Posts tagged ‘इलेक्ट्रान’

अक्टूबर 27, 2014

कण भौतिकी(Particle Physics) क्या है?

by आशीष श्रीवास्तव

नई वैज्ञानिक खोजो के समाचार मे प्रोटान, इलेक्ट्रान, न्युट्रान, न्युट्रीनो तथा क्वार्क का नाम आते रहता है। ये सभी के परमाण्विक कणो के एक चिड़ीयाघर के सदस्य  है  और ये इतने सूक्ष्म है कि उन्हे सूक्ष्मदर्शी से देखा जाना भी संभव नही है। हम आम तौर पर अपने आसपास जो भी कुछ देखते है वे सभी अणुओ और परमाणुओं से बने है, लेकिन हमे परमाण्विक मूलभूत कणो के अध्ययन के लिये अणु और परमाणु के भीतर भी झांकना होता है जिससे हम ब्रह्माण्ड की प्रकृति को समझ सके । इस विज्ञान की इस शाखा के अध्ययन को कण भौतिकी(Particle Physics), मूलभूत कण भौतिकी( Elementary Particle Physics) या उच्च ऊर्जा भौतिकी(High Energy Physics (HEP)) कहा जाता है।

परमाणु की संकल्पना ग्रीक दार्शनिक डेमोक्रिट्स तथा भारतीय ऋषी कणाद ने सदियो पहले दी थी, पिछली सदी(20 वीं) के प्रारंभ तक इन्हे हर तरह के पदार्थ के निर्माण के लिये आवश्यक मूलभूत कण माना जाता रहा था। प्रोटान, न्युट्रान और इलेक्ट्रान के बारे मे हमारा ज्ञान रदरफोर्ड के प्रसिद्ध प्रयोग के पश्चात ही विकसित हुआ है, जिसमे हम पाया था कि परमाणु का अधिकतर भाग रिक्त होता है तथा इसके केंद्र मे प्रोटान और न्युट्रान से बना एक घना केंद्रक होता है और बाह्य लगभग रिक्त स्थान मे इलेक्ट्रान गतिमान रहते है।

परमाणू संरचना

परमाणू संरचना

कण भौतिकी विज्ञान को कण त्वरको ( particle accelerators) के अविष्कार के पश्चात तीव्र गति प्राप्त हुयी, जो कि प्रोटान या इलेक्ट्रान को अत्यंत तेज ऊर्जा देकर उन्हे ठोस परमाणु नाभिक से टकरा सकते है। इन टकरावों के परिणाम वैज्ञानिको के लिये आश्चर्यजनक थे, जब उन्होने इन टकरावो मे उत्पन्न ढेर सारे नये कणो को देखा।

1960 के दशक के प्रारंभ तक कण त्वरक कणों को अत्याधिक ऊर्जा देने मे सक्षम हो गये थे और इन टकरावो मे उन्होने 100 से ज्यादा नये कणो का निरीक्षण किया था। क्या ये सभी उत्पन्न कण मूलभूत है? वैज्ञानिक एक लंबी अवधि तक पिछली सदी के अंत तक संशय मे रहे। सैद्धांतिक अध्ययन और प्रयोगों कि एक लंबी श्रॄंखला के पश्चात ज्ञात हुआ कि इन मूलभूत कणो के दो वर्ग है जिन्हे क्वार्क(quark) और लेप्टान(lepton) कहा गया। लेप्टान कणो के उदाहरण इलेक्ट्रान(electron) , न्युट्रीनो(neutrino)) है।  इनके साथ मूलभूत बलों(fundamental forces) का एक समूह है जो इन कणो से प्रतिक्रिया करता है।  ये मूलभूत बल भी ऊर्जा का संवहन विशेष तरह के कणो की पारस्परिक अदलाबदली से करते है जिन्हे गाज बोसान(gauge bosons) कहते है। इसका एक उदाहरण फोटान है जोकि प्रकाशऊर्जा  का पैकेट है और विद्युत-चुंबकिय बल (electromagnetic force)का संवहन करता है।

फ़रवरी 6, 2012

सरल क्वांटम भौतिकी: मूलभूत क्या है ?

by आशीष श्रीवास्तव

द थिंकर (विचारक)

द थिंकर (विचारक)

 सनातन प्रश्न

सदियों से मानव के मन मे प्रश्न रहा है:

“विश्व किससे निर्मित है?”

