Posts tagged ‘ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति’

अगस्त 12, 2015

ब्रह्माण्ड के बाहर क्या है?

by आशीष श्रीवास्तव

मान ही लिजिये की आपके मन मे कभी ना कभी यह प्रश्न आया होगा कि ब्रह्माण्ड के बाहर क्या है? खगोलशास्त्री जानते है कि बिग बैंग के पश्चात से ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है, लेकिन यह विस्तार किसमे हो रहा है? किसी भी खगोल शास्त्री से आप यह प्रश्न पूछें, आपको एक असंतोषजनक उत्तर मिलेगा। मै भी आपको एक असंतोषजनक उत्तर देने का प्रयास करता हुं लेकिन आपके असंतोष को दबाने के लिये कुछ स्पष्टीकरण, व्याख्या भी दुंगा।

इस प्रश्न का छोटा उत्तर है कि यह एक निरर्थक बेहुदा प्रश्न है। ब्रह्माण्ड का किसी मे विस्तार नही हो रहा है, केवल ब्रह्माण्ड का ही विस्तार हो रहा है।

ब्रह्माण्ड की परिभाषा है कि वह सब कुछ को समेटे हुये है। यदि ब्रह्माण्ड के बाहर कुछ है अर्थात वह भी ब्रह्माण्ड का ही भाग है। उसके बाहर ? वह भी ब्रह्मांड का भाग है। उसके बाहर, वह भी ब्रह्माण्ड मे ही है। आप पुछते जाइय़े, उत्तर ब्रह्माण्ड ही मिलेगा। मै जानता हुं कि आपके लिये यह संतोषजनक उत्तर है, इसके लिये कुछ अन्य स्पष्टीकरण देखते है।

सबसे बड़ी संख्या कौनसी होती है ? आप कहेंगे ∞ या अनंत। चलो मान लिया। अब बताईये कि (∞ + 1) का मूल्य क्या है? क्या (∞ + 1 ) संख्या ∞ से बड़ी नही है ?

लेकिन ∞ + 1= ∞ , अर्थात अनंत से बड़ी संख्या भी तो अनंत ही होती है। इसी तरह से ब्रह्माण्ड के बाहर भी ब्रह्माण्ड ही है, असिमित!

ब्रह्मांड का 13.7 अरब वर्ष मे हुआ विस्तार

ब्रह्मांड का 13.7 अरब वर्ष मे हुआ विस्तार

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बिग बैंग के 1.6 अरब वर्ष के पश्चात ब्रह्मांड

रूकिये रूकिये, संतोष नही हुआ ? कंप्युटर पर क्रोध ना निकाले, एक और उदाहरण लेते है।

ब्रह्माण्ड के बारे मे दो संभावनाये है, पहली कि वह अनंत है, उसकी कोई सीमा नही है। दूसरी संभावना है कि ब्रह्माण्ड सीमित है, सीमित आयतन है। लेकिन दोनो ही संभावनाओं मे ब्रह्माण्ड का कोई छोर, या कोई सिरा संभव नही है। जब भी हम बिग बैंग घटना की कल्पना करते है तब हम एक विस्फोट की कल्पना करते है जिसमे एक बिंदु से पदार्थ बिखरते हुये दिखाती देता है। लेकिन यह उपमा या उदाहरण सही नही है।

बिग बैंग का अधिक सही उदाहरण किसी फुलते गुब्बारे की सतह है। इस उदाहरण मे आप त्रीआयामी गुब्बारे के बारे मे ना सोच कर द्विआयामी गुब्बारे के बारे की कल्पना करें। यदि आप किसी विशालकाय गुब्बारे की सतह पर चलती चिंटी है और वह गुब्बारा समस्त ब्रह्माण्ड है तब आपको अपने पैरो के निचे वह गुब्बारा सपाट ही लगेगा।

motion_2अब मान लिजिये कि वह गुब्बारा फुल रहा है। अब आप किसी भी दिशा मे देखें तो पायेंगे कि अन्य चिटीयां आपसे दूर जा रही है। वे जितनी ज्यादा दूर है वे आपसे उतनी ज्यादा तेजी से दूर जाते दिखायी देंगी। यह गुब्बारा आपको सपाट सतह जैसा लगेगा लेकिन आप किसी भी दिशा मे चलना प्रारंभ करें आप अपने शुरुवाती बिंदु पर पहुंच जायेंगे।

आप कल्पना कर सकते है कि एक विस्तार करता हुआ वृत्त है और चकित हो सकते है कि यह वृत्त किस चीज मे बढ़ रहा है। लेकिन यह प्रश्न निरर्थक है। ऐसी कोई दिशा नही है कि आप उस दिशा मे बढ़े और सतह के बाहर पहुंच जाये। चिंटी का द्विआयामी मस्तिष्क किसी त्रीआयामी वस्तु के बारे मे कल्पना नही कर सकता है। गुब्बारे का केंद्र हो सकता है लेकिन उसकी सतह का कोई केंद्र बिंदु नही है, वह एक ऐसा आकार है जो हर दिशा मे विस्तृत है और अपने आप मे सिमटा हुआ है। आपकी इस गुब्बारे की हर परिक्रमा पिछली परिक्रमा से बड़ी है क्योंकि गुब्बारा फुलते जा रहा है।

अब इसे अपने ब्रह्मांड से जोड़कर देखते है, उसके लिये हमे एक आयाम से दो आयाम, दो आयाम से तीन आयाम और तीन आयाम से चार आयाम मे सोचना होगा। खगोलवैज्ञानिको के अनुसार आप किसी भी दिशा मे यात्रा प्रारंभ करे आप अपने शुरुवाती बिंदु पर पहुंच जायेंगे। यदि आप अंतरिक्ष बहुत दूर देख रहे है तो आप अपने सिर के पिछले भाग को देख रहे है।

ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है जिससे आपको ब्रह्मांड की परिक्रमा कर प्रारंभ बिंदु पर पहुंचने मे हर बार पिछली बार से अधिक समय लगेगा। लेकिन आप किसी भी दिशा मे यात्रा करने पर आप ब्रह्माण्ड के बाहर नही जा सकते है। यदि आप प्रकाशगति से भी तेज यात्रा करें तब भी आप अपने प्रारंभिक बिंदु पर शिघ्र पहुंच जायेंगे लेकिन ब्रह्माण्ड के बाहर नही। हम हर दिशा मे अपने से दूर जाती हुयी आकाशगंगाओं को देखते है, वह किसी फूलते गुब्बारे की सतह पर बैठी चिंटीयो को अन्य चिटीयो के अपने से दूर होते जाने के तुल्य ही है।

शायद अब तक आपको लग ही गया होगा कि इस प्रश्न का कोई उत्तर नही है कि ब्रह्माण्ड का विस्तार किस मे हो रहा है! ब्रह्मांड का कोई छोर नही है, उसका किसी भी वस्तु मे विस्तार नही हो रहा है, केवल ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है।

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ब्रह्मांड का केंद्र कहाँ है ?

सितम्बर 13, 2013

ब्रह्माण्ड का केन्द्र कहाँ है?

by आशीष श्रीवास्तव

universe_center_wideसरल उत्तर है कि

ब्रह्माण्ड का कोई केन्द्र नही है!

ब्रह्माण्ड विज्ञान की मानक अवधारणाओं के अनुसार ब्रह्माण्ड का जन्म एक महाविस्फोट(Big Bang) मे लगभग 14 अरब वर्ष पहले हुआ था और उसके पश्चात उसका विस्तार हो रहा है। लेकिन इस विस्तार का कोई केण्द नही है, यह विस्तार हर दिशा मे समान है। महाविस्फोट को एक साधारण विस्फोट की तरह मानना सही नही है। ब्रह्माण्ड अंतरिक्ष मे किसी एक केन्द्र से विस्तारीत नही हो रहा है, समस्त ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है और यह विस्तार हर दिशा मे हर जगह एक ही गति से हो रहा है।

1929 मे एडवीन हब्बल ने घोषणा की कि उन्होने हम से विभिन्न दूरीयों पर आकाशगंगाओं की गति की गणना की है और पाया है कि हर दिशा मे जो आकाशगंगा हमसे जितनी ज्यादा दूर है वह उतनी ज्यादा गति से दूर जा रही है। इस कथन से ऐसा लगता है कि हम ब्रह्माण्ड के केन्द्र मे है; लेकिन तथ्य यह है कि यदि ब्रह्माण्ड का विस्तार हर जगह समान गति से हो रहा हो तो हर निरीक्षण बिंदु से ऐसा प्रतीत होगा कि वह ब्रह्मांड के केन्द्र मे है और उसकी हर दिशा मे आकाशगंगाये उससे दूर जा रही है।

अप्रैल 23, 2012

सरल क्वांटम भौतिकी : कण त्वरक तथा जांचक (Particle Accerator and Detectors)

by आशीष श्रीवास्तव

इस ब्लाग पर हमने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति , उसे बनाने वाले मूलभूत तत्वो, घटको की खूब चर्चा की है। हम जानते है कि हमारा दृश्य विश्व, हमारी आकाशगंगा, हमारी धरती और हम स्वयं किससे निर्मित है। लेकिन हम यह सब कैसे जानते है ? इस प्रमाण क्या है ? क्या हमने इसे प्रायोगिक रूप से प्रमाणित किया है या केवल गणितीय/दार्शनिक तुक्के हैं ?

हम यह सब कैसे जानते है ?

सिद्धांत और वास्तविकता

सिद्धांत और वास्तविकता

इस ब्लाग पर हम भौतिकी के विभिन्न आयामो, जिसमे से एक प्रमुख स्तंभ स्टैंडर्ड माडेल की चर्चा करते रहें है। स्टैंडर्ड माडेल विचित्र नामो वाले नन्हे, अदृश्य परमाण्विक कणो के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या करता है। यह सभी वैज्ञानिक सिद्धांत “एलीस इन वंडरलैण्ड” के जादुई विश्व के जैसे लगते है, लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण है कि भौतिकशास्त्र मे किसी कमरे मे बैठकर कहानीयाँ नही गढी़ जाती है। इस विज्ञान मे विभिन्न अवधारणाओं को प्रयोगशाला मे जांचा परखा जाता है, उसके परिणामों के आधार पर सिद्धांत गढे़ जाते है।

सिद्धांतो की जांच-परख के लिये वैज्ञानिक प्रयोग करते है, इन प्रयोगो मे वे ज्ञात सूचनाओं के प्रयोग से अज्ञात को जानने का प्रयास करते हैं। ये प्रयोग सरल आसान से लेकर जटिल तथा विशाल भी हो सकते है।

स्टैंडर्ड माडेल मानव के पिछले हजारो वर्षो के वैज्ञानिक अन्वेषण पर आधारित है लेकिन हमारी कण-भौतिकी के हमारी वर्तमान अवधारणाओं को आकार देने वाले अधिकतर प्रयोग हाल में ही घटित हुयें है। कण भौतिकी के सिद्धांतो की जांच प्रयोग की कहानी पिछले सौ वर्षो से भी कम समय पहले से प्रारंभ हुयी है।

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