंगतियो मे टेक्यान और 26 आयामो का अस्तित्व का समावेश है। स्ट्रींग सिद्धांत मे कुछ परिवर्तनो के साथ एक नये सिद्धांत का जन्म हुआ जिसे सुपरस्ट्रींग नाम दिया गया। लेकिन इस सिद्धांत को समझने से पहले हमे इतिहास मे जाकर दो और सिद्धांतो को समझना होगा, ये सिद्धांत है कालुजा़ केलिन का सुझाव(Kaluza-Klein Idea) तथा महासममीती (SuperSymettry)। पढ़ना जारी रखें “स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 07 : विसंगतियों का निराकरण”

केप्लर अंतरिक्ष वेधशाला: सूर्य सदृश तारे के जीवन योग्य क्षेत्र मे पृथ्वी सदृश ग्रह की खोज!


यह एक बड़ा समाचार है। अंतरिक्ष वेधशाला केप्लर ने सूर्य के जैसे तारे के जीवन योग्य क्षेत्र(गोल्डीलाक क्षेत्र) मे एक ग्रह की खोज की गयी है। और यह ग्रह पृथ्वी के जैसे भी हो सकता है। इस तारे का नाम केप्लर … पढ़ना जारी रखें केप्लर अंतरिक्ष वेधशाला: सूर्य सदृश तारे के जीवन योग्य क्षेत्र मे पृथ्वी सदृश ग्रह की खोज!