“इसे कौन बांधे रखता है?”

clip_image003प्रश्न: इस पुतले का नाम क्या है और इसका शिल्पकार कौन है?

उत्तर :

शिल्पकार: राडीन (Rodin)

 नाम: द थिंकर (The Thinker)

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अप्रैल 25, 2011

मानक प्रतिकृति की कमियाँ और आलोचनाएं: ब्रह्माण्ड की संरचना भाग ५

by आशीष श्रीवास्तव

मानक प्रतिकृति(Standard Model) एक सफल सिद्धांत है लेकिन इसमे कुछ कमीयां है। यह कुछ मूलभूत प्रश्नो का उत्तर देने मे असमर्थ है जैसे द्रव्यमान का श्रोत, मजबूत CP समस्या, न्युट्रीनो का दोलन, पदार्थ-प्रतिपदार्थ असममिती और श्याम पदार्थ तथा श्याम उर्जा का श्रोत

एक समस्या मानक प्रतिकृति(Standard Model) के गणितिय समिकरणो मे है जो साधारण सापेक्षतावाद सिद्धांत(Theory of General Relativity) से मेल नही खाती है। ये सिद्धांत (एक या दोनो) कुछ विशेष परिस्थितियों (महाविस्फोट के दौरान(During Big Bang), श्याम विवर के घटना क्षितिज के पास (Event Horizons of Black Hole)) की व्याख्या नही कर पाते है और असामान्य परिणाम दर्शाते है।

अप्रैल 18, 2011

मानक प्रतिकृति: ब्रह्माण्ड की संरचना भाग ४

by आशीष श्रीवास्तव

इस श्रंखला मे अब तक मूलभूत कण तथा मूलभूत बल की चर्चा हुयी है। मानक प्रतिकृति (Standard Model) मूलभूत बल तथा मूलभूत कणों के सम्पूर्ण ज्ञात सिद्धांतो का समावेश करता है। अब तक के लेखो मे वर्णीत महा एकीकृत सिद्धांत(Grand Unified Theory)  मानक प्रतिकृती का ही एक भाग है। यह सिद्धांत २० वी शताब्दी की शुरुवात से लेकर मध्य तक विकसीत हुआ है तथा १९७० मे क्वार्क के आस्तित्व के प्रायोगिक निरीक्षण के पश्चात मान्य हुआ है। इसके पश्चात बाटम क्वार्क (१९७७), टाप क्वार्क(१९९५) तथा टाउ न्युट्रीनो(२०००) की खोज के बाद इस सिद्धांत को प्रामाणिकता मिली है। इस सिद्धांत द्वारा विभिन्न प्रायोगिक निरीक्षणो को सैद्धांतिक रूप से सत्यापन करने मे मिली सफलता के कारण इसे पूर्ण सिद्धांत माना जाता है।

अप्रैल 4, 2011

मूलभूत कण और मूलभूत बल: ब्रह्माण्ड की संरचना भाग २

by आशीष श्रीवास्तव

भौतिकी मे विभिन्न कणो द्वारा एक दूसरे कणो पर डाला गया प्रभाव मूलभूत बल कहलाता है। यह प्रभाव दूसरे किसी प्रभाव के द्वारा प्रेरीत नही होना चाहीये। अब तक चार ज्ञात मूलभूत बल है, विद्युत-चुंबकिय बल, कमजोर नाभिकिय बल, मजबूत नाभिकिय बल तथा गुरुत्वाकर्षण

क्वांटम भौतिकी के अनुसार पदार्थ के कणो के मध्य विभिन्न बल पूर्णांक स्पिन(०,१,२) वाले कणो के द्वारा वहन किये जाते है। यह कुछ इस प्रकार है कि जब कोई पदार्थ-कण (इलेक्ट्रान या क्वार्क) किसी बल-वाहक कण(Force Carrying Particle) का उत्सर्जन करता है, इस उत्सर्जन से उस पदार्थ-कण(इलेक्ट्रान या क्वार्क) की गति मे परिवर्तन आता है। बल-वाहक कण किसी पदार्थ कण से टकराकर अवशोषित कर लिया जाता है, इस टकराव से पदार्थ-कण की गति मे परिवर्तन आता है, जैसे इन दोनो पदार्थ कणो के मध्य किसी बल ने अपना प्रभाव दिखाया हो। बल वाहक कण पाली के व्यतिरेक सिद्धांत(Exclusion Principal) का पालन नही करते है अर्थात दो पदार्थ-कणो के मध्य कितने ही बलवाहक कणो का आदान प्रदान हो सकता है, जोकि मजबूत बलो के लिए आवश्यक है। लेकिन अधिक द्रव्यमान वाले बलवाहक कणो का ज्यादा दूरी के पदार्थ कणो के मध्य आदान प्रदान कठिन है, इस कारण इन बलो का प्रभाव कम दूरी पर ही होता है। दूसरी ओर यदि बलवाहक कण का द्रव्यमान न हो तब बल का प्रभाव ज्यादा दूरी पर होगा। पदार्थ कणो के मध्य आदान प्रदान होने वाले इन बल वाहक कणो को आभासी कण(Virtual Particle) कहा जाता है क्योंकि उन्हे वास्तविक कणो की तरह कण जांचको(particle detector) द्वारा पकड़ा नही जा सकता है। हम जानते है कि बल-वाहक कणो का आस्तित्व है क्योंकि इनका मापन करने योग्य प्रभाव होता है तथा वे पदार्थ कणो के मध्य बलो को उत्पन्न करते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों मे ०,१,२ स्पिन के कण वास्तविक कणो की तरह पकड़ा जा सकता है। इन परिस्थितियो मे ये कण तरंगो के जैसे व्यव्हार करते है जैसे प्रकाश किरणे या गुरुत्वाकर्षण की तरंगे। कभी कभी ये कण पदार्थ कणो के मध्य बल-वाहक आभासी(virtual) कणो के आदानप्रदान के दौरान भी उत्सर्जित होते है। उदाहरण के लिए दो इलेक्ट्रान के मध्य विद्युत बल उनके मध्य आभासी फोटानो के आदान प्रदान के कारण होता है जिन्हे देखा नही जा सकता है। लेकिन कोई इलेक्ट्रान किसी दूसरे इलेक्ट्रान के पास से गुजरने पर वास्तविक फोटान को उत्सर्जित कर सकता है जिसे हम प्रकाश किरण के रूप मे देख सकते है।

मार्च 28, 2011

मूलभूत कण और मूलभूत बल: ब्रह्माण्ड की संरचना भाग १

by आशीष श्रीवास्तव


यह श्रंखला पदार्थ और उसकी संरचना पर आधारित है।  इस विषय पर हिन्दी में लेखो का अभाव है ,इन विषय को हिन्दी में उपलब्ध कराना ही इस श्रंखला को लिखे जाने का उद्देश्य है। इन श्रंखला के विषय होंगे:

  • १. मूलभूत कण(Elementary particles)
  • २.मूलभूत बल(Elementary Forces)
  • ३.मानक प्रतिकृति(Standard Model)
  • ४.प्रति पदार्थ(Antimatter)
  • ५. ऋणात्मक पदार्थ(Negative Matter)
  • ६. ग्रह, तारे, आकाशगंगा  और निहारिका
  • ७. श्याम वीवर(Black Hole)
  • ८.श्याम  पदार्थ तथा श्याम ऊर्जा (Dark Matter and Dark Energy)
  • ९. ब्रह्मांड का अंत (Death of Universe)

पदार्थ पृथक सूक्ष्म   कणो से बना होता है और उसे मनमाने ढंग से सूक्ष्म  से सूक्ष्मतम रूप मे तोड़ा नही जा सकता है, यह सिद्धांत पिछले सहस्त्र वर्षो से सर्वमान्य है। लेकिन यह सिद्धांत दार्शनिक आधार पर ही था, इसके पिछे प्रयोग और निरिक्षण का सहारा नही था। दर्शनशास्त्र मे इस पृथक सूक्ष्म कण अर्थात परमाणु की प्रकृती विभिन्न संस्कृती और सभ्यताओ मे अलग अलग तरह से परिभाषित की गयी थी। एक परमाणु का मूलभूत सिद्धांत वैज्ञानिको द्वारा रसायन शास्त्र मे नये आविष्कार के पश्चात पिछली कुछ शताब्दी मे मान्य हुआ है।

